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यहां सीएम की नहीं सुनते हैं अधिकारी
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 21 Oct 2013 09:29 AM IST
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने रविवार को नए जिला न्यायालय परिसर के शिलान्यास कार्यक्रम में नैनीताल के नाम पर अफसरों की बहानेबाजी पर तंज कसा।
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सीएम ने कहा कि अधिकारी काम करने से बचते हैं। जब कभी पूछो तो बताया जाता है कि साहब नैनीताल गए हैं। अफसर एक दिन के बहाने तीन दिन तक नैनीताल में रहते हैं। कहा कि अदालत को चाहिए कि अफसरों को शनिवार को भी न्यायालय में बुलाए, ताकि काम का हर्जा न हो।
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गरीबों को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायालयों में लंबित वादों में कमी आए इसके लिए सरकार कमजोर और अनायास दर्ज किए गए वादों की समीक्षा करके उन्हें वापस लेगी। इसमें महिलाओं, मजदूर और गरीबों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार की ओर से इसके आदेश दिए गए हैं।
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इस मौके पर नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बारिन घोष ने कहा कि अच्छा न्यायिक परिसर बनने से वादों के निस्तारण में तेजी आएगी। जनता को अच्छी सुविधा मिलेगी। लंबित वादों का शीघ्र स्थायी समाधान होगा, जिससे देश के आर्थिक विकास में मदद मिलेगी।
सही कह रहे हैं सीएम साहब
- शुरू नहीं हो पाया मतदाता अभियान : 18 अक्तूबर से प्रदेश भर में नए मतदाता बनाने का अभियान आरंभ होना था लेकिन अधिकारियों की हीलाहवाली के कारण यह मुहिम शुरू नहीं हो पाई।
- खाद्य सुरक्षा योजना को लगा पलीता : यह केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी योजना है। इसके लिए प्रदेश भर में सर्वे का कार्य शुरू किया गया था लेकिन आज इसमें क्या प्रगति हुई कोई भी बताने की स्थिति में नहीं है।
खतरों के बीच जी रहे लोग : लंबे समय बाद भी विभिन्न जिलों में खतरे के लिहाज से संवेदनशील और अतिसंवेदनशील गांवों का विस्थापन नहीं हो सका। प्रदेश में ऐसे गांवों की संख्या लगभग 400 है।
यहां भी नहीं दिखाई चुस्ती-उत्तरकाशी जिले में बाढ़ सुरक्षा कार्य आधे-अधूरे, जनता आंदोलित। लोगों का मानना है कि अधिकारी चुस्त होते तो बाढ़ सुरक्षा कार्य कब के पूरे हो गए होते।
- लापरवाही में उलझे फ्लाईओवर: राजधानी में मुख्यमंत्री ने चार फ्लाईओवर और एक रेलवे अंडर ब्रिज की घोषणा की थी। इसका शिलान्यास भी हो गया लेकिन सात माह बाद भी इनके कार्य में कोई प्रगति नहीं हुई है।
- कराह रहा संशोधित मास्टर प्लान : 22 माह से राजधानी का संशोधित मास्टर प्लान नौकरशाहों की टेबल पर पड़ा कराह रहा है। जबकि यह राजधानी के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन शासन में बैठे अफसरों को इसकी चिंता नहीं है।
- कई वारदातों का खुलासा नहीं : राजधानी में एक डाक्टर और एक ठेकेदार की पत्नी की हत्या हो जाती है। पुलिस कर्मियों पर हमला करके बदमाश भाग जाता। अस्पताल से कैदी फरार हो जाता है लेकिन पुलिस किसी भी मामले को हल नहीं कर पाती।
अच्छा करो तब भी बुराई
मुख्यमंत्री ने न्यायालय भवन के शिलान्यास के मौके पर कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मुझे न्यायपालिका में योगदान के साथ ही जनता का प्रतिनिधित्व करने का भी अवसर मिला है। कोर्ट में फुल बैंच पर बैठते हुए कोई कटाक्ष अथवा आरोप नहीं लगा सकता, लेकिन सियासत में अच्छा काम करो तब भी बुराई ही मिलती है। कोई फाइल आती है तो डर लगता है, डर कर फाइल पढ़ता हूं और फिर हस्ताक्षर करता हूं।