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'संस्कार अच्छे होते तो निर्भया कांड न होता'
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 17 Nov 2013 07:54 AM IST
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उत्तराखंड की प्रकृति जिस तरह से प्रदूषण रहित है ठीक उसी तरह बच्चों को बुरे प्रभावों के प्रदूषण से बचाना होगा। बच्चे देश का भविष्य हैं और बच्चों की डोर शिक्षकों के हाथों में हैं। यह कहना है मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का।
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निर्भया कांड नहीं होता
मुख्यमंत्री केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्वर्ण जयंती के अवसर पर एएमएन घोष सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते दौर में हमारे समाने कई चुनौतियां हैं, जिस तरह से संस्कार थे वैसे नहीं है यदि संस्कार अच्छे होते तो दिल्ली में निर्भया कांड न होता।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय विद्यालय दुर्गम क्षेत्र टिहरी, राजगढ़ी में अपनी शाखा खोल रहा है। विद्यालय खोलने के लिए पूर्ण सहयोग किया जाएगा।
आपदा से क्षेत्र प्रभावित
उन्होंने कहा कि प्रदेश में दैवी आपदा से रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी बुरी तरह से प्रभावित हुए। यहां एक लाख लोग फंस गए थे और 22 सौ गांव कट गए। इतना बड़ा विनाश कभी हिमायली राज्य में नहीं हुआ।
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आपदा के दौरान उत्तराखंड के लोगों ने प्रभावितों की जो मदद की उसने उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया है। आपदा के बाद स्थिति अब सामान्य हो रही है। इस अवसर पर उपायुक्त केंद्रीय विद्यालय संगठन एसएस चौहान ने कहा कि केंद्रीय विद्यालयों की शुरूआत डिफेंस सेक्टर से हुई।
रंगारंग कार्यक्रम पेश किए
शुरूआत में 20 विद्यालय थे अब यह संख्या 11 सौ तक पहुंच गई है। इससे पूर्व कार्यक्रम में बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। समारोह में मेयर विनोद चमोली, आयुक्त केंद्रीय विद्यालय संगठन अविनाश दीक्षित, शिक्षा निदेशक माध्यमिक चंद्र सिंह ग्वाल आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन बीना बैंजवाल ने किया।
इससे पूर्व आयुक्त केंद्रीय विद्यालय संगठन अविनाश दीक्षित ने दोपहर केवि ओएनजीसी में स्वर्ण जयंती द्वार का शुभारंभ किया और प्रदर्शनी का निरीक्षण करने के साथ ही प्रधानाचार्यों की बैठक ली।
प्रियांशु और सार्थक को किया सम्मानित
समारोह में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय विद्यालय आईएमए के दो छात्रों प्रियांशु जोशी और सार्थक को पुरस्कृत किया। प्रियांशु जोशी को गुलदार से अपनी बहन की जान बचाते हुए अदम्य साहस का परिचय देने और सार्थक को जूनियर मास्टर सेफ का ताज जीतने पर सम्मानित किया गया।
केदारनाथ में कहर की याद ताजा होते ही भर आईं आंखें
समारोह में केंद्रीय विद्यालय अपर कैंप के बच्चों ने केदारनाथ नृत्य नाटिका का शानदार मंचन किया। बच्चों ने पांडवों द्वारा केदारनाथ मंदिर के निर्माण से लेकर दैवी आपदा और सेना द्वारा राहत बचाव कार्य को दर्शाया। मंदिर निर्माण के बाद पहाड़ की खुशहाली को बच्चों ने मठु-मठु चौमास डांडयू में सौरी गै गीत पर नृत्य कर दर्शाया।
बच्चों ने गीत -पहाड़ों पर टूटा पहाड़ों का पानी न जीवन बचा न घरों की निशानी, के जरिये जैसे ही पहाड़ में हुई तबाही का दर्द सुनाया लोगों की आंखें भर आईं। इसके कुछ देर बाद जैसे ही सरकार के मंदिर के पुराने स्वरूप का लौटाने के लिए हो रहे प्रयास को दर्शाया गया पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। नृत्य नाटिका का समापन नंदा देवी राजजात यात्रा के जय भोला, जै भगवती नंदा गीत से हुआ।
जब भावुक हो उठे मुख्यमंत्री
बच्चों की प्रस्तुति देख मुख्यमंत्री भी भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आई दैवी आपदा से नौटी से आगे का मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया। इससे नंदा देवी यात्रा नहीं हो पाई, लेकिन बच्चों की इस प्रस्तुति से क्षेत्र की सभ्यता और संस्कृति की झलक देखने को मिली।
सीएम ने कहा कि इतनी शानदार प्रस्तुति देने वाले ये बच्चे और इनके शिक्षक बधाई के पात्र हैं। 23 नवंबर को इन बच्चों और शिक्षकों को छुट्टी दी जाए। इस दिन ये बच्चे और इनके शिक्षक सीएम आवास पर भोज के लिए आमंत्रित हैं। सीएम बोले यदि वे वकील न होते तो शिक्षक होते।