ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का मोर्चा अब खुद संभालेंगे सीएम रावत
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का मोर्चा खुद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संभाल लिया है। रविवार को उन्होंने न केवल शासन बल्कि रेल विकास निगम लि. (आरवीएनएल) के अफसरों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये प्रोजेक्ट की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश में प्रस्तावित रेल पुल के लिए यूपीसीएल, पिटकुल और जल संस्थान को तय समय सीमा के अंदर विद्युत और पेयजल लाइन शिफ्ट करने के निर्देश दिए।
यूपीसीएल ने 90 दिन में तथा जल संस्थान ने 30 दिन में लाइन शिफ्टिंग कार्य पूरा करने का वादा किया। वहीं रेल पुल की स्थापना के लिए निर्धारित जगह वन विभाग तीन दिन में खाली कर देगा और शेष जमीन 30 दिन में खाली कर देगा।
बैठक में चमोली, पौड़ी, टिहरी और रुद्रप्रयाग जनपदों में भू-अधिग्रहण के लिए आवश्यक पुनर्वास और विस्थापन नीति को जल्द बनाने के निर्देश दिए गए। चमोली एक जून, पौड़ी 10 जून, रुद्रप्रयाग और टिहरी पांच जून तक ड्राफ्ट नीति तैयार कर लेंगे। मुख्यमंत्री ने प्रभावित भवनों के मुआवजे के निर्धारण के लिए व्यावहारिक और जनता के प्रति संवेदनशील मानक तय करने के निर्देश दिए।
47 गांवों में 411 भवन रेल लाइन
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार चारों जनपदों में 47 गांवों में 411 भवन रेल लाइन की जद में आएंगे। सभी जनपदों में रेल लाइन के कार्यों का समन्वय करने के लिए गढ़वाल के अपर मंडल आयुक्त हरक सिंह रावत को मुख्य समन्वयक अधिकारी तैनात किया जाएगा।
आरवीएनएल द्वारा बताया गया कि निगम के डीजीएम का अतिरिक्त प्रभार टिहरी एडीएम के पास है और वो अत्यधिक कार्य के चलते रेल लाइन के लिए पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं, इस पर मुख्यमंत्री ने शीघ्र ही उपयुक्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि चमोली जनपद में अक्तूबर तक और अन्य तीन जनपदों में दिसंबर तक मुआवजा घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है। आरवीएनएल के चीफ प्रोजेक्ट ऑफिसर हिमांशु बडोनी ने बताया कि उन्हें राज्य सरकार के सभी विभागों का पूरा सहयोग मिल रहा है।
अभी तक वन विभाग के दो मामलों में से एक का शासनादेश भी जारी हो गया है और दूसरे में कार्य प्रगति पर है। बैठक में ऋषिकेश-कर्ण प्रयाग प्रोजेक्ट को नेशनल प्रोजेक्ट घोषित करने के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वो स्वयं प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इसके लिए अनुरोध करेंगे।