उत्तराखंड: सीएम त्रिवेंद्र ने दिए निर्देश, स्मार्ट सिटी के रुके काम दोबारा शुरू करें, सोशल डिस्टेंसिंग का रखें ध्यान
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्मार्ट सिटी के रुके कार्यों को दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की गाइडलाइन के तहत कम मानव संसाधन का इस्तेमाल करते हुए निर्माण कार्य शुरू करें। इसके लिए व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन भी हो।
बुधवार को मुख्यमंत्री आवास पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोविड-19 पर नियंत्रण एवं विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर उच्चाधिकारियों के साथ बैठक की। जिसमें कहा कि केंद्र की गाइडलाइन के अनुसार कार्यों को रियायतें दी जाए। कोरोना संक्रमण के मामले पूरे देश में जहां औसतन 7.5 दिनों में दोगुने हो रहे हैं। वहीं उत्तराखंड में 26.6 दिन में दोगुने हो रहे हैं। इस दृष्टि से उत्तराखंड की स्थिति कहीं बेहतर है। कोरोना संक्रमण रोकने में उत्तराखंड तीसरे स्थान पर है।
इसमें स्वास्थ्य कर्मियों के साथ पुलिस और सफाई कर्मियों का बड़ा योगदान है। उन्होंने कोरोना वारियर्स के कार्यों पर संतोष जताते हुए कोविड-19 के नियंत्रण के लिए जन सहयोग की भी प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे व्यवसायियों एवं स्थानीय लोगों की आय का सृजन कैसे हो इसके लिए कार्य योजना बनाई जाए। लॉकडाउन के दौरान छोटे व्यापारियों की आय का साधन पूरी तरह से समाप्त हो गया है। ऐसे में उनकी कमाई के लिए कोई कार्ययोजना तैयार होनी चाहिए, ताकि वे अपने परिवारों को पालन-पोषण कर सकें। इस अवसर पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, प्रमुख सचिव मनीषा पंवार, डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी, सचिव अमित नेगी, नितेश झा, राधिका झा आदि उपस्थित रहे।
गरीबों को समान बांटे, पर फोटो न लें
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंद परिवारों को भोजन और राशन जैसा सामान वितरित करने वालों को फोटो न खिंचवाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि फोटो खिंचवाने से सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन होता है। इस पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए। उन्होंने कोविड-19 पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कोरोना वारियर्स को माला पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर या बुके देकर सम्मान करने को पूरी तरह से प्रतिबंधित करें। वारियर्स का सम्मान दूर से पुष्प वर्षा से किया जा सकता है।
फंसे लोगों को अपने जिले में जाने का इंतजार
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग किसी रिश्तेदार के पास या अन्य कारण से फंसे हुए हैं, उनकी घर वापसी सुनिश्चित की जाए। ग्रीन कैटेगिरी वाले जनपदों में उनका घर है तो पहले स्वास्थ्य जांच की जाए, सुरक्षित पाए जाने पर उन्हें जाने दिया जाए। मुख्यमंत्री के आदेश के अनुसार अभी तक ऐसी कोई गाइडलाइन शासन स्तर से जारी नहीं की गई है, जिसके अनुसार फंसे हुए लोग आवेदन कर सकें। पहले से चली आ रही व्यवस्था के तहत ही पास मिल रहे हैं।