सहारनपुर को उत्तराखंड में मिलाने को लेकर फिर बोले सीएम त्रिवेंद्र, जानिए क्या कहा
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अमर उजाला कार्यालय में फेसबुक लाइव पर पाठकों के सवालों के जवाब में पढ़िए क्या बोले सीएम त्रिवेंद्र...
उत्तराखंड में सहारनपुर को मिलाने का सवाल ही नहीं है। इस मामले को लेकर अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिश हुई है। मेरे बयान को भी गलत तरीके से पेश किया गया- यह कहना है मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का।
बृहस्पतिवार शाम अमर उजाला कार्यालय पटेलनगर पहुंचे मुख्यमंत्री रावत ने सहारनपुर को जोड़ने, गैरसैंण राजधानी, युवाओं के रोजगार, पहाड़ी की दुर्दशा समेत तमाम मुद्दों पर अपनी राय रखी। इस दौरान अमर उजाला देहरादून के फेसबुक लाइव पर कई पाठकों ने भी उनसे सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने उन सभी सवालों के विस्तार से जवाब दिए। पेश हैं पाठकों के चुनिंदा सवाल और मुख्यमंत्री के जवाब...
चुनिंदा सवाल और मुख्यमंत्री के जवाब...
सवाल : सहारनपुर को उत्तराखंड से जोड़ने के मुद्दे की सच्चाई क्या है, क्या सरकार ऐसा कुछ करने जा रही है।
सीएम का जवाब : सहारनपुर को उत्तराखंड से जोड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता। फैक्ट अगर आप देखे या आपने टीवी पर मेरा बयान सुना तो क्लीयर हो जाएगा। मैंने कहा था कि राज्य निर्माण के समय सहारनपुर के लोग चाहते थे कि वह उत्तराखंड में मिलें। सीमावर्ती क्षेत्र होने के नाते बहुत कुछ मिलता-जुलता है लेकिन जोड़ने की दिशा में कुछ नहीं हो रहा।
सवाल : आपके आदेश के बावजूद न सड़कों के गड्ढे भरे गए और न अवैध होर्डिंग उतरे।
जवाब : ऐसा नहीं है। आदेश के बाद अवैध होर्डिंग में खासी कमी है, बाकी भी धीरे-धीरे किया जा रहा है।
सवाल : युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार क्या कर रही है?
सीएम का जवाब : जितने बेरोजगार हैं, उतनी नौकरियां उपलब्ध नहीं कराई जा सकती, इसलिए सरकार का फोकस स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर है। सरकार युवाओं के कौशल विकास पर काम कर रही है। अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से उन्हें तैयार किया जा रहा है। लोग स्वरोजगार करें इसके लिए सरकार प्रयास कर रही है।
चुनिंदा सवाल और मुख्यमंत्री के जवाब...
सवाल : सरकार स्थाई नियुक्तियां क्यों नहीं कर रही? अस्थाई नियुक्ति में कुछ समय बाद युवा हटा दिए जाते हैं, जिसके बाद वह सड़कों पर उतरकर आंदोलन करते हैं।
जवाब : स्थाई नियुक्ति की लंबी प्रक्रिया है। लोक सेवा आयोग को आज कहें तो भर्ती में सालों लगते हैं। तात्कालिक जो जरुरतें हैं, उनके लिए यह रास्ते निकाले जाते हैं। दुनिया के तमाम विकसित देशों में कांट्रेक्ट की व्यवस्था सबसे ज्यादा चलती है। कांट्रेक्ट कोई खराब चीज है ऐसा नहीं है।
सवाल : गर्मियों की शुरूआत होते ही पेयजल की किल्लत होने लगी है, निपटने को सरकार क्या कर रही है?
जवाब : जल स्त्रोतों के सूखने के कारण पानी की दिक्कत हो रही है। जल स्त्रोंतों के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए 900 करोड़ रुपये की योजना है। इसमें से 200 करोड़ रुपया झील बनाने में खर्च होगा। झीलों के बनने से आने वाले कई वर्षों तक पानी की कमी नहीं रहेगी। भूजल का स्तर बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का यह इंटरव्यू अमर उजाला देहरादून के फेसबुक पेज पर देखा जा सकता है।