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सरकार को खंडूरी का लोकायुक्त अभी और खटकेगा

Sat, 21 Dec 2013 10:18 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 21 Dec 2013 10:18 AM IST
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cm postponed khanduri lokayukta

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भले ही लोकपाल को बदल लोकायुक्त बिल लाने और खंडूरी के लोकायुक्त को खारिज करने की बात कह रहे हों।

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बिल विधानसभा से पारित
लेकिन तकनीकी तौर अभी कुछ पेंच उन्हें परेशान करेंगे। मुख्यमंत्री इसे कैबिनेट में लाकर राष्ट्रपति से मंजूरी की बात कह रहे हैं। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का कहना है कि बिल विधानसभा से पारित हुआ है।
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उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति की भी मुहर लगी है। लिहाजा इसे विधानसभा में ले जाना होगा। उनका कहना है कि सरकार के पास ताकत है। हमारी तरह सर्वसम्मति से न सही इसे बहुमत से पास तो कराना ही होगा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में यह जानकारी दी। लोकपाल बन जाने के बाद भी खंडूरी अभी भी मानते हैं उनका लोकायुक्त बिल प्रदेश के हित में था।

राष्ट्रपति से मंजूरी मिली

इसमें न्यायपालिका को भी शामिल किया गया था। अगर कानूनन गलत था तो गृह मंत्रालय ने कोई आपत्ति नहीं जताई और राष्ट्रपति से भी मंजूरी मिली। सरकार को महीनों पता ही नहीं चला कि यह कानून प्रदेश में लागू है।

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उनका कहना है कि 3 सितम्बर को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 24 सितम्बर को नोटिफिकेशन भी हो गया था। ऐसे में सरकार को 180 दिन इसे लागू करने के मिले थे। जिसमें सौ दिन यूं ही निकल गए हैं।

जबकि इस दौरान फास्ट ट्रैक कोर्ट आदि का गठन होना था। उनका कहना है सरकार ने पहले भी इसे हल्के में लिया और अब भी असंवैधानिक तरीके से बदलाव कर रही है। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पहले लागू काननू को निरस्त करना होगा और फिर नया लागू होगा।

जोड़-तोड़ जनहित में नहीं: खंडूरी

प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन और सत्ता में बदलाव की खबरों पर पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का कहना है कि मैं बिल्कुल इन चीजों से दूर हूं। जोड़ तोड़ कर सरकार बनाना जनहित में नहीं है।

मैं इन चक्करों में पड़ता भी नहीं। मुझे नहीं मालूम पार्टी स्तर पर या अकेले कोई ऐसे प्रयास कर रहा है। उनका कहना है कि कोई तथ्य होते तो मैं बताता।

राजीव गांधी जैसा नेता हटा दिया

मोदी की रैली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के पीठ थपथपाने और जनता के बीच वाहवाही पर खंडूरी का कहना है कि लोग निराश हैं। एक तरफ राजीव गांधी जैसा नेता जो भारी बहुमत से जीतकर आया तो लोगों ने पांच साल में ही 64 करोड़ के बोफोर्स घोटाले के आरोप में हटा दिया।

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जबकि केंद्र की सरकार ने दस सालों में 10 हजार करोड़ के घोटाले किए हैं। देश के लोग प्रधानमंत्री की खिल्ली उड़ाते हैं कि मुखिया कुछ नहीं कर सकता।

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