'बेकाबू घोड़ा' है नौकरशाही, लगाम कसने की जरूरत
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इशारों में राज्य की नौकरशाही को बेकाबू घोड़ा बता सहयोगी मंत्री हरक सिंह रावत को हिम्मत से काम लेने और लगाम कसकर पड़ने का सबक दिया है। वहीं अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने मंत्री हरक सिंह को अति उत्साही ठहरा सचिव आरके. सुधांशु को मेहनत और सामंजस्य बैठाने की सीख दी है।
राजनेताओं और नौकरशाही के बीच संबंधों को लेकर लगातार मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला हरक सिंह रावत ओर उनके सचिव आरके. सुधांशु के बीच दो नए मेडिकल कॉलेजों को लेकर आया है।
हरक सिंह ने अधिकारी के न सुनने पर पद छोड़ने तक बात कही है। सीएम ने शुक्रवार को हरक सिंह रावत से इस संबंध में बात भी की। देर शाम सचिवालय में सीएम की समीक्षा बैठक में भी हरक सिंह शामिल हुए।
नौकरशाही बेकाबू
हरक सिंह के तीखे बयानों पर मुख्यमंत्री ने इशारों में जो टिप्पणी की उसके मायने साफ हैं। सीएम ने हरक को अनाड़ी घुड़सवार कतई नहीं कहा बल्कि लगाम को कसकर पकड़ने की नसीहत दी है। जबकि सीएम भी नौकरशाही को बेकाबू मानते हैं।
दूसरी ओर अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा कहीं ने कहीं अपने अधिकारी के पक्ष में खड़े दिखाई दिए। उन्होंने योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने की बात कही। उन्होंने कहा कि नए मेडिकल कालेजों की योजना 2016 में पूरी होनी है। 30-40 फीसदी काम हो चुका है।
दिसंबर 2015 तक दोनों मेडिकल कॉलेजों का लगभग काम पूरा हो जाएगा। 2016 में भारतीय चिकित्सा परिषद की टीम को बुलाकर परीक्षण करा लेंगे। सचिव के लिए उन्होंने कहा कि अधिक मेहनत करें और सामंजस्य बैठाएं।
सवार को हिम्मत नहीं छोड़ने चाहिए। घोड़ा बेकाबू भी है तो लगाम ठीक से कसकर पकड़नी चाहिए।
-हरीश रावत, मुख्यमंत्री
मंत्री उत्साही है और उनकी परिकल्पना इस योजना को इसी साल पूरी करने की थी। मैं उनसे सहमत हूं कि काम जल्दी होना चाहिए। लेकिन जमीनी हकीकत भी देखनी जरूरी है।
-राकेश शर्मा, अपर मुख्य सचिव