फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   cm harish rawat special sunday interview with amarujala.

‘बहुगुणा को कौआ खाना था, तीतर बताकर खा रहे हैं...' सीएम रावत से खास बात

Sun, 21 Aug 2016 06:19 PM IST
संडे इंटरव्यू में सीएम हरीश रावत
संडे इंटरव्यू में सीएम हरीश रावत Updated Sun, 21 Aug 2016 06:19 PM IST
विज्ञापन
cm harish rawat special sunday interview with amarujala.
सीएम हरीश रावत - फोटो : AmarUjala

उत्तराखंड की सियासत फिलहाल मुख्यमंत्री हरीश रावत पर केंद्रित हो गई है। सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष के नेताओं के हर निशाने पर बस एक ही शख्स का चेहरा सामने आता है, वे हैं हरीश रावत।  हाल  यह है कि अमर उजाला के संडे इंटरव्यू श्रृंखला की हर कड़ी की हेडिंग हरीश रावत पर लगे आरोपों पर ही बनी। दरअसल, इंटरव्यू  के जिस भी किरदार का मुंह खुला उसने रावत के खिलाफ कुछ ऐसा कहा जो प्रदेश में टाकिंग प्वाइंट बन गया।

विज्ञापन


कांग्रेसी विधायकों की बगावत रही हो, विनियोग बिल का मुद्दा रहा हो या फिर फ्लोर टेस्ट की अग्निपरीक्षा हर बार किस्मत ने उनका ही साथ दिया। हालिया घटनाक्रमों में तो वे महाबली होकर उभरे। इसका असर अब उनकी बॉडी लैंग्वेज में भी नजर आने लगा है। तमाम आरोपों के जवाब में पहले वे बचाव की मुद्रा में नजर आते थे, मगर अब नियम-कायदे तोड़कर फैसले करने के सवाल पर उसे असाधारण फैसला करार देने में भी नहीं हिचकिचाते। यह कॉन्फीडेंस है या सफलता का दंभ, फिलहाल समझना थोड़ा कठिन है।
विज्ञापन


अमर उजाला के स्टेट ब्यूरो चीफ संजय त्रिपाठी ने पहले हुए संडे इंटरव्यूज में भाजपा-कांग्रेसी नेताओं द्वारा सीएम पर लगाए गए आरोपों के हवाले से और उत्तराखंड की सियासत के लिहाज से मौजूं कई तीखे सवाल मुख्यमंत्री हरीश रावत से किए। वे सवालों पर जिस तरह से पेश आए, उनकी भाषा और भाव दोनों ही में आक्रामकता नजर आई। वे अपने खिलाफ मुंह खोलने वालों पर तीखे प्रहार करने से नहीं चूके। खैर, आप पूरा इंटरव्यू पढ़िए और नए सिरे से सीएम हरीश रावत को समझने की कोशिश कीजिए...

विज्ञापन
विज्ञापन

'एक पूर्व सीएम का बेटा और खुद पूर्व सीएम मैदान छोड़कर भाग गए'

cm harish rawat special sunday interview with amarujala.
हरीश रावत ने हर सवाल का सामना किया - फोटो : AmarUjala

बहुगुणाजी का आप पर आरोप है कि जब तक वे मुख्यमंत्री रहे आपने उन्हें चैन से सांस नहीं लेने दिया। ... गैरसैंण को राजधानी बनाने के लिए जब वहां विधानसभा के भवन का शिलान्यास हुआ था तो आप वहां नहीं पहुंचे थे। आपने सोनिया गांधी को भी वहां जाने से मना कर दिया। मुख्यमंत्री बनने के बाद मनमानी पर मनमानी किए जा रहे थे ।. ..बागी विधायकों को मनाने के लिए 19 मार्च को सुबोध उनियाल को मंत्री बनाने तक का प्रस्ताव दिया ?

 दरअसल बहुगुणा की आदत है, कौआ खाना था, तीतर बताकर खा रहे हैं। हरीश रावत से छुटकारा पाना था तो आवश्यक था कि आप भाजपा के साथ जाएं ? सुबोध उनियाल को मंत्री बनाने का सवाल है, तो उन्हें आठ महीने पहले ही मंत्री बनाना था। पार्टी ने अनुमति भी दे दी थी, मगर बहुगुणा हमेशा दो मंत्री बनाने का अड़ंगा डाल देते थे। पार्टी की अनुमति से 17 तारीख को शपथ करवाने का प्रस्ताव रखा था। इसमें कुछ भी गलत या असंगत नहीं था। मैं बहुगुणा को धन्यवाद देता हूं कि एक पूर्व सीएम का बेटा और खुद पूर्व सीएम पार्टी के अंदर समाधान पाने के बजाए मैदान छोड़कर भाग गए। दल-बदल कानून विधायकों और सांसदों से अपेक्षा करता है कि वे अपनी समस्याओं का समाधान पार्टी के अंदर ही ढूंढें। 

हम भी लोगों से असंतुष्ट रहे, मगर समाधान हमेशा पार्टी फोरम पर ही ढूंढा। पार्टी में प्रभारी होते हैं, कोऑर्डिनेशन कमेटी और एआईसीसी होती है। बहुगुणा कोऑर्डिनेशन कमेटी में मेरी प्रशंसा करते हैं और पंद्रह दिन बाद दलबदल हो जाता है। दलबदल के कारणों को उनसे बेहतर और कोई नहीं जान सकता है। बहुगुणा पिक एंड चूज मैथर्ड पर काम कर रहे थे। गैरसैंण में शिलान्यास कोई रोडमैप के तहत नहीं कराया गया था। आपदा से उठे सवालों से ध्यान भटकाने के लिए गैरसैंण का शिलान्यास हुआ।

मुझे कभी वहां बुलाया ही नहीं गया। सोनिया गांधी को वहां बुलाया गया, यह पहली बार सुन रहा हूं। मगर हम उनके शिलान्यास को यथार्थ में बदल रहे हैं। यह एक सत्यता है। हमारे विधायकों ने कभी काली पट्टी बांधी यह भी मेरी जानकारी में पहली बार आ रहा है। कोऑर्डिनेशन कमेटी ही बहुगुणा के कहने पर बनाई गई थी। सोनिया गांधी से मिलकर कमेटी गठित किए जाने की मांग उन्होंने की थी। बहुगुणा उसमें मेंबर भी थे।

मै विजिबल सीएम हूं, सीएम को फ्रंट फुट से लीड करना चाहिए

cm harish rawat special sunday interview with amarujala.
सीएम हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
इंदिरा हृदयेश खुलकर कहती हैं कि वे एनडी तिवारी की उत्तराधिकारी हैं। साथ ही सीएम बनने की उनमें प्रबल इच्छा भी है। क्या आप उनको अपने लिए राजनैतिक खतरा मानते हैं ?
- इंदिरा हमारी वरिष्ठ नेता हैं। योग्यता की उनमें कमी नहीं है। सरकार की मार्गदर्शक हैं। मुख्यमंत्री पद पर कौन बैठेगा यह पार्टी और पार्टी नेतृत्व तय करता है। हम सभी को उसका अनुपालन करना होता है। इंदिरा जी एनडी तिवारी और बहुगुणा सरकार में महत्वपूर्ण स्तंभ रही हैं। साथ ही हमारी भी मार्गदर्शक हैं। वे आगे भी हमारा मार्गदर्शन करती रहेंगी।

आप पर हमेशा वन मैन शो का आरोप लगता रहा है?
 - मुझसे ज्यादा मंत्रिमंडल की बैठकें किसी मुख्यमंत्री ने नहीं की हैं। मंत्रिमंडलीय उपसमितियां भी किसी ने नहीं बनाई हैं। सबसे कम विभाग मैं अपने पास रखता हूं। फिर भी वन मैन शो वाली बात कहां से आती है। शायद इसलिए कि मैं अन्य की तुलना में ज्यादा उपलब्ध और विजिबल सीएम हूं। मैं ऐसा बना रहना चाहूंगा। मेरा मानना है कि उत्तराखंड जैसे राज्य में सीएम को फ्रंट से लीड करना चाहिए।

आपके मंत्रियों और अधिकारियों पर आपका नियंत्रण नहीं है। जिसका जैसा मन करता है वैसा काम करता है। आपकी भी नहीं सुनी जाती है?
- ये टीम सीएम है। मैं सनसनी फैलाने वाला सीएम नहीं हूं। यही कारण है कि दो साल में सरकार में योजनागत बजट में लगभग 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आठ सौ करोड़ खर्च करने वाली पीडब्ल्यूडी 2800 करोड़ करने वाली संस्था बन गई है। 14 घंटे बिजली देने वाली संस्था यूपीसीएल लगभग 23 घंटे बिजली आपूर्ति कर रही है। इसमें मेरा कुछ हुनर तो काम किया होगा। काम लेने और करने का मेरा अपना तरीका है। एक बात सत्य है जिसका गहरा दुख भी है कि मैं हरक सिंह जैसे मंत्री की मनमानियों पर मजबूरन आंख बंद किए रहा और जब टोका तो उन्होंने पार्टी छोड़ दी।
 

तो क्या घोषणा मुख्यमंत्री हैं हरीश रावत?

cm harish rawat special sunday interview with amarujala.
हरीश रावत - फोटो : Getty

आप केवल घोषणाएं करते रहते हैं। अब तक ढाई हजार से ज्यादा घोषणाएं कर चुके हैं। इन पर अमल कब होगा?

- दो बातें बिल्कुल सत्य हैं। इस राज्य में जितने सीएम हुए हैं, उन्होंने मिलकर जितनी घोषणाएं की हैं उतनी दो साल में अकेले मैंने की हैं। यह भी सत्य है कि मेरी घोषणाओं में 60 फीसदी से ज्यादा क्रियान्वित हो चुकी हैं या फिर उन पर काम चल रहा है। मेरी घोषणाओं का 30 फीसदी हिस्सा फ्यूचरिस्टिक हैं। संधिकाल का सीएम होने के कारण मेरा यह दायित्व  है कि मैं भविष्य को लक्ष्यगत करके कुछ योजनाएं बनाऊं और उनकी घोषणाएं करूं। फिर भी मैं अपने सभी दोस्तों से कहना चाहूंगा कि मेरे द्वारा की गई घोषणाओं की स्थिति 70 फीसदी से अधिक होगी और मैं डिस्टिंगशन से पास होऊंगा। यह तब है जब पांच महीने तक सरकार की सियासी बिजली गुल कर दी गई थी। 

आम लोगों की समस्याओं के निस्तारण की प्रक्रिया बेहद सुस्त है। आम आदमी की सुनवाई नहीं हो रही है?

- एक बात बहुत दावे के साथ कहूंगा कि मैं सबसे ज्यादा उपलब्ध और सर्वाधिक निर्देश पारित करने वाला सीएम हूं। समाचार पत्रों में भी जो आलोचनात्मक खबरें प्रकाशित होती हैं, उनकी कटिंग भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश के साथ आगे भेजता हूं। समाधान का भी एक पोर्टल है, जिस पर संवाद करता रहता हूं। सोशल मीडिया पर सक्रिय होने के साथ ही राह चलते लोगों से बात करके उनकी समस्याएं सुनता हूं। मुझे एक चीज के लिए दोष दिया जाना चाहिए कि मैंने लोगों की अपेक्षाएं बढ़ा दी हैं। मेरा मानना है कि दस कामों को हाथ में लेकर दसों पूरा कर देना सफल विकास के कार्यकर्ता की निशानी नहीं है। विकास के कार्यकर्ता को तो हजार काम हाथ में लेने चाहिए और उनमें से पांच सौ का भी समाधान ढूंढ लिया तो यह बेहतर स्थिति है। मैं पांच सौ का समाधान करने वाला मुख्‍यमंत्री बनना चाहता हूं।

हरीश रावत ने वापसी मौका खो दिया, ये कितना सही है?

cm harish rawat special sunday interview with amarujala.
साक्षात्कार के दौरान सीएम हरीश रावत - फोटो : AmarUjala

राजनीतिक हलकों में अक्सर यह चर्चा रहती है कि सरकार गिरने और फिर बनने के बाद आपको नया चुनाव करवाकर वापसी का बेहतरीन मौका मिला था। आपने अपना क्लाइमेक्स खो दिया?
राजनीति का तकाजा था कि मैं सियासी संकट के दौरान बहुमत सिद्ध करने के बाद विधानसभा को भंग करने की सिफारिश करता। मगर बड़ी मानसिक जद्दोजहद के बाद मैंने उत्तराखंड के हित में यह फैसला किया कि चुनाव में जाने के बजाए बजट फिर से पास करवाऊंगा, जिससे विकास की गति आगे बढ़ सके।

यदि मैं बिना बजट पास कराए चुनाव में चला जाता तो न केवल वर्ष 2016 विकास शून्य हो जाता बल्कि 2017 में विकास की स्थिति बिगड़ जाती। अब उत्तराखंड को तय करना है कि वो मेरे फैसले पर मुहर लगाते हैं या राजनीतिक उद्देश्य के लिए उपयोगी निर्णय न लेने के लिए दंडित करते हैं।

सरकार और संगठन में अक्सर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं जब दोनों में मतभेद साफ नजर आते हैं?
- जब जीवंत संगठन होता है तो वह सरकार का एजेंडा तय करना चाहता है। उत्तराखंड में कांग्रेस के साथ कुछ यही स्थिति है। इसे मतभेद मानना मेरी भूल होगी। एक सक्रिय, सचेष्ठ संगठन चुनावी वैतरणी पार कराने की गारंटी होता है। मैं एक कांग्रेस मैन के तौर पर संगठन का स्वागत करता हूं।

राजनीतिक संकट के पीछे आपके इर्द-गिर्द चलने वाले सिपहसालारों की टीम एक हद तक जिम्मेदार मानी जाती है?
- मैं सन 1967 से राजनीति में हूं और सन 1969 से कांग्रेस में हूं। जो व्यक्ति मिट्टी में रहा हो उससे तो मिट्टी लिपटेगी ही। मेरे इर्द-गिर्द भी कुछ लोग जरूर होंगे। नाम भले ही किसी को कुछ भी दिया हो, मगर मेरे साथियों को भी यह शिकायत होती है कि मैं उनसे सलाह नहीं लेता हूं। मेरी मुसीबत यह है कि पहले ही इतने लोग मुझे सलाह दे देते हैं कि मेरे साथी सलाहकार सुबह होने तक मेरे कारिंदों में तब्दील हो जाते हैं।

'कोश्यारी एक उदाहरण बता दें मैं अपराध स्वीकार कर लूंगा'

cm harish rawat special sunday interview with amarujala.
कोश्यारी ने इंटरव्यू के दौरान रावत को जमीन बेचने वाला नेता कहा था। - फोटो : Self

कोश्यारी जी कहते हैं कि मैं हरीश रावत जैसा जमीन से जुड़ा नेता नहीं हूं। वो जितनी जमीनें बेच रहे हैं..कुछ कहेंगे ? 
हां, मैने आपके अखबार में पढ़ा था। मैंने या मेरे परिवार ने कहीं भी सरकारी या गैरसरकारी एक इंच जमीन भी खरीदी या कब्जाई हो तो कोश्यारी एक उदाहरण बता दें। मैं सार्वजनिक रूप से अपराध स्वीकार कर लूंगा। जहां तक कोश्यारी की बात है उनके बारे में पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर में पूछा जाए, क्या वे भी ऐसा दावा कर सकते हैं। भाजपा के लगभग आधा दर्जन नेता ऐसे हैं, जिन्होंने ग्राम समाज की मूल्यवान जमीनें एक-एक रुपए में आवंटित कराई हैं। 

रहा सवाल कंपनियों को भूमि देने का तो बेहद पिछड़े क्षेत्र में केवल एक इंटरनेशनल स्कूल के लिए नियमानुसार आवंटित की गई है। आगे भी घोषित नीति के तहत उद्योगों, स्कूलों और अस्पतालों के लिए भूमि आवंटित की जाएंगी। रोड़ी-बजरी का एक भी ऐसा क्रशर स्वीकृत नहीं किया है, जिन्होंने किए है वे सब अब भाजपा में हैं।

पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। आप खुद भी इसे स्वीकार चुके हैं। फिर इसे दुरुस्त क्यों नहीं करते हैं?
- हां, यह बात सत्य है कि स्वास्थ्य विभाग ही ऐसा विभाग है जिसमें मेरे इनीशिएटिव अपेक्षित सहयोग न मिलने से परिणाम नहीं दे पाए। इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं। 
 एक तो डॉक्टरों का सहयोग न मिलना और दूसरा निर्णयों को लागू करने में विभाग की सुस्ती।  कुछ सीमा तक मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का दायरा बढ़ाकर अपनी कमियों की प्रतिपूर्ति की है। इस योजना के लागू होने के बाद डॉक्टर भले ही निकट में न मिल पा रहे हों, मगर उचित डॉक्टर तक पहुंचने में गरीब की क्षमता बढ़ जाएगी। अब वह इलाज खरीद सकेगा। डॉक्टरों की समस्या का हल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं हो पा रहा है। उत्तराखंड में हमने डीएसीपी लागू की है, जो डॉक्टरों के लिए क्रांतिकारी निर्णय है। मगर अनुकूल परिणाम नहीं दिखाई दिए।

हरक पहले अपनी जगह ढूढ़ लें फिर मुझे मेरी दिखाएं

cm harish rawat special sunday interview with amarujala.
हरक सिंह रावत ने सीएम पर गंभीर आरोप लगाए थे। - फोटो : AmarUjala

 हरक सिंह रावत कहते हैं कि गोविंद कुंजवाल की दया और दस दिनों के कारण आपकी सरकार बची। चुनाव आने दीजिए, रावत को उनकी असली जगह दिखा दूंगा। क्या कहेंगे अपने पुराने साथी के इस बयान पर ?
अभी तो हरक अपनी ही जगह ढूंढ रहे हैं, जब ढूंढ लें तो मुझे जगह दिखाएं। भाजपा नेताओं ने और न्यायाधीश रहे नवोदित भाजपाई नेता ने भी भारत का संविधान नहीं पढ़ा। संविधान स्पष्ट कहता है कि विनियोग विधेयक में कोई संशोधन नहीं लाया जा सकता है। इसके अलावा इसकी प्रक्रिया भी नहीं बदली जा सकती है। 

विधेयक ध्वनि मत से पास हुआ। हरक सिंह और बहुगुणा विनियोग विधेयक के विरोध में वोट दे रहे हैं या दल बदल रहे हैं इसकी कोई सूचना उन्होंने स्पीकर को दी यह मेरी जानकारी में नहीं है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट एक से अधिक मामलों में यह कह चुका है कि विधानसभा की कार्यवाही संचालन केवल स्पीकर का कार्यक्षेत्र है। हमारे इन दोस्तों के लिए संविधान और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय नहीं बदले जा सकते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि अपने स्वार्थ साधन न होने के कारण भाजपा को नवोदित भाजपाइयों ने सभी संवैधानिक संस्थाओं पर कीचड़ उछालने की ठान ली है।

स्पीकर पर भी कीचड़ उछाला और गवर्नर को भी बदलने की मांग कर चुके हैं। अब देश के राष्ट्रपति ही बचे हैं, जिन्हें हटाने की मांग इन लोगों द्वारा की जानी है। मंत्रिमंडलीय व्यवस्था, कुछ घोषित और अघोषित नियमों से संचालित होती है। राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं के कारण इन मर्यादाओं को नहीं तोड़ सकते हैं। मुझे तो बधाई दी जानी चाहिए कि मैंने हरक सिंह जैसे पराक्रमी योद्धा को कैसे दो साल तक मंत्रिमंडल में रख लिया। यूपी से लेकर यहां तक मौजूद अन्य लोग तो ऐसा कर नहीं पाए। अब मैं भाजपा को मुबारकबाद देता हूं कि ये पराक्रमी दोबारा उनके घर आ गए हैं।

आपके स्तर से लगातार ऐसे फैसले किए जा रहे हैं जो नियमविरुद्ध बताए जाते हैं।  इसके पीछे क्या वजह है?
- लीक-लीक कायर चलै, लीकहि चले कपूत, लीक छोड़ तीनहिं चलै शायर, सिंह. सपूत...मान लीजिए कि मैंने असाधारण फैसले लिए हैं। मैंने जहां भी वर्तमान नियमों को संशोधित किया है वह या तो मंत्रिमंडल के फैसले से या फिर मेरे लिखित आदेश से हुए हैं। यह मैंने राज्यहित में खुद की जिम्मेदारी लेते हुए किए हैं। आपने हाल में लगातार ऐसे मुद्दों को प्रकाशित किया है, मैंने उन्हें देखा और पढ़ा है। वे पूरी तरह तर्कसंगत और तथ्यों के साथ प्रस्तुत किए गए हैं। मगर आप देखेंगे कि देश भर में कई ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, जो असाधारण होते हैं।  

 

हरक पर क्या बोले सीएम, देखें वीडियो

पाठक के सवाल पर सीएम साहब का एक्शन! देखें पूरा इंटरव्यू...

cm harish rawat special sunday interview with amarujala.
हरीश रावत - फोटो : अमरउजाला

संडे इंटरव्यू के तहत अमर उजाला के पाठकों से भी मुख्यमंत्री से सवाल पूछने को कहा गया था। सवालों का ऐसा रेला आया कि संभालना ही मुश्किल हो गया। इतनी बड़ी संख्या में सवालों का जवाब पाना भी आसान नहीं है। टुकड़ों में हमें जवाब मिल रहे हैं। लिहाजा तय किया गया है कि ‘पाठकों के सवाल-सीएम के जवाब’ कॉलम के तहत इसे श्रृंखलाबद्ध प्रकाशित करेंगे। पहली कड़ी सोमवार के अंक में प्रकाशित होगी। सभी पाठकों के सवाल खत्म होने तक यह क्रम जारी रहेगा। कई पाठकों ने एक ही विषय पर सवाल पूछे हैं, लिहाजा उनके जवाब अलग-अलग नहीं दिए जाएंगे। व्यक्तिगत सवालों के संबंध में सीएम कार्यालय द्वारा सीधे अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है। वे सवाल इस श्रृंखला में शामिल नहीं होंगे। 

हमें बताने में खुशी हो रही है कि जसपुर, ऊधमसिंह नगर से हमारे पाठक रहमान जी ने सवाल किया था कि ...जसपुर में आज तक रोडवेज डिपो तक नहीं बना। हमने उनका यह सवाल सीएम के सामने मंगलवार को रखा था। इस सवाल को संज्ञान में लेते हुए सीएम ने परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक में शुक्रवार को जसपुर में बस डिपो बनाने के लिए स्वीकृत दे दी है। डिपो बनाने के लिए जिलाधिकारी को प्रस्ताव बनाकर भेजने को कहा है। 

देखें पूरा इंटरव्यू...

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed