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अफसरों को नहीं मुख्यमंत्री के निर्देशों की परवाह
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 16 Jan 2015 04:23 PM IST
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जनसमस्याओं के समाधान को लेकर अफसर कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि निस्तारित समस्याओं की समीक्षा बैठक में ज्यादातर विभाग गायब रहे।
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मुख्यमंत्री के निर्देशों की कोई परवाह नहीं
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के निर्देशों की भी इनको कोई परवाह नहीं है। जिन विभागों के अफसर आए थे, उनमें से कई ऐसे थे जो सभी मामलों की समीक्षा रिपोर्ट नहीं दे सके। अपने बचाव में उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ताओं के फोन ही नहीं मिले।
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जनसमस्या के झूठे समाधान का मामला मुख्यमंत्री हरीश रावत के पकड़ने के बाद बृहस्पतिवार को निस्तारित समस्याओं की समीक्षा की दूसरी बैठक थी। पहली बैठक में सिर्फ पेयजल विभाग ने समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, दूसरी बैठक में 20 विभाग ही आए। 50 विभागों ने इस बैठक में शिरकत ही नहीं की।
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बैठक की अध्यक्षता डीएम चंद्रेश कुमार यादव ने की। इस मौके पर एडीएम वित्त प्रताप सिंह शाह ने कहा कि जो विभाग नहीं आए, वे अगले हफ्ते निस्तारित समस्याओं की समीक्षा रिपोर्ट उपलब्ध करा दें। जो विभाग रिपोर्ट नहीं देंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
कुल विभाग- 70
कुल जन शिकायतें- 1638
गिनाई तो पर नहीं दी रिपोर्ट
- नगर निगम ने 232 निस्तारित समस्याएं बताईं
डेढ़ सौ शिकायतों की समीक्षा रिपोर्ट नहीं दी
- तहसील सदर ने 139 निस्तारित समस्याएं बताईं
65 की रिपोर्ट नहीं दी
- जलसंस्थान पित्थूवाला ने 51 निस्तारित समस्याएं बताईं
7 शिकायतों की समीक्षा रिपोर्ट नहीं दी
- जिला समाज कल्याण ने 37 निस्तारित समस्याएं बताईं
7 समस्याओं की रिपोर्ट नहीं दी
- एमडीडीए ने 17 निस्तारित समस्याएं बताईं
पांच शिकायतों की रिपोर्ट नहीं दी
- एडीबी सीवरेज ने 8 निस्तारित समस्याएं बताईं
तीन शिकायतों की रिपोर्ट नहीं दी
- सिंचाई विभाग ने 30 निस्तारित समस्याएं बताईं
दो शिकायतों की रिपोर्ट नहीं दी
न आने वाले प्रमुख विभाग
शिक्षा विभाग, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, अग्निशमन, पेयजल, पुलिस, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, राष्ट्रीय राजमार्ग, चिकित्सा, जिला सेवा योजना, भूतत्व एवं खनन, स्वजल आदि।
हरक की हनक भी नहीं चलती नौकरशाही पर
नौकरशाह कांग्रेस के हनकदार मंत्री हरक सिंह रावत की भी नहीं सुनते। लिहाजा नौकरशाही के खिलाफ हरक सिंह भी मुखर हो गए हैं। उन्होंने अपने विभाग के सचिव सहित कुछ अन्य की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किये हैं। हरक की नाराजगी राज्य के दो नए मेडिकल कॉलेजों को लेकर है जिनका निर्माण कार्य मानकों में संशोधन से खटाई में पड़ गया है।
हरक इसे अफसरशाही की मनमानी का नतीजा करार दे रहे हैं। हरक ने अपनी नाराजगी से मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी अवगत करवाया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने अफसरशाही की अनदेखी पर पद छोड़ने तक की चेतावनी दे डाली है।
हाल ही कांग्रेस की विचार मंथन बैठक में गृह मंत्री प्रीतम सिंह ने भी अधिकारियों के निरंकुश होने बात कही थी। मंत्री यशपाल आर्य भी लंबे समय तक आलाधिकारियों के न सुनने की बात कहते आए हैं।
चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री ने पिछले तीन महीने से देहरादून और अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के लिए शासन के विभिन्न अफसरों से बैठकें कर रहे हैं। मामले में अपर मुख्य सचिव वित्त राकेश शर्मा, वित्त सचिव भास्करानंद और विभागीय सचिव आरके सुंधाशु सहित विभागीय निदेशक से कई बार वार्ता हो चुकी है।
हरक के अनुसार जनवरी में एमसीआई की टीम दून आने की संभावना थी, जिसके चलते उन्होंने मानकों के अनुरूप सारी तैयारी करने के लिए कई बार निर्देश दिए थे।
जब एमसीआई की टीम आई तो बताया गया कि मेडिकल कॉलेज बनाने के मानक ही बदल गए हैं, जिसपर विभागीय मंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई कि विभागीय अफसरों को एमसीआई के मानकों में बदलाव की जानकारी तक नहीं थी।
वह इस बारे में मुख्यमंत्री से अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं कि अफसरशाही का रवैया नहीं बदला तो दोनों मेडिकल कालेज अगले सत्र तो दूर वर्ष 2016 में भी शुरू नहीं हो पाएंगे।
यहां तो कैबिनेट के फैसले बदल जाते हैं
हरक सिंह का यह भी आरोप है कि राज्य में सचिव स्तर पर कैबिनेट के फैसले बदल जाते हैं। हरिद्वार में नर्सिंग कॉलेज खोलने का प्रस्ताव खारिज हो गया लेकिन अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
केंद्र पांच नर्सिंग कॉलेज के लिए 100 करोड़ रुपए मंजूर किए। 36 करोड़ की लागत से एक कॉलेज का भवन भी तैयार हो गया, लेकिन वहां कक्षाएं शुरू करने के लिए केंद्र में आवेदन तक नहीं किया गया।