फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   cloudburst and Heavy damage in uttarakhand one killed

उत्तराखंड में तीन जगह बादल फटने से भारी नुकसान, 40 वाहन बहे, एक की मौत, दो घायल

Sat, 07 Sep 2019 08:09 PM IST
Avdhesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चमोली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चमोली Published by: Avdhesh Kumar Updated Sat, 07 Sep 2019 08:09 PM IST
विज्ञापन
cloudburst and Heavy damage in uttarakhand one killed
चमोली में बादल फटा - फोटो : a

पिथौरागढ़ जिले के नाचनी में शुक्रवार रात हुई भारी बारिश ने तबाही मचाई है। टिम्टिया गांव में एक मकान में मलबा घुसने से बुजुर्ग राम सिंह की मौत हो गई और उनकी पत्नी धनी देवी घायल हो गई। गांव के दो और लोग भी घायल हुए हैं। नाचनी में बोल्डर गिरने से एक मकान ध्वस्त हो गया है तो तीन मकान रामगंगा नदी में समा गए हैं। तल्ला भैंसकोट में एक मकान ध्वस्त हो गया है। भूस्खलन से 7 मकान खतरे की जद में आ गए हैं। बाथी और कोट्यूड़ा में भी एक-एक मकान ध्वस्त हो गया है। हुपुली में एक मैक्स जीप और दो मोटरसाइकिलें मलबे की चपेट में आने से हुपुली नाले में समा गई हैं।

विज्ञापन


विज्ञापन


टिम्टिया से लेकर बांसबगड़ के बरा तक के 20 किमी दायरे में जबरदस्त तबाही मची है। थल-मुनस्यारी सड़क 60 मीटर हिस्से में ध्वस्त हो गई है। तमाम आंतरिक सड़कें मलबा आने से बंद हो गईं हैं। तल्ला भैंसकोट के बमनगांव खालसा में भूस्खलन से भगत सिंह का मकान ध्वस्त होने से 5 गायें मलबे में दब गईं। खतरे की जद में आए सात परिवारों ने घर छोड़ दिए हैं। बाथी गांव में दो मकान ध्वस्त हो गए और चार मवेशी मलबे में दब गए। उधर, बागेश्वर की कांडा तहसील में ग्राम नागकन्याल, बटालगां, कलढूंगा में तीन मकान टूट गए हैं। कपकोट के सौंग गांव में भूस्खलन से गोशाला क्षतिग्रस्त हो गई। इसके मलबे में दबने से दो बैलों की मौत हो गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

30 मीटर तक बदरीनाथ हाईवे बहा, 40 वाहन मलबे में दफन

हेमकुंड साहिब के प्रवेश द्वार गोविंदघाट में शनिवार सुबह पांच बजे बरसाती नाले में बादल फटने से भारी तबाही मची। यहां लगभग 30 मीटर तक बदरीनाथ हाईवे बह गया है, जबकि 40 वाहन मलबे में दफन हो गए हैं। साथ ही दुकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इस दौरान डेक्कन कंपनी का हेलीपेड और हेलीकॉप्टर बरसाती नाले की चपेट में आने से बाल-बाल बच गया।  घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी व जिले के अन्य आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर आपदा से हुए नुकसान का जायजा लिया। गनीमत यह रही कि इस दौरान कोई जनहानि नहीं हुई है। 

कैलाश यात्रा मार्ग पर मालपा गधेरे पर बना लकड़ी का पुल बहा
बारिश से कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर स्थित मालपा गधेरे का पुल बह गया है। पुल के बहने से 17वें दल के कैलाश यात्रियों को आईटीबीपी और एसडीआरएफ जवानों ने रस्सियों की मदद से पार कराया। पुल नहीं होने से सेना, आईटीबीपी और एसएसबी के जवानों को आवागमन में परेशानी हो रही है। 

कैलाश मानसरोवर के 17वें दल के यात्रियों के साथ गए पोर्टर रोशन सेलाल ने बताया कि 17वें दल के कैलाश यात्री बूंदी से मालपा सुबह लगभग 11 बजे पहुंचे थे। पुल नहीं होने से एसडीआरएफ और आईटीबीपी के जवानों ने कैलाश यात्रियों को रस्सियों की मदद से गधेरा पार कराया। लोक निर्माण विभाग के एई जीसी भट्ट ने बताया कि मौके पर जेई अंकित सिंह को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि पुल का सामान वहां पर रखा गया है। दो दिन में पुल तैयार कर लिया जाएगा।

थराली और देवाल में भारी से तबाही

थराली क्षेत्र के गुड़म गांव के जंगल में शनिवार तड़के बादल फटने गुड़म, थाला, लोल्टी गांवों में भारी तबाही हुई है। गुड़म स्टेट में दो मकान और दो गोशालाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गये हैं। हादसे में दो महिलाओं को हल्की चोटें आई हैं। गोशाला दबने से 10 पालतू पशु घायल हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही तहसील प्रशासन और पुलिस की टीम ने मौके पर जाकर लोगों को राहत पहुंचाई। 

शुक्रवार रात से पिंडरघाटी में भारी बारिश के दौरान अनहोनी के चलते ग्रामीण पहले ही अपने घरों से बाहर निकल गये थे। गुड़म गांव के प्रभावित बिरेन्द्र सिंह ने बताया कि शुक्रवार रात भर तेज बारिश के बाद शनिवार तड़के करीब तीन बजे बादलों की जोर की आवाज आई। इसी दौरान कुछ देर बाद गुड़म गांव के ऊपरी भाग के जंगल में तेज गर्जना के साथ बादल फटा और भंयकर उफान के साथ गदेरे से गांव में मलबा आ गया। अंधेरे में मलबा आते ही पहले से अपने घरों से बाहर रह रहे ग्रामीण जान बचाने के लिए भागने लगे। तभी देबुली देवी और लीला देवी मलबे चपेट में आ गये। आनन-फानन में किसी तरह दोनों महिलाओं को उनके परिजनों ने खींचकर मलबे से बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान पर ले गये। गांव में दो गोशाला और उनमें बंधे पालतू पशु मलबे में दब गए। किसी तरह मलबा हटाकर ग्रामीणों द्वारा अपने पशुओं को जिंदा बाहर निकाला गया।

राहत और बचाव कार्य जारी

ग्रामीणों की सूचना पर तहसीलदार सोहन सिंह रांगड़, पटवारी विनोद कुमार, सहित थानाध्यक्ष सुभाष जखमोला पुलिस, एसडीआरएफ टीम के साथ गुड़म गांव पहुंचे और बचाव एवं राहत कार्य शुरू किया। थानाध्यक्ष ने बताया कि ग्रामीणों के सहयोग से 10 पशुओं को मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन उन सभी पशुओं पर गंभीर चोट आई हैं। साथ ही एक दर्जन से अधिक घरों में मलबा घुसने से ग्रामीणों का लाखों रुपये का नुकसान बताया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कई नाली कृषि भूमि बाढ़ की भेंट चढ गई है।


भारी बारिश से अल्मोड़ा-ग्वालदम-थराली-कर्णप्रयाग मोटर मार्ग घनियाल धार से लेकर नासिर बाजार तक क्षतिग्रस्त है। थाला और लोल्टी में गदेरे का उफान सड़क पर आ गया और सड़क को बहा ले गया। वहीं, लोल्टी में भी कई घरों में मलबा आया है। सैकड़ों पेड़ गदेरे (बरसाती नाला) में बह गये। तलवाड़ी खालसा में पुलिया बह गई और भारी भूस्खलन होने से लोग दहशत में हैं।
 

कई क्षेत्रों में भी भारी बारिश से नुकसान

शुक्रवार की रात्रि और शनिवार तड़के हुई भारी बारिश से थराली सहित तलवाड़ी, ग्वालदम, बैनोली, जटेरा, सेरा, विजयपुर, जौला, बुड़जौला, त्रिकोट, चिड़ंगा सहित कई क्षेत्रों में भी भारी बारिश से नुकसान हुआ है। ग्रामीणों की कई नाली कृषि भूमि बह गई है और सड़कों को भी नुकसान पहुंचा है। थराली देवाल मोटर मार्ग खाड़ीबगड़, चेपड़ो गदेरे, और कोठी के पास क्षतिग्रस्त होने से यातायात पूरी तरह बंद है। वहीं पीएमजीएसवाई और लोक निर्माण विभाग के गांवों के संपर्क मार्गों में भी भारी मात्रा में मलबा आने व दीवारें गिरने से नन्दकेशरी-जौला, जूनीधार गोठिण्डा चिडंगा ग्वालदम, सहित एक दर्जन से अधिक सड़कें बंद हैं।

बादल फटने से गुड़म, थाला, लोल्टी आदि गांवों में नुकसान हुआ है। प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर जाकर नुकसान का जायजा लेने को कहा गया है। क्षति का आकलन करने के बाद ग्रामीणों को उचित मुआवजा देने की कार्रवाई की जायेगी।
- किशन सिंह नेगी, एसडीएम थराली

प्रशासन ने रोकी बदरीनाथ हेमकुंड साहिब यात्रा, 1200 यात्री रोके

मोली जिले के गोविंदघाट में शनिवार को बादल फटने से बदरीनाथ हाईवे का 30 मी. हिस्सा बह गया।  क्षतिग्रस्त हाईवे को दुरुस्त होने में अभी करीब दो दिन का समय लग सकता है, जिसे देखते हुए चमोली जिला प्रशासन ने बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब की यात्रा रोक दी है। इसके चलते 1200 तीर्थयात्रियों को अलग-अलग जगह पर रोका गया है।


  गोविंदघाट में बदरीनाथ हाईवे क्षतिग्रस्त होने से करीब 400 तीर्थयात्रियों को बदरीनाथ धाम में ही रोका गया है। जबकि करीब 700 तीर्थयात्रियों को जोशीमठ, पांडुकेश्वर और गोविंदघाट में रोका गया है। वहीं हेमकुंड यात्रा के लिए जा रहे अलीगढ़ के 100 तीर्थयात्रियों के जत्थे को श्रीनगर में ही रोक लिया गया।  गुरुद्वारा केेे प्रबंधक हरविंदर लक्की ने बताया कि श्रद्धालुओं को गुरुद्वारा में ही रोक दिया गया है। जब तक गोविंदघाट में स्थिति सामान्य होने की सूचना नहीं मिलती, तब तक उनको उनको आगे नहीं जाने दिया जाएगा। इधर, जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि गोविंदघाट में हाईवे को सुचारु होने में अभी दो दिन तक का समय लग सकता है। बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा कर लौट रहे तीर्थयात्रियों को पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों की मदद से पैदल उनके गंतव्य को भेजा जा रहा है।
 

गोविंदघाट पार्किंग में जिन तीर्थयात्रियों के वाहन मलबे में दबे हैं, उन्हें जोशीमठ तक वाहन की व्यवस्था की जा रही है। जब तक बदरीनाथ हाईवे सुचारु नहीं हो जाता, तब तक बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब के तीर्थयात्रियों को गोविंदघाट से आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं, गोविंदघाट गुरुद्वारे के वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने बताया कि गोविंदघाट में हेलीकॉप्टर सेवा सुचारु है। जो तीर्थयात्री हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा करना चाहते हैं, वे हेलीकॉप्टर से यात्रा कर सकते हैं।

चंपावत: किरोड़ा के उफान ने दो घंटे रोकी राह

टनकपुर में लगातार हुई बारिश से उफनाए किरोड़ा नाले से पूर्णागिरि मार्ग पर करीब दो घंटे यातायात बाधित रहा। इस दौरान सड़क के दोनों ओर यात्री और स्कूली बच्चे फंसे रहे। सुरक्षा के लिहाज से अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर तैनात रही। नाले का जल स्तर घटने के बाद आवागमन सुचारु हो पाया। बाटनागाड़ में मलबा आने से बूम से आगे मार्ग बंद है। 


शनिवार सुबह किरोड़ा नाले के उफान पर आने से सड़क के दोनो ओर फंसे लोगों की खबर पर अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। बताया गया कि दोपहर करीब एक बजे नाले का जल स्तर कम होने पर टनकपुर और बूम के बीच आवागमन सुचारु हो पाया। उधर बाटनागाड़ में मलबा आने से बूम के आगे पूर्णागिरि मार्ग बंद है। लोनिवि के एई एपीएस बिष्ट ने बताया कि मलबा हटाने के लिए जेसीबी मौके पर भेज दी गई है। जल्द ही मार्ग खोल दिया जाएगा। उधर, दोपहर के वक्त शारदा का जल स्तर बढ़ा गया। यूपी सिंचाई विभाग के शारदा हेडवर्क्स प्रशासन के बैराज अटैंडेंट जगदीश श्रीवास्तव ने बताया कि दोपहर 12 बजे बाद नदी का जलस्तर बड़कर एक लाख क्यूसेक पहुंच गया। जिसके बाद बैराज पर रेड अलर्ट कर बैराज से वाहनों की आवाजाही बंद करनी पड़ी। बता दें कि बैराज के निर्माण के 99 वर्ष हो चुके हैं।

क्षेत्र में हुई 59 एमएम वर्षा
बनबसा में पिछले चौबीस घंटों में 59 एमएम वर्षा रिकार्ड की गई है। शारदा हेडवर्क्स के बैराज अटैंडेंट जगदीश श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक क्षेत्र में 1269 मिमी. वर्षा हो चुकी है जबकि 2018 में 7 नवंबर तक 1782 एमएम वर्षा हो चुकी थी। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार अभी तक 513 एमएम वर्षा कम हुई है।

कोटद्वार में बारिश ने कुंभीचौड़ और रामपुर क्षेत्र में मचाई तबाही

शुक्रवार रात को क्षेत्र में हुई मूसलाधार बारिश ने सनेह क्षेत्र के कुंभीचौड़ और रामपुर में जमकर तबाई मचाई। जामुनस्रोत के उफान में एक मोहल्ले का संपर्क मार्ग बह गया और कई घरों में पानी घुस गया। वहीं क्षेत्र की नहर टूटने से कई लोगों के खेत बर्बाद हो गए। मुख्य मार्ग पर मलबा आने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शुक्रवार रात करीब 12.30 बजे सो रहे कुंभीचौड़ के लोगों की नींद उस समय टूट गई, जब जामुनस्रोत ने रौद्र रूप में बहना शुरू कर दिया। गदेरे में पानी और बहते पत्थरों की आवाज से निकटवर्ती क्षेत्र के लोग घबरा गए। गदेरे के उफान में अमर सिंह का खेत बह गया। इसके साथ ही मोहल्ले को जाने वाला संपर्क मार्ग भी बह गया।

वीर सिंह के घर में पानी घुस गया और उसके आंगन की दीवार टूट गई। लोगों ने अनहोनी की डर से अपना सामान समेटना शुरू कर दिया। करीब दो घंटे के बाद गदेरे में पानी कम होने पर लोगों ने चैन की सांस ली। रामपुर में रात एक बजे तेज बारिश के बीच मुख्य सिंचाई नगर टूट गई। इसके कारण नहर का पूरा पानी मलबे के साथ लोगों के खेतों में बहने लगा। इसके चलते लोगों के खेत में मलबा भरने से फसल खराब हो गई और बगीचों में गड्ढे पड़ गए। मुख्य मार्ग पर मलबा जमा होने के कारण मार्ग बंद हो गया। लोगों ने स्वयं ही किसी प्रकार मलबा साफ कर जाने लायक रास्ता बनाया। शाम को विभाग की जेसीबी ने रास्ता साफ किया। 

स्थानीय निवासी अमर सिंह, सुशीला देवी रावत, रोशनी, कविता रावत ने प्रशासन पर उनकी अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल से गदेरे के उफान को देखते हुए लोग बाढ़ सुरक्षा कार्य करने की मांग कर रहे हैं। पिछले साल भी गदेरे के उफान में उनका खेत बह गया था। तब एसडीएम ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया था, लेकिन बाढ़ सुरक्षा के लिए किसी प्रकार का कार्य नहीं किया। 

सिंचाई विभाग के अधिकारियों को सुनाई खरी खोटी 
रामपुर में जैसे ही सिंचाई विभाग के अधिकारी टूटी हुई नहर का निरीक्षण करने पहुंचे। वैसे ही लोग अधिकारियों पर भड़क गए। समाजसेवी मोहन सिंह व शरद नेेगी ने सिंचाई विभाग पर अपने कार्य में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। कहा कि वे पिछले सात साल से नगर की सफाई और मरम्मत की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभाग के अधिकारी बजट का अभाव बताते हुए अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने शीघ्र नहर की मरम्मत नहीं होने पर सिंचाई विभाग के खिलाफ आंदोलन करने की चेतावनी दी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed