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Uttarakhand: खिसक रहे ग्लेशियर...टिहरी जिले की नदियां और गदेरे बदल रही अपना स्वरूप, बस्तियों के लिए खतरा
Mon, 15 Sep 2025 03:20 PM IST
रेनू सकलानी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Published by: रेनू सकलानी
Updated Mon, 15 Sep 2025 03:20 PM IST
सार
टिहरी जिले में भिलंगना, बालगंगा, धर्म गंगा, जलकुर, हेवल, अगलाड़ आदि नदियां दशकों बाद पुराने प्रवाह मार्ग की तरफ आ रही हैं।
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हिमालय।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जलवायु परिवर्तन और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेश्यिरों के खिसकने से मानसून सीजन में टिहरी जिले की नदियां और गदेरे अपना स्वरूप बदल रही हैं। छोटी-बड़ी नदियां और गाड़-गदेरे वर्षों पुरानी राह पर लौटते हुए रिकॉर्ड तोड़ वेग से बह रही हैं। नदी किनारे बस्तियों के लिए यह स्थिति खतरा भी बन सकती है।
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वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विवि के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रो. एसपी सती का कहना है कि टिहरी जिले में भिलंगना, बालगंगा, धर्म गंगा, जलकुर, हेवल, अगलाड़ आदि नदियां दशकों बाद पुराने प्रवाह मार्ग की तरफ आ रही हैं।
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इसका मुख्य कारण नदी तटों पर अधिक बसावट होना, सड़कों का अधिक निर्माण, नदियों के किनारे मलबा डालना आदि प्रमुख कारण है। बारिश होते ही नदियों में गाद भर जा रहा है जो विनाश का कारण बन रहा है।