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स्मार्ट सिटी: सिटी बसों की भी राह आसान नहीं
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 20 Sep 2015 01:20 PM IST
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देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा तो उसमें विक्रम संचालकों के साथ सिटी बस संचालकों को परेशानी झेलनी होगी।
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कारण कि स्मार्ट शहर की स्मार्ट परिवहन व्यवस्था की अवधारणा पर सिटी बसें भी खरी नहीं उतर रहीं। सिटी बसों की खटारा हालत, जहां-तहां रोक देना, तेज गति से चलना और आए दिन हादसे होना इन्हीं के खिलाफ जाएगा। यही नहीं, सिटी बसों के स्टाफ का जनता से व्यवहार भी इस व्यवस्था में फिट नहीं बैठ रहा।
शहर में लगभग 270 सिटी बसें 13 रूटों पर रोजाना कई-कई चक्कर लगाती हैं। जबकि लगभग 100 बस संचालकों ने अपने परमिट आरटीओ में सरेंडर कर रखे हैं। फिटनेस के लिहाज से अधिकतर सिटी बसों की हालत सड़क पर चलने लायक नहीं है।
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ये बसें इतना धुआं छोड़ती है कि प्रदूषण के मानक कहीं टिकते। इनके अलावा सिटी बसों को बेतरतीब तरीके से चलाया जाता है। चालक की जहां मर्जी होती है, बस को रोककर सवारी चढ़ा ली और उतार दी जाती है। स्पीड इतनी तेज कि कई बार गंभीर हादसे हो चुके हैं।
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सवारी से चालक और परिचालकों की बदतमीजी भी आए दिन की बात है। फिर सवारियों को टिकट न देना, समय से न चलना जैसी अनगिनत दुश्वारियां हर दिन यात्रियों को झेलनी पड़ रही हैं। ऐसे में इन सिटी बसों को स्मार्ट सिटी में कैसे जगह मिल पाएगी?
लाल बस भी नहीं दौड़ पाई शहर में
केंद्र सरकार की जेएनयूआरएम बस सेवा (लाल बस) भी दून में कारगर नहीं हो पाई। केंद्र से प्रदेश को वर्ष 2010 में 300 बसें मिली थीं, जिनको शहरों में स्टेज कैरिज परमिट पर नगर निगम द्वारा चलाया जाना था। दून के हिस्से में भी ऐसी 36 बसें आई थीं।
लेकिन कोई संचालन कमेटी नहीं बनने पर सरकार को ये बसें यूटीसी को देनी पड़ी। जानकार बताते हैं कि अब जबकि दून को स्मार्ट सिटी बनाया जाना है तो उसमें नगर निगम को अपनी तरफ से ऐसी स्मार्ट परिवहन सेवा को लागू करना ही पड़ेगा।
सिटी बस संचालकों द्वारा टिकट न देना, समय से न चलना, सही रूटों पर न चलना और अभद्रता की लगातार शिकायतें मिलती रहती है। इन पर कार्रवाई भी की जाती है। यह सही है कि स्मार्ट सिटी में बसों की हालत बेहतर होनी चाहिए। इनमें जीपीएस सिस्टम, स्पीड गर्वनर आदि लगे होने चाहिए।
- दिनेश चंद पठोई, आरटीओ देहरादून
वर्ष 1996 में सरकार ने महानगर सिटी बस योजना चलाई थी। लेकिन डग्गामारी के चलते हुए नुकसान से योजना दम तोड़ गई। राज्य बनने के बाद यूटीसी से एनओसी ली है। सिटी बसें सुलभ और सस्ती यात्रा कराती हैं। स्मार्ट सिटी के लिए इन बसों को एसी या लो फ्लोर भी करना पड़ा तो इससे पीछे नहीं हटेंगे।
- विजय वर्धन डंडरियाल, प्रधान सिटी बस सेवा