देवभूमि में रह रहे शरणार्थी अब पूर्वी पाकिस्तानी नहीं, कहलाएंगे हिंदुस्तानी
- 1971 में पाकिस्तान से हुए युद्ध के बाद दिनेशपुर, गदरपुर और शक्तिफार्म में बसाए गए थे शरणार्थी
- पिछले कई दशकों से पूर्वी पाकिस्तानी, पूर्वी बांग्लादेशी शब्द हटाने की मांग को लेकर कर रहे प्रदर्शन
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पाकिस्तान से 1971 की लड़ाई के दौरान पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए शरणार्थियों ने 48 साल बाद राहत की सांस ली है।
राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित होते ही ऊधमसिंह नगर के गदरपुर, शक्तिफार्म और दिनेशपुर में बसे शरणार्थी खुशी से झूम उठे और कहा कि अब उनकी पहचान पूर्वी पकिस्तानी या पूर्वी बांग्लादेशी के बजाय हिंदुस्तानी के रूप में होगी। इस दौरान कुछ लोगों ने उन लोगों को भी याद किया जो भारतीय कहलाने की आस में दुनिया छोड़कर चले गए।
एक समाज श्रेष्ठ समाज संस्था अध्यक्ष योगेन्द्र कुमार साहू शक्तिफार्म सहप्रभारी गोविंद देवनाथ ने बताया कि पिछले कई वर्षों से बंगाली समुदाय तहसील स्तर से जारी होने वाले प्रमाण पत्रों पर से पूर्वी पाकिस्तानी एवं पूर्वी बांग्लादेशी शब्द हटाने की मांग कर रहा है। विधायक से लेकर नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के अलावा सांसद अजय भट्ट से भी बात की।
पूर्वी पाकिस्तानी और पूर्वी बांग्लादेशी क्यों कहा जा रहा
लोगों ने बताया कि हमारी मांग थी कि जब बंगाली समुदाय के लोगों ने भारत में ही जन्म लिया है तो उन्हें पूर्वी पाकिस्तानी और पूर्वी बांग्लादेशी क्यों कहा जा रहा है। लेकिन आज उच्च सदन में यह सारी शिकायतें दूर हो गईं है। अब हम हिंदुस्तानी हैं।
उन्होंने कहा आज सही मायने में उच्च सदन ने नागरिकता संशोधन विधेयक पास करके पीएम मोदी के सपने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ को अमली जामा पहनाया है।
फोन पर हुई बातचीत में संस्था उपाध्यक्ष लोकेश कुमार साहू, महिला अध्यक्ष नम्रता सिंह, कोषाध्यक्ष बलराम हालदार, रितिक साहू, गोविन्द देवनाथ, लक्ष्मी हालदार, पूनम सरकार, लक्ष्मी वार्ष्णेय, सीमा सरकार, राकेश बैरागी, श्रीवास पाल, मुकेश सरकार, दीपक कुमार शंकर चौधरी आदि ने भी विधेयक पास होने पर खुशी जताई।