नागरिकता बिल: लोगों ने किया समर्थन, बोले- पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों को मिलेगी नरक से मुक्ति
- संसद में पेश नागरिकता संशोधन बिल को पाकिस्तान से आए अल्पसंख्यकों ने बताया शानदार प्रयास
- दून में 57 परिवारों को नागरिकता मिलने का इंतजार
- साल 2010 के बाद 33 परिवारों को दी जा चुकी है नागरिकता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्र सरकार की ओर से संसद में पेश नागरिकता संशोधन बिल को पाकिस्तान से आए लोगों ने सरकार की शानदार प्रयास करार दिया है। पाकिस्तान से आए इन लोगों का कहना है कि नागरिकता संशोधन बिल के पारित होने और लोगों को भारतीय नागरिकता मिलने से बहुत बड़ी राहत मिलेगी। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है। इसलिए वहां से हिंदू, बौद्ध, पारसी, ईसाई हिंदुस्तान में शरण ले रहे हैं।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बट्टाग्राम जिले से परिवार समेत 1992 में भारत का रुख करने वाले राजकुमार का मानना है कि पीएम मोदी की अगुवाई में सरकार ने नागरिकता संशोधन बिल को लेकर जो कदम उठाया है, उससे पाकिस्तान से लाखों हिंदुओं को पाकिस्तानी सरकार व वहां के लोगों के जुल्म से निजात मिलेगी। वे यहां अच्छे से जिंदगी गुजर बसर कर सकेंगे।
बलूचिस्तान प्रांत के नुस्की जिले से आए कैलाश सड़ाना का कहना है कि नागरिकता संशोधन बिल पारित होने से पाकिस्तान से आए लाखों हिंदुआें को नई जिंदगी मिलेगी जो पिछले कई साल से भारतीय नागरिक बनने की इंतजार कर रहे हैं। पेशे से शिक्षक कैलाश सड़ाना का कहना है कि पाकिस्तान में वह कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाते थे। वहां की सरकार व लोगों के जुल्म से आजिज होकर साल 2010 में भतीजे पारस सड़ाना व भतीजी नैविस सड़ाना के साथ लाहौर, अटारी होते हुए ऋषिकेश आए और फिर यहीं के होकर रह गए।
कैलाश के मुताबिक उनके साथ उनके पड़ोसी श्रवण कुमार परिवार समेत आए थे जो नागपुर में बस गए। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर ढाए जा रहे जुल्म की दास्तां बयान करते हुए कैलाश ने कहा कि पाकिस्तानी सेना के साथ ही वहां की सरकार, स्थानीय लोग अल्पसंख्यकों पर जुल्म ढाते हैं। धर्म परिवर्तन के साथ ही महिलाओं के साथ अत्याचार आम बात है। इसका विरोध करने वालों को सेना द्वारा मार दिया जाता है।
पाकिस्तानी सरकार और स्थानीय लोग नहीं बेचने दे रहे संपत्तियां
दून निवासी युवती से की शादी, दो बच्चे के हैं पिता
कैलाश ने भारतीय नागरिकता मिलने के साथ ही दून निवासी युवती से शादी कर ली। उनके दो बेटे हैं। ऐसे में भरे पूरे परिवार के साथ ही यहां अच्छे से जिंदगी गुजार रहे हैं। परिवार चलाने के लिए टीचिंग के साथ ही प्रापर्टी का काम करते हैं।
दून में 57 परिवारों को भारतीय नागरिकता का इंतजार
जिला प्रशासन के आंकड़ाें के अनुसार पाकिस्तान के विभिन्न इलाकों से आए 57 परिवारों को भारतीय नागरिकता का इंतजार है। इन परिवारों ने जिला प्रशासन को आवेदन पत्र देकर नागरिकता दिए जाने का अनुरोध किया है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन रामजी शरण शर्मा ने बताया कि फिलहाल 33 पाकिस्तानी परिवारों को भारतीय नागरिकता दी जा चुकी है। जबकि बाकी के आवेदन पत्रोें पर विचार किया जा रहा है।
सीएबी अति महत्वपूर्ण, केंद्र का उचित कदम : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नागरिकता संशोधन बिल (सीएबी) को देश के लिए अतिमहत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने बिल के लोकसभा के बाद बुधवार को राज्यसभा से भी पारित होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जिस तरह के सुधारात्मक कदम अपने इस कार्यकाल में उठाए गये हैं वे बहुत ही ऐतिहासिक हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस कार्यकाल में कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं।
देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए केंद्र के लिए जा रहे निर्णयों को विरोध अनुचित है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं को इस कदर प्रताड़ित किया गया कि उनकी आबादी आजादी के बाद 10 प्रतिशत से घटकर अब 2 प्रतिशत रह गई है। अल्पसंख्यक हिंदु अगर अपनी प्रताड़ना से तंग आकर भारत में आना चाहते हैं तो उनको नागरिकता देना जरूरी है। कांग्रेस का इसको लेकर विरोध अनुचित है। केवल राजनीति के लिए राष्ट्रहित की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।