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सर्किल रेट ने बचाई माफियाओं की ब्लैक मनी
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 11 Nov 2014 01:51 PM IST
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उत्तराखंड शासन की ओर से हाल में जारी नए सर्किल रेट में रियल इस्टेट कारोबारियों को तो फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई ही है, भूमाफिया की ब्लैक मनी बचाने की भी कवायद की गई है।
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स्थानीय प्रॉपर्टी कारोबारियों से सांठगांठ
राजधानी देहरादून के बाहरी क्षेत्रों, ग्रामीण इलाकों में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र समेत विभिन्न राज्यों के बड़े भूमाफिया ने करोड़ों का काला धन इनवेस्ट किया है। स्थानीय प्रॉपर्टी कारोबारियों से इनकी सांठगांठ है।
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सूत्र बताते हैं कि इन लोगों ने जमीनें बीघे के हिसाब से खरीदी थीं, लेकिन इन पर ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाने के बजाय जमीनों को छोटे-छोटे प्लाट बनाकर बेचा जा रहा है। खास बात यह है कि जिन जमीनों को ये लोग आवासीय प्लाट के तौर पर बेचते हैं, वे कृषि श्रेणी में आती हैं।
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सूत्रों के अनुसार शासन स्तर पर नए सर्किल रेट की कवायद शुरू होते ही भूमाफिया को अपनी करोड़ों की जमीनें बर्बाद होने का डर था, क्योंकि कृषि भूमि पर आवासीय प्लाटिंग का पेंच फंस जाता। इसके लिए शासन स्तर पर इन भूमाफिया ने जोड़तोड़ की।
इसके बाद ही जमीनों के खेल में बाधा बन रही खतौनी को हटा दिया गया। इसके बजाय नया सर्किल रेट तय करने का मानक सड़क को बना दिया गया। खतौनी न होने से जमीन की श्रेणी की बात ही खत्म हो गई।
रेट भी रखा कम
भूमाफिया को फायदे के लिए संबंधित क्षेत्रों में सर्किल रेट भी न्यूनतम रखा गया है। यहां गैर वाणिज्यिक निर्माण (प्रथम श्रेणी पक्का निर्माण) की दर प्रति वर्ग मीटर 12,000 रुपए, द्वितीय श्रेणी (आधा पक्का) और कच्चा की दर 9,500 रुपए रखी गई है।
हकीकत में यहां जमीन की कीमत सर्किल रेट से तीन से पांच गुना महंगी है, लेकिन स्टांप ड्यूटी कम होने से ग्राहक यहां रुख कर लेते हैं। शासन के इस खेल से अब कारोबारियों को जमीन न बिकने की भी चिंता नहीं रह गई है।
यह हैं क्षेत्र
सेवला कलां, बंजारावाला, भारूवाला ग्रांट, बद्रीपुर, नत्थनपुर, आमवाला तरला, डांडा नूरीवाला, डांडा धोरण, डांडा लखौंड, आरकेडिया ग्रांट, गोरखपुर माफी, मेहूंवाला माफी, तेलपुरा ग्रांट, चंद्रबनी ग्रांट, हरभजवाला, मोथरोवाला, मोहब्बेवाला, मोहकमपुर खुर्द, मोहकमपुर कला, नवादा, कुआंवाला, खेड़ा मानसिंह वाला, सुंदरवाला, सौंधोवाला, गुजराड़ा मानसिंह, झड़ीपानी, आसारोड़ी, गजियावाला
ऐसे हो रहा खेल
- सर्किल रेट में खतौनी को दरकिनार किया गया, अगर खतौनी के लिहाज से भूमि देखी जाती तो कृषि भूमि पर आवासीय प्लाटिंग का पेंच फंस जाता
- शहर के नजदीक खेतों में आवासीय प्लाटिंग की शिकायतें बराबर जिला प्रशासन के पास आ रही हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती
-नियमानुसार बंदोबस्त का सर्वे पूरा होने तक भूमि का स्वरूप बदलने, नए दाखिल-खारिज का काम रुक जाता है लेकिन अभी चल रहा है
सर्किल रेट पर प्रशासन को शासन की ओर से ही गाइडलाइन जारी की गई थी। जो नया सर्किल रेट जारी किया गया है, वह इस गाइडलाइन के अनुसार ही तय हुआ है।
- प्रताप सिंह शाह, एडीएम वित्त