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Children's Day Special: एक दिन का ‘लक्ष्मी’ पूजन फिर वही फुटपाथ, इस बच्ची की कहानी दिल छू लेगी

Wed, 15 Nov 2017 02:42 PM IST
भूपेश कन्नौजिया/अमर उजाला, हल्द्वानी
भूपेश कन्नौजिया/अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Wed, 15 Nov 2017 02:42 PM IST
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Children Day Special 2017 special story on a girl laxmi
laxmi

बाल दिवस पर अमर उजाला आपको ऐसी बच्ची की कहानी बता रहा है, जिसे थोड़ा सा सहारा मिला तो आंखों में न जानें कितने सपने पलने लगे। लेकिन ये क्या? ये तो बस 'एक दिन का ‘लक्ष्मी’ पूजन और फिर वही फुटपाथ' की कहानी है।

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सात साल की लक्ष्मी को नगर निगम के स्वच्छता अभियान का ब्रांड एंबेसडर तो बना दिया मगर उसके फटेहाल को जानने और समझने की जरूरत नहीं समझी। उसका परिवार फुटपाथ पर रहता है।
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लक्ष्मी भीख मांगकर दो वक्त की रोटी के इंतजाम में घर वालों की मदद कर रही है। वह पढ़ना चाहती है, आगे बढ़ना चाहती है। उसे बाल दिवस से कोई मतलब नहीं, चिंता है तो सिर्फ अपने मां-बाप की... जिनके लिए वह लोगों के आगे हाथ फैलाती है।

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फुटपाथ पर अपने माता-पिता के साथ रहती है लक्ष्मी

Children Day Special 2017 special story on a girl laxmi

31 अक्तूबर को नगर निगम की ओर से रामलीला मैदान पर राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर स्वच्छता अभियान कार्यक्रम हुआ। इसी दौरान अधिकारियों की नजर केले का छिलका उठाकर कूड़ेदान में डाल रही लक्ष्मी पर पड़ी तो वे दंग रह गए।

नगर आयुक्त हरबीर सिंह ने उसे न सिर्फ गोद में उठाया बल्कि नगर निगम के स्वच्छता अभियान का ब्रांड एंबेसडर भी घोषित कर दिया। तब माइक से यह भी घोषणा की गई कि बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला के साथ-साथ अब लक्ष्मी भी नगर निगम की ब्रांड एंबेसडर होगी।

लक्ष्मी तब खुश थी। उसे लगा कि भाग्योदय होने वाला है लेकिन एक पखवाड़ा बीतने वाला है। लक्ष्मी वहीं बेस अस्पताल के सामने फुटपाथ पर अपने माता-पिता के साथ रहती है। सोमवार सुबह भी लक्ष्मी रोज की तरह सड़क से गुजरने वालों को देख रही थी।

इसलिए दूसरों से अलग है लक्ष्मी

Children Day Special 2017 special story on a girl laxmi

इस आशा के साथ कि कोई कुछ दे दे। कभी पिता जय राम से केले खाने की जिद करती तो कभी मां रानी देवी के साथ हंसी ठिठोली। कभी सड़क के उस पार चली जाती। उससे पूछा गया कि क्या स्कूल जाना चाहती हो..तपाक से जवाब मिला हां। वह भी पढ़ना चाहती है। पूछने पर बोली कि उसे दोस्तों के साथ खेलना-कूदना, खाना और घूमना भी अच्छा लगता है।

इसलिए दूसरों से अलग है लक्ष्मी
लक्ष्मी की ऊर्जा का जवाब नहीं। उसकी हाजिर जवाबी भी उसे हमउम्र बच्चों से अलग करती है। उसे शहर के कई महत्वपूर्ण स्थानों के नाम याद हैं। पिता जय राम का कहना है की बेटी की स्मरण शक्ति काफी अच्छी है। उसका बात करने का ढंग अलग है। कई बार उसे स्कूल भेजने की सोची मगर आर्थिक तंगी और मां की लाचारी के चलते दाखिला नहीं करा पाए। लक्ष्मी की मां रानी देवी का कहना है कि बेटी को अफसर बिटिया बनता देखना चाहती थी। जिस दिन अखबार में उसकी फोटो देखी तो बहुत खुश हुईं। सोचा था हम तो फटेहाल हैं मगर बेटी का भविष्य जरूर संवर जाएगा।

अग्निकांड में सब कुछ तबाह हो गया
मूल रूप से संभल जिले के चंदौसी के बहजोई के रहने वाले जय राम ने बताया की कई साल पहले अग्निकांड में उनका सब कुछ स्वाहा हो गया। इधर-उधर भटकने के बाद एक साल पहले वह पत्नी और बेटी को लेकर हल्द्वानी आ गए। यहां भीख मांगकर परिवार पाल रहे हैं।

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