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मास्टरप्लान : जनसुनवाई में छाया भूकंप रेखा का मुद्दा, जो बहुमंजिला भवन बने हैं उनका क्या होगा
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Iमिश्रित आबादी को लेकर भी कई सवाल किए गए, चीफ टाउन प्लानर ने कहा- जहां जरूरत होगी, बदलाव करेंगेI
दून के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2041 को लेकर चीफ टाउन प्लानर शशि मोहन श्रीवास्तव ने सुनवाई की। सुनवाई में फाल्ट लाइन (देहरादून से होकर गुजरने वाली भूकंप रेखा) समेत कई आपत्तियों पर गंभीर चर्चा हुई। आपत्ति दर्ज कराने वालों ने कहा कि मास्टर प्लान में भूकंप रेखा तो दिखा दी गई है, लेकिन इसके लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
टाउन प्लानर ने कहा कि भूकंप रेखा वाले क्षेत्र को बफर जोन घोषित किया जाएगा। इसमें तीन मंजिल से अधिक ऊंचे मकान नहीं बन सकेंगे। आपत्तिकर्ताओं ने कहा कि जो इमारतें और बहुमंजिला भवन इस क्षेत्र में पहले से बनी हुई हैं, उनका क्या होगा। पुरकुल मसूरी रोपवे प्रोजेक्ट, मल्टीलेवल पार्किंग और कई होटल प्रोजेक्ट पर भी भूकंप रेखा जोन में काम चल रहा है। इनके लिए मास्टर प्लान में क्या प्रावधान किया गया है?
गौरतलब हो कि दून के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2041 को लेकर सुनवाई का दौर चल रहा है। शहर के निवासी कैंपों में पहुंचकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। उत्तराखंड इंजीनियर्स एंड आर्किटेक्ट एसोसिएशन ने चीफ टाउन प्लानर से मिलकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। इनकी शुक्रवार को सुनवाई तहसील कॉम्प्लेक्स में हुई। आपत्तिकर्ताओं ने कहा कि हाईराइज प्रोजेक्ट के लिए मास्टर प्लान में हर्रावाला के पास प्रावधान किया गया है। यहां पर पहले से ही अन्य परियोजनाएं चल रही हैं। हाईराइज प्रोजेक्टों के लिए नए स्थान पर प्रावधान किया जाए। नदी नालों के किनारे बसी मलिन बस्तियों के पुनर्वास के लिए कोई स्थान नहीं दर्शाया गया है। मास्टर प्लान में इसके लिए उचित स्थान की व्यवस्था की जाए। ग्रीन बेल्ट का बेहद अभाव है। नदी के किनारों तक शिक्षा, होटल और अस्पतालों के लिए प्रावधान किया गया है। इसे ठीक किया जाए। ग्रीन बेल्ट का दायरा बढ़ाया जाए।
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Iसड़क का प्रावधान नहीं, फिर कैसे औद्योगिक क्षेत्रI
औद्योगिक क्षेत्रों को लेकर लंबी चर्चा हुई। आपत्ति जताने वालों ने कहा कि मोहब्बेवाला, पटेलनगर, रायपुर रोड एवं हर्रावाला में औद्योगिक क्षेत्र को प्रस्तावित किया गया है, लेकिन यहां पर मास्टर प्लान रोड नहीं दर्शाया गया है। बिना मास्टर प्लान सड़क के विकास कैसे संभव होगा, यह बड़ा सवाल है। इन क्षेत्रों में 12 मीटर चौड़ी सड़क का प्रावधान करें। औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय, वाणिज्यिक, मिश्रित गतिविधियां हैं। वास्तविक जमीनी स्थिति के मुताबिक मास्टर प्लान 2041 में उसे दर्ज कराया जाए। रायपुर रोड, रिस्पना के आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में सभी प्रकार की गतिविधियां हैं। इसी तरह मोहब्बेवाला, पटेल नगर इंडस्ट्रियल जोन में प्लान भटका हुआ प्रतीत हो रहा है।
Iसीमा निर्धारण ठीक से नहीं कियाI
मिश्रित क्षेत्र को लेकर हुई चर्चा में कहा गया कि सड़क को चौड़ी करने के प्रावधान के बिना शहर का काफी क्षेत्र व्यावसायिक दर्शाया गया है। इससे क्षेत्र का विकास प्रभावित होगा। खासकर कौलागढ़ क्षेत्र का मुद्दा उठाकर यहां व्यावसायिक क्षेत्र के मुताबिक चौड़ी सड़क का प्रावधान करने की बात की गई। कहा, कौलागढ़ रोड पर राजेंद्रनगर की ओर ओएनजीसी आवासीय कॉलोनी की सीमा मास्टर प्लान में ठीक से दर्ज नहीं की गई है। ओएनजीसी चौक से बल्लूपुर तक कैनाल रोड पर निजी संपत्तियों को ओएनजीसी के हिस्से में दिखाया गया है। वहीं, ग्राम फुलसानी में टीएचडीसी कॉलोनी को कृषि बताया गया है, यह आवासीय होनी चाहिए।
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दून के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2041 को लेकर चीफ टाउन प्लानर शशि मोहन श्रीवास्तव ने सुनवाई की। सुनवाई में फाल्ट लाइन (देहरादून से होकर गुजरने वाली भूकंप रेखा) समेत कई आपत्तियों पर गंभीर चर्चा हुई। आपत्ति दर्ज कराने वालों ने कहा कि मास्टर प्लान में भूकंप रेखा तो दिखा दी गई है, लेकिन इसके लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
टाउन प्लानर ने कहा कि भूकंप रेखा वाले क्षेत्र को बफर जोन घोषित किया जाएगा। इसमें तीन मंजिल से अधिक ऊंचे मकान नहीं बन सकेंगे। आपत्तिकर्ताओं ने कहा कि जो इमारतें और बहुमंजिला भवन इस क्षेत्र में पहले से बनी हुई हैं, उनका क्या होगा। पुरकुल मसूरी रोपवे प्रोजेक्ट, मल्टीलेवल पार्किंग और कई होटल प्रोजेक्ट पर भी भूकंप रेखा जोन में काम चल रहा है। इनके लिए मास्टर प्लान में क्या प्रावधान किया गया है?
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गौरतलब हो कि दून के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2041 को लेकर सुनवाई का दौर चल रहा है। शहर के निवासी कैंपों में पहुंचकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। उत्तराखंड इंजीनियर्स एंड आर्किटेक्ट एसोसिएशन ने चीफ टाउन प्लानर से मिलकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। इनकी शुक्रवार को सुनवाई तहसील कॉम्प्लेक्स में हुई। आपत्तिकर्ताओं ने कहा कि हाईराइज प्रोजेक्ट के लिए मास्टर प्लान में हर्रावाला के पास प्रावधान किया गया है। यहां पर पहले से ही अन्य परियोजनाएं चल रही हैं। हाईराइज प्रोजेक्टों के लिए नए स्थान पर प्रावधान किया जाए। नदी नालों के किनारे बसी मलिन बस्तियों के पुनर्वास के लिए कोई स्थान नहीं दर्शाया गया है। मास्टर प्लान में इसके लिए उचित स्थान की व्यवस्था की जाए। ग्रीन बेल्ट का बेहद अभाव है। नदी के किनारों तक शिक्षा, होटल और अस्पतालों के लिए प्रावधान किया गया है। इसे ठीक किया जाए। ग्रीन बेल्ट का दायरा बढ़ाया जाए।
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Iसड़क का प्रावधान नहीं, फिर कैसे औद्योगिक क्षेत्रI
औद्योगिक क्षेत्रों को लेकर लंबी चर्चा हुई। आपत्ति जताने वालों ने कहा कि मोहब्बेवाला, पटेलनगर, रायपुर रोड एवं हर्रावाला में औद्योगिक क्षेत्र को प्रस्तावित किया गया है, लेकिन यहां पर मास्टर प्लान रोड नहीं दर्शाया गया है। बिना मास्टर प्लान सड़क के विकास कैसे संभव होगा, यह बड़ा सवाल है। इन क्षेत्रों में 12 मीटर चौड़ी सड़क का प्रावधान करें। औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय, वाणिज्यिक, मिश्रित गतिविधियां हैं। वास्तविक जमीनी स्थिति के मुताबिक मास्टर प्लान 2041 में उसे दर्ज कराया जाए। रायपुर रोड, रिस्पना के आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में सभी प्रकार की गतिविधियां हैं। इसी तरह मोहब्बेवाला, पटेल नगर इंडस्ट्रियल जोन में प्लान भटका हुआ प्रतीत हो रहा है।
Iसीमा निर्धारण ठीक से नहीं कियाI
मिश्रित क्षेत्र को लेकर हुई चर्चा में कहा गया कि सड़क को चौड़ी करने के प्रावधान के बिना शहर का काफी क्षेत्र व्यावसायिक दर्शाया गया है। इससे क्षेत्र का विकास प्रभावित होगा। खासकर कौलागढ़ क्षेत्र का मुद्दा उठाकर यहां व्यावसायिक क्षेत्र के मुताबिक चौड़ी सड़क का प्रावधान करने की बात की गई। कहा, कौलागढ़ रोड पर राजेंद्रनगर की ओर ओएनजीसी आवासीय कॉलोनी की सीमा मास्टर प्लान में ठीक से दर्ज नहीं की गई है। ओएनजीसी चौक से बल्लूपुर तक कैनाल रोड पर निजी संपत्तियों को ओएनजीसी के हिस्से में दिखाया गया है। वहीं, ग्राम फुलसानी में टीएचडीसी कॉलोनी को कृषि बताया गया है, यह आवासीय होनी चाहिए।