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आज रिटायर होंगे मुख्य सचिव एन रविशंकर
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 31 Jul 2015 10:04 AM IST
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उत्तराखंड के वरिष्ठ नौकरशाह मुख्य सचिव (सीएस) नागराजन रविशंकर शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
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नए मुख्य सचिव की नियुक्ति का फैसला भी शुक्रवार को ही होने की संभावना है। एन रविशंकर के बाद सूबे में वरिष्ठतम नौकरशाह राकेश शर्मा है, इसलिए उनका दावा मजबूत माना जा रहा है।
1980 बैच के आईएएस एन रविशंकर राज्य के ग्यारहवें मुख्य सचिव थे। अपनी पूरी सर्विस में केवल मुजफ्फरनगर जिले के जिला मजिस्ट्रेट रहे। केंद्र में सचिव, अपर सचिव, राज्य में प्रमुख सचिव, सचिव के तमाम पदों पर रहे रविशंकर को समय के पाबंद अफसरों में गिना जाता है। मूलत: तमिलनाडु के रहने वाले एन रविशंकर ने विगत 21 अक्टूबर 2014 को बतौर मुख्य सचिव ज्वाइन किया था।
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यूं तो सीएस पद के दिल्ली से लेकर देहरादून तक कई दावेदार हैं, लेकिन सरकार ने केंद्र से दिल्ली में तैनात अपने किसी अफसर को इस पद के लिए ना तो वापस मांगा है और ना ही किसी के आने की सूचना है। लिहाजा कयास लगाए जा रहे हैं कि देहरादून में उपलब्ध आईएएस में से ही किसी को मौका मिल सकता है।
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राकेश शर्मा के बाद यहां सीएस ग्रेड में ही एक और आईएएस एस राजू है जो कि इस समय अपर मुख्य सचिव है और शर्मा से दो साल जूनियर है। शर्मा को मुख्य सचिव की कुर्सी मिली तो उनका कार्यकाल तीन महीने का होगा। वह तीस अक्टूबर को रिटायर होंगे।
यदि राजू को यह जिम्मेदारी मिली तो वह भी मात्र पांच महीने ही इस सीट पर रहेंगे, उनका रिटायरमेंट मार्च 2016 में है। जहां तक सीएस बनाने का मामला है, आखिरी पसंद तो मुख्यमंत्री की चलेगी।
सीएस रहते कठोर फैसले लिए
सीएस एन रविशंकर ने सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले गुरूवार को हरिद्वार केगांव चुडियाला में बतौर मंत्रिमंडलीय सचिव अपने करियर की आखिरी कैबिनेट बैठक का आयोजन कराया। कैबिनेट सदस्यों ने रविशंकर के कार्यों की सराहना की। अपने नौ महीने नौ दिन के कार्यकाल में रविशंकर ने कई बेहतर प्रयास किए।
खासतौर पर सचिवालय की कार्यशैली में बदलाव। तमाम विरोध के बावजूद उन्होंने फाइव-डे वीक को सिक्स -डे वीक किया। हालांकि आज कैबिनेट ने उसमें थोड़ा बदलाव किया है। इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग, फिजिक्स व मैनेजमेंट विषयों की शैक्षिक योग्यता रखने वाले एन रविशंकर के कुल करियर का 90 प्रतिशत समय सचिवालय की फाइलों में गुजरा।
दक्षिण भारतीय होने के बावजूद विशुद्ध हिन्दी बोलना और फाइलों व बोलचाल में हिन्दी के कठिन शब्दों का प्रयोग करना सभी को आकर्षित करता था। एन रविशंकर ने मुख्य सचिव बनने के बाद कई कठोर फैसले लिए। कर्मचारियों के तमाम तरह के विरोध और दबाव के बीच वह सचिवालय में फाइव-डे वीक को सिक्स डे वीक करने से पीछे नहीं हटे।
काफी लंबे समय से लंबित किसाऊ हाइड्रो प्रोजेक्ट पर उन्होंने हिमाचल के साथ एमओयू साइन किया। यह डैम हिमाचल, उत्तराखंड व केंद्र की मदद से बनना है। सचिवालय की कार्यशैली में बदलाव की कोशिश में उन्हें बहुत कामयाबी तो नहीं मिली लेकिन पहले से कुछ बेहतर हुआ।
खुद समय के पाबंद रहे और हर रोज सुबह साढ़ नौं बजे कार्यालय पहुंच जाते थे। उन्हें जब भी इस बात की भनक लगती थी कि सचिव व प्रमुख सचिव समय के प्रति लापरवाह हो रहे हैं, तो वह सुबह दस बजे और अपराहन में तीन बजे अचानक बैठक बुलाते थे, ताकि सब अलर्ट रहे।