मुख्यमंत्री का 'समाधान' या शिकायतकर्ता के लिए 'आफत'
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मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट 'समाधान' में अगर आप शिकायत दर्ज करना चाहते हैं, तो सलाह यही है कि रहने दीजिए। शिकायत के समाधान के बजाय वे आपको इतना परेशान कर देंगे कि आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि इससे अच्छा होता मैं चुप रहता।
जी हां यही हाल है सिस्टम का। बातों के प्रमाणीकरण के लिए एक मामले का जिक्र करना जरूरी है। इसी वर्ष 5 अप्रैल को सृष्टिविहार निवासी गौरव काला ने samadhanuk.gov.in में सड़क के सुधारीकरण की शिकायत दर्ज की थी।
मामला कुछ यूं है कि शहर में सीवर लाइन डलवाने के बाद महीनों तक इलाके की सड़क सुधारीकरण का कार्य नहीं किया गया। सड़क में मौजूद गढ्ढो से जान-माल का खतरा देखते हुए सड़क सुधारीकरण का कार्य जरूरी था।
लेकिन समस्या सुलझाना तो दूर विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोपने और खुद को बचाने की जुगत में है। अमर उजाला से बातचीत में गौरव ने बताया कि विगत दो तीन दिनों से उन्हें कम से कम 20 बार कॉल किया जा चुका है।
शिकायत वापस लेने का दबाव
जलसंस्थान और पेयजल निगम से लेकर समाधान हेल्पलाइन डेस्क, ठेकेदार कॉल करके परेशान कर रहे हैं। जलसंस्थान के अधिकारी फोन पर कहते हैं कि ये काम पेयजल वालों का है। वहीं, पेयजल निगम वालों का भी कुछ इसी तरह का तर्क है।
हद तो तब हो जाती है कि जब पेयजल निगम से फोन पर कहा जाता है कि आप कागज पर लिख दीजिए कि आपकी समस्या दूर हो चुकी है। कोई ये भी कहता है कि आप तो खुशनसीब है कि हमने वहां थोड़ा बहुत रोड तो बनाई, पहले तो वहां कच्चा रास्ता था।
समाधान यूके डॉट कॉम हेल्पलाइन डेस्क दावा करता है कि वह हर समस्या का समाधान 20 दिन के भीतर करेगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो शिकायतकर्ता को फोन पर देरी के कारणों के बारे में बताया जाता है। गौरव बताते हैं कि अप्रैल महीने में की गई शिकायत पर जुलाई में रिस्पांस आया है, वह भी संतोषजनक नहीं परेशान करने वाला है।