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देहरादून रजिस्ट्री फर्जीवाड़ा केस: हूबहू नकल कर फर्जी रजिस्ट्री तैयार करने वाला छोटा पंडित गिरफ्तार

Fri, 06 Oct 2023 06:20 PM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Fri, 06 Oct 2023 06:20 PM IST
सार

दून में फर्जी रजिस्ट्री का सामने आया था। जिसमें असली रजिस्ट्री बदलकर उसके स्थान पर फर्जी रजिस्ट्री तैयार कर जमीनें बेची गई थी।

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Dehradun registry fraud case Chhota Pandit who prepared fake registry by copying it exactly arrested
सांकेतिक फोटो

विस्तार

फर्जी रजिस्ट्री प्रकरण में दून पुलिस ने एक और आरोपी महेश चंद उर्फ छोटा पंडित को सहारनपुर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ही हूबहू नकल कर फर्जी रजिस्ट्री तैयार करता था। मामले में पुलिस अभी तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

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दून में फर्जी रजिस्ट्री का सामने आया था। जिसमें असली रजिस्ट्री बदलकर उसके स्थान पर फर्जी रजिस्ट्री तैयार कर जमीनें बेची गई थी। मामले में 15 जुलाई को सहायक महानिरीक्षक निबंधन ने कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया था। जिसके बाद जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। एसआईटी की ओर से रजिस्ट्रार ऑफिस से जानकारी जुटाकर जांच की गई और कुछ प्रॉपर्टी डीलर के नाम सामने आए। जिनसे पूछताछ के बाद उक्त फर्जीवाड़े में कई लोगों के नाम प्रकाश में आए। टीम ने कई संदिग्धों के विभिन्न बैंक अकाउंट की जांच की तो पता चला कि करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। मामले में पुलिस ने बुधवार को 11वें आरोपी महेश चंद उर्फ छोटा पंडित को सहारनपुर से गिरफ्तार किया है।
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केपी सिंह के यहां मुंशी था महेश
कोतवाल राकेश गुसांई ने बताया कि आरोपी महेश चंद उर्फ छोटा पंडित वर्ष 2014 तक कंवरपाल सिंह उर्फ केपी के यहां हल्दी व जड़ी-बूटी के कारोबार में मुंशी था। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि केपी ने उसे बताया कि वह विवादित प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने का काम करना चाहता है। इसी काम के लिए केपी कई-कई दिन बाहर रहने लगा। केपी खाली कागज और पुराने स्टांप मेरठ और दिल्ली से लाता था। कुछ लिखे बैनामा और अभिलेखों की नकल उन खाली कागजों व स्टांप पर हूबहू उससे करवाता था। इसके बाद कमल विरमानी और अन्यों के साथ मिलकर फर्जी अभिलेखों को जिल्द में असली के रूप में चस्पा करवा देता था। केपी सिंह ने एक बार उसे रजिस्टर लाकर दिया। जिसकी हूबहू नकल करने के लिए कहा गया, जो नवादा में मित्तल, रायपुर में इंद्रावती और जाखन में स्वरूप रानी आदि की जमीनों से संबंधित था। इसे लिखने में उसे डेढ़ महीना लगा था।

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