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दस लाख में बनवा रहे थे आईटी अफसर
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 30 Sep 2013 11:38 AM IST
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एसएससी की परीक्षा में नकल कराने वाला गिरोह दस-दस लाख में इनकम टैक्स अफसर बनवा रहा था। गिरोह की निगाह छोटे शहरों के बेरोजगार युवकों पर रहती है।
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छोटे-छोटे शहरों और कसबों के युवकों को पैसे का लालच देकर गिरोह से जोड़ा जाता है। इन्हीं के जरिये मोटी रकम लेकर गिरोह का संचालन होता है। आरोपियों से पूछताछ में इस बात का खुलासा हुआ है। एसएससी की परीक्षा में नकल करते पकड़े गए आरोपी 12वीं से स्नातक तक पढ़े-लिखे और खेती-किसानी करने वाले हैं।
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एसजीआरआर इंटर कॉलेज में बने परीक्षा केंद्र में नकल करते पकड़ी गई स्वाति को ब्लूटूथ पर सवालों के जवाब बताने के आरोप में पकड़े गए दून में मौजूद मुजफ्फरनगर निवासी गिरोह के एजेंट सतेंद्र ने बताया कि उसके गांव के एक युवक ने उसे दिल्ली के एक व्यक्ति से मिलवाया था। उसी ने मोबाइल फोन और कुछ सिम दिए थे।
स्वाति के पति से मिले साढ़े तीन लाख रुपए दिल्ली के उसी व्यक्ति को दिए थे। स्वाति के पति अमित तोमर ने बताया कि उनके गांव के सतेंद्र ने किसी युवक से मिलवाया था। स्वाति को दस लाख में इनकम टैक्स अफसर बनाने की बात तय हुई थी। गांव का होने की वजह से वह युवकों पर विश्वास कर गया।
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ललित ने बताया कि वह ब्लूटूथ पर अपने भाई जित्तू से सवालों के जवाब पूछ रहा था। जित्तू ने भी दिल्ली के एक व्यक्ति को मोटी रकम दी थी। जित्तू पुलिस की पकड़ से बाहर है। राजेश ने बताया कि उसे चचेरा भाई सोनू ब्लूटूथ पर जवाब दे रहा था। सोनू को शुरू में तीस हजार दिए थे। सोनू भी फरार है।
पुलिस को पहले मिल गई थी सूचना
एसएससी की परीक्षा में गोलमाल की सूचना पुलिस और खुफिया एजेंसियों को पहले ही लग गई थी। दिल्ली पुलिस से भी इस बारे में सूचनाओं का आदान-प्रदान किया गया था।
एसएसपी केवल खुराना के निर्देश पर सीओ सिटी एचएस सती, शहर कोतवाल जेएस नेगी, इंस्पेक्टर डालनवाला सीएस बिष्ट, एसओ वसंत विहार प्रदीप राणा, एसओजी के एसआई संदीप थपलियाल आदि की टीम को शनिवार रात ही नकल करने वालों को पकड़ने के लिए लगाया गया था। सर्विलांस के दौरान पुलिस को कुछ संदिग्ध नंबर मिले। लोकेशन ट्रेस कर परीक्षा संचालित कर रहे केंद्रों के संचालकों को सूचित कर वहां पहले ही सादी वर्दी में पुलिस तैनात की थी।
कोड भाषा में होती थी बातचीत
नकल कराने वालों की नकलचियों से कोड भाषा में बातचीत होती थी। कुछ रिकार्डिंग पुलिस के हाथ लगी है। रिकार्डिंग के कुछ अंश इस तरह हैं।
एजेंट: जैसे ही प्रश्नपत्र हाथ में आए तो कॉल कर यश कर देना...
अभ्यर्थी: ठीक है, धीरे से बोलेंगे समझ लेना
एजेंट: हां-हां
एजेंट: मैं प्रश्नपत्रों के कुछ कोड नंबर बोलूंगा, जो कोड तुम्हारे प्रश्नपत्र का हो वह कहते ही तुम खासी कर देना
अभ्यर्थी: ठीक
अभ्यर्थी: अगर किसी सवाल का ऑप्शन ठीक से पता न लगे तो क्या करें
एजेंट: दोबारा से खासी कर प्रश्न संख्या बता देना...।
दिल्ली-लखनऊ से हुआ संचालन
एसएससी की परीक्षा में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले गिरोह के सरगना दिल्ली और लखनऊ में बैठकर काम को अंजाम दे रहे थे। यही नहीं, विभिन्न शहरों में भी कुछ एजेंट एक दिन पहले ही भेज दिए गए थे। पकड़े गए युवकों से पूछताछ में पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लगी हैं।
सूत्रों का कहना है कि गिरोह का सरगना मुख्य परीक्षा की तमाम आंसर शीट परीक्षा शुरू होने से पहले ही हासिल कर ली थी। उसके बाद दिल्ली और लखनऊ के सरगना ने विभिन्न शहरों में मौजूद अपने एजेंटों से संपर्क किया। एजेंटों का जिन अभ्यर्थियों से सौदा था, उन्होंने अपने-अपने ग्राहकों (परीक्षा दे रहे अभ्यर्थियों) को ब्लूटूथ पर कॉल लगाई। कॉल पर एजेंट ने अपने-अपने अभ्यर्थियों के प्रश्नपत्र का कोड पता किया।
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इसके बाद कोड दिल्ली और लखनऊ भेजे गए। वहां से विभिन्न शहरों में मौजूद एजेंटों को संबंधित प्रश्नपत्र के कोड के उत्तर बताए गए। पूरे काम में करीब एक घंटा लग गया। एक घंटे बाद परीक्षा कक्ष में बैठे अभ्यर्थियों को उत्तर बताए गए। जिन अभ्यर्थियों से सौदा तय था उन्होंने एक घंटे खाली बैठने के बाद केवल बीस मिनट में प्रश्नों के जवाब दे दिए। इससे भी कक्ष निरीक्षकों को संदेह हुआ और उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया गया।