चारधाम यात्रा पर आपदा का असर, जख्म अभी ताजे हैं...
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जून 2013 की आपदा के बाद चारों धाम में सुस्त पुनर्निर्माण का असर यमुनोत्री में कम दिख रहा है। शुक्रवार को यमुनोत्री के कपाट खुल गए।
ठीक एक दिन पहले कंपकंपाती ठंड के बीच कामचलाऊ सड़क मार्ग से कुछ श्रद्धालु पहुंचे हैं। भले ही उनकी संख्या हर बरस की तरह नहीं है, लेकिन यमुनोत्री धाम के आखिरी पड़ाव जानकीचट्टी तक गुरुवार शाम तक तीर्थयात्रियों का आना जारी रहा।
यात्रियों के पहुंचने से तीर्थाटन से जुड़े स्थानीय व्यवसायियों के चेहरे पर छाई मायूसी को कुछ हद तक कम किया है। इस सबके बीच लोकसभा की चुनावी चर्चा में आपदा एक बड़ी मुद्दा दिखा जो यहां कांग्रेस की परेशानी का सबब बन सकता है।
यहां आपदा आज भी ताजा
बड़कोट से जानकीचट्टी के लगभग 42 किलोमीटर का सफर आपदा की याद को ताजा कर देता है। उस दिन आई बाढ़ के अवशेष कुछ हद तक सरकार के पुनर्निर्माण ने ढक दिए हैं।
सड़क मार्ग की देरी से शुरू हुआ पुनर्निर्माण अब भी जारी है, लेकिन जितना काम हुआ है वह बेहतर दिख रहा है।
फूलचट्टी से पहले कुछ जगह पर सड़क का पुनर्निर्माण तेजी से चल रहा है, लेकिन वाहनों की आवाजाही निरंतर बनी हुई है। मार्ग में केवल दो जगह ऐसी हैं जहां बारिश बाधा बन सकती है।
कई जगह पर निर्माण एजेंसी ने कई फीट के पुश्ते खड़े कर कंक्रीट सड़क बनाकर स्थायी समाधान निकाला है। निर्माण की धीमी शुरुआत भले ही अब रफ्तार पकड़ती दिख रही है, लेकिन उसका राजनीतिक नुकसान कांग्रेस पर भारी पड़ सकता है।
खाली पड़े हैं होटल
बड़कोट में भोजनालय चला रहे रविंद्र उनियाल ने बताया कि यात्रा से पंद्रह दिन पहले यात्रियों की भीड़ लग जाती थी। इस बार बड़कोट में होटल खाली पड़े हैं।
यमुनोत्री पहुंचने से पहले हनुमान चट्टी, फूल चट्टी में बने होटलों में बुकिंग न के बराबर है। यमुनोत्री स्थित होटल श्री यमुना आश्रम के सुभाष चंद उनियाल ने बताया अभी कोई बुकिंग नहीं आई है।
सुबह साढ़े नौ बजे जानकीचट्टी से माता की डोली पदयात्रा रवाना होगी। रोहनी, स्वाति और भद्र नक्षत्र दोपहर 12 बजे तक हैं, जिसके बाद अक्षय तृतीया नक्षत्र में 12.01 मिनट पर कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
- आशीष उनियाल, मंदिर के रावल
पुनर्निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल
बड़कोट यमुनोत्री मार्ग पर चल रहे सड़कों का पुनर्निर्माण तो तेजी से हो रहा है, लेकिन उसकी गुणवत्ता सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़कों पर चल रहे निर्माण की सामग्री बेहद घटिया है। अगर बारिश हुई तो सड़क नहीं टिकेगी। वाहनों की आमद बढ़ने के साथ पतली डामर की परत उखड़ जाएगी।
आस्था के आगे कुछ नहीं
यमुनोत्री धाम के लिए यूपी के सीतापुर से हरि ओम और गोपाल सिंह साइकिल से आए हैं। मंदिर के कपाट खुलने के समय हर बार हरिओम आते हैं वह भी साइकिल से।
हरि ओम ने बताया कि आपदा का हल्ला सब जगह मचा हुआ है, लेकिन जहां आस्था है उसके लिए कुछ भी नहीं। उनका कहना है कि यहां पहुंचने में उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई।
हरियाणा से आए नरेंद्र सिंह ने बताया कि हर बार की तरह इस बार भी यहां आएं है। इसके बाद गंगोत्री रवाना होंगे। उन्होंने कहा कि आपदा का भय नहीं है, लेकिन सड़कों की हालत को सरकार एक वर्ष में सुधार सकती थी। इससे सरकार की गंभीरता दिखती है।