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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Chardham Yatra 2026 Mock Drill to be Held on April 10 as per Ministry of Home Affairs Directives

Chardham Yatra: आपदा से निपटने के लिए शुरू की तैयारी, गृह मंत्रालय के निर्देश पर 10 अप्रैल को होगी मॉकड्रिल

Thu, 02 Apr 2026 10:13 PM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Thu, 02 Apr 2026 10:13 PM IST
सार

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में हुई बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने मॉकड्रिल के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

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Chardham Yatra 2026 Mock Drill to be Held on April 10 as per Ministry of Home Affairs Directives
चारधाम यात्रा - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने चारधाम यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में 10 अप्रैल को चारधाम यात्रा को लेकर मॉकड्रिल का आयोजन किया जाएगा।

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राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में हुई बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने मॉकड्रिल के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा चारधाम यात्रा के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन और दिशा-निर्देशन पर सभी विभागों ने अच्छी तैयारियां की हैं। आपदा प्रबंधन विभाग भी सतर्क है। उन्होंने बताया कि इस मॉकड्रिल का उद्देश्य सभी हितधारकों को एक मंच पर लाकर चारधाम यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए उनकी क्षमताओं और तैयारी को परखना एवं उनमें वृद्धि करना है।
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इस दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि संसाधनों का कुशल उपयोग व प्रबंधन हो। यह माॅकड्रिल चारधाम यात्रा से जुड़े सात जिलों उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी तथा देहरादून में होगी। मेजर जनरल सुधीर बहल ने बताया कि यह मॉकड्रिल आईआरएस यानी घटना प्रतिक्रिया प्रणाली के तहत संचालित की जाएगी।
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रिसोर्स और रिस्क मैपिंग आवश्यक : बहल
मेजर जनरल सुधीर बहल ने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान संभावित आपदाओं का प्रभावी तरीके से सामना किया जा सके व तैयारियां पुख्ता हों, इसके लिए रिसोर्स और रिस्क मैपिंग आवश्यक है। कौन से संसाधन कहां पर हैं, जोखिम वाले क्षेत्र कौन से हैं, इसकी जीआईएस मैपिंग अवश्य की जानी चाहिए ताकि किसी आपदा की स्थिति में त्वरित गति से कार्रवाई की जा सके। माॅक अभ्यास के दौरान इनका भी परीक्षण किया जाएगा।

जहां संचार व्यवस्था नहीं, वहां वैकल्पिक की जाए
 मेजर जनरल सुधीर बहल ने सुरक्षित चारधाम यात्रा के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा होटल और धर्मशालाओं की क्षमता कितनी है, इसका पूरा आकलन किया जाना आवश्यक है, ताकि यदि किसी आकस्मिक स्थिति अथवा आपदा की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर रोकना पड़े तो कोई परेशानी न हो। यात्रियों को मौसम संबंधी अलर्ट भी समय पर प्रदान करने की व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही मार्गों की स्थिति, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों तथा खतरे वाले स्थानों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए ताकि यात्री सतर्क होकर यात्रा करें। चारधाम यात्रा मार्ग में ऐसे क्षेत्र जहां संचार व्यवस्थाएं नहीं हैं, वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ताकि किसी आकस्मिक स्थिति में सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा सके। इसके लिए सेटेलाइट आधारित संचार पर भी विचार किया जाना चाहिए।

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