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ऐसा हाल रहा तो कैसी होगी चारधाम यात्रा?
हेमवती नंदन, ठाकुर नेगी/ अमर उजाला, ऋषिकेश
Updated Wed, 02 Apr 2014 11:02 AM IST
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तीर्थनगरी से चारधाम और हेमकुंड साहिब तक यात्रा मार्ग पर मौजूदा अव्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए सभी विभाग 25 अप्रैल तक का दावा कर रहे हैं।
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मगर इनमें से कइयों के पास बिजली, पेयजल, सड़क आदि के लिए पोल, पाइप और रॉ मैटीरियल नहीं है। कइयों के पास बजट की कमी है।
अब कार्य शुरू करने की बात कर रहे बात
जिन्होंने धामों के मार्गों पर यात्रा सुविधाएं जुटाने को साज-ओ-सामान जुटाया भी है, वह अब कार्य शुरू करने की बात कर रहे हैं।
ऐसे में भला महज तीन सप्ताह में किस प्रकार यात्रा मार्गों पर ध्वस्त व्यवस्थाएं चाक चौबंद हो पाएंगी, यह सवाल बरकरार है।
मंगलवार को गढ़वाल कमिश्नर की बैठक में स्वास्थ्य, ऊर्जा, जल निगम, जल संस्थान, बीआरओ, पीडब्लूडी, सुलभ आदि विभागों ने आयुक्त को यही गणित बताया।
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विभागीय अफसरों ने डायरियों, फाइलों से रटे रटाए, आंकड़े कमिश्नर साहब को सुनाए और निर्देश प्राप्त कर यात्रा तैयारियों की समीक्षा की औपचारिकता पूरी की।
महत्वपूर्ण बैठक में यात्रा मार्गों से जुड़े सभी जिलों के डीएम और एसपी/एसएसपी नदारद तो नदारद थे ही, कुछ एक को छोड़ अधिकांश विभागों के अधिनस्थ कर्मचारियों ने बैठक में शामिल होकर औपचारिकता पूरी की।
अब आ रहा रोटेशन की वैधानिकता का खयाल ऋषिकेश। 42 वर्षों से गढ़वाल मंडल के लोकल रूटों और चारधाम यात्रा संचालित कर रही निजी परिवहन कंपनियों के बेडे़ ज्वाइंट रोटेशन की वैधानिकता का खयाल सरकार और परिवहन विभाग को अब आ रहा है।
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इस दौरान आरटीओ दून ने यात्रा के दौरान बनने वाले संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति की वैधानिक मान्यता का सवाल उठाया।
बताया गया कि बीते साल सरकार ने इसके नोटिफिकेशन की कवायद शुरू की थी, मगर उक्त प्रक्रिया अभी भी ठीक से पूरी नहीं हो पाई।
सवाल है कि जिस विभाग के पास यात्रा संचालन के लिए अपना कुछ भी नहीं और दशकों से निजी परिवहन कंपनियों के बूते ही यात्रा संचालित होती रही है। ऐसे में रोटेशन को वैधानिक दर्जा देने और सहयोग की जिम्मेदारी भी सरकार और परिवहन विभाग की ही है।
मगर वह जिम्मेदारी निभाने की बजाए यात्रा संचालन में अहम भूमिका निभाने वाली कंपनियों पर ही सवाल उठा रहा है।
किसके भरोसे चलेगा बस ट्रांजिट कंपाउंड
चारधाम यात्रा शुरू होने को है, मगर तीर्थनगरी में करीब 11 करोड़ की लागत से बना बस ट्रांजिट कंपाउंड के संचालन की जिम्मेदारी किस पर होगी, यह अभी तक तय नहीं हो पाया।
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इसके लिए पर्यटन विभाग नगर पालिका पर जिम्मेदारी डाल रहा है, जबकि पालिका प्रोजेक्ट वर्क बाकी होने का हवाला देकर इससे बच रही है।
ऐसे में यदि गतवर्ष की तरह इस साल भी बीटीसी में अव्यवस्थाएं मिली तो उसके लिए जिम्मेदार कौन होगा, पता नहीं।
बायोमेट्रिक्स रजिस्ट्रेशन की हकीकत
आपदा के बाद से पर्यटन विभाग यात्राकाल में जिस बायोमेट्रिक्ट रजिस्ट्रेशन व्यवस्था को लागू करने का दावा कर रहा है, विभाग द्वारा संबंधित एजेंसी को बीते 28 मार्च को उसका वर्क ऑर्डर दिया गया।
एजेंसी ने इसका कार्य छह अप्रैल से शुरू करने और 20 तक पूरा कराने का दावा किया है।
जिस पर मैनुअल पंजीकरण निशुल्क और ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन पर 50 रुपए शुल्क लेने की बात कही गई है। इस साल सिस्टम के सही तरह से संचालित होने के बाबत अभी भी संशय बना हुआ है ।
यात्रियों का बीमा, तस्वीर साफ नहीं
टूरिज्म डिपार्टमेंट यात्रा में श्रद्धालुओं के इंश्योरेंस के लिए तीन साल में शासन को दो प्रस्ताव भेज चुका है, मगर इसे अभी भी मंजूरी नहीं मिल पाई।
जबकि बीमे की राशि में सरकार को धेला भी खर्च नहीं करना है। फिर भी यात्रियों से वसूल की जाने वाली बीमा प्रीमियम राशि पर भी सहमति देने की सरकार जहमत नहीं उठा रही।