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देखिए कैसे जर्जर पुलों पर हो रही चार धाम यात्रा?
ब्यूरो / अमर उजाला, नई टिहरी/घनसाली
Updated Mon, 20 Feb 2017 01:55 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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घनसाली क्षेत्र में गंगोत्री-केदारनाथ नेशनल हाईवे पर करीब आधा दर्जन पुल जर्जर स्थिति में हैं। यहां आपदा की भेंट चढ़े पुलों का निर्माण भी नहीं हो पाया है, ऐसे में चार धाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को जोखिम भरा सफर तय करना पड़ रहा है।
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एनएच पर घनसाली स्थित हनुमान मंदिर के समीप बना पुल, भैंसवाड़ा ब्रिज, सुमार्थ, सांकरी ब्रिज व पिलखी के पास गडबाणा गदेरे पर बने पुलों की स्थिति जर्जर बनी है। कई पुलों पर लोहे की प्लेट व पिलरों के सपोर्ट से जैसे तैसे यातायात संचालित किया जा रहा है, जो कि कभी भी हादसे का सबब बन सकते हैं, कोई भी इनकी सुध नहीं ले रहा है।
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यही स्थिति क्षेत्र के कोटी-अखोड़ी मोटर मार्ग पर गबणी ब्रिज की है। हाईवे पर घनसाली के पास गिरगांव गदेरे व चमियाला के समीप श्रीकोट गदेरे का पुल बीते साल आपदा के दौरान बह गए थे, जो अभी तक नहीं बन पाए हैं। पीडब्लूडी ने इन दोनों पुलों के नवनिर्माण का कार्य शुरू भी कराया, मगर बजट नहीं मिलने से इनका कार्य महीनों से ठप पड़ा है।
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पीडब्लूडी घनसाली डिवीजन के अधिशासी अभियंता का कहना है कि आपदा के समय क्षतिग्रस्त पुलों के बदले नये पुल स्वीकृत हो गए हैं, मगर धन का आवंटन नहीं हो पाया है। जर्जर पुलों का आगणन भी शासन को भेजा जा चुका है, मगर मंजूरी नहीं मिल पाई है।
तीन साल में नहीं बनी पुलिया
जौनपुर ब्लाक के बिमल की तलौटी में 2013 में आई आपदा के समय अगलाड़ नदी पर बनी पुलिया बह गई थी। साढ़े तीन साल बाद भी पुलिया के नहीं बनने से यहां प्राथमिक विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके अलावा क्यारी, ख्यार्सी, सौड़ी, परोड़ी, लगड़ासू, भूमिया समेत आधा दर्जन गांवों के लोग इस पुलिया से आवाजाही करते थे। छनाण गांव के प्रधान दिनेश रावत, महिपाल रावत, वीरेंद्र राणा, जयेंद्र रावत ने पुलिया निर्माण की मांग की है। पीडब्लूडी थत्यूड़ के ईई अनिरुद्ध भंडारी का कहना है कि क्षतिग्रस्त पुलिया के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। मंजूरी मिलने पर निर्माण कार्य किया जाएगा।
उधर चंबा ब्लाक के पुजाल्डी गांव के लोग हेंवल नदी पर कैण्यूं नामे तोक में वर्षों से पुल निर्माण की मांग उठा रहे हैं। यहां भी बरसात के दिनों में नदी में उफान आने से ग्रामीणों व स्कूली बच्चों को जोखिम उठाना पड़ता है। नकदी फसलें भी सड़क तक नहीं पहुंच पाने से बेकार हो जाती है। नदी पर पुल बनने से पुजाल्डी के साथ ही स्वाड़ी गांव के बाण्यूं तोक के ग्रामीणों को भी आवागमन की सुविधा मिलनी थी। ग्राम प्रधान अंजू देवी, पूर्व प्रधान रमेश लेखवार का कहना है कि मांग पर सुनवाई नहीं हो रही है।