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अब सर्दियों में भी कीजिए चारधाम यात्रा

Wed, 15 Oct 2014 02:46 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 15 Oct 2014 02:46 PM IST
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char dham yatra in winter.

शीतकालीन चार धाम यात्रा के लिए तीर्थ पुरोहित और अन्य संबंधित पक्षों ने मंगलवार को सहमति दे दी। मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में बीजापुर अतिथि गृह में देर रात हुई इस बैठक में सरकार के इस कदम को क्षेत्र के लिए संजीवनी बताया गया।

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योजना के मुताबिक चार धामों के कपाट बंद होने के बाद डोलियों के शीतकालीन स्थान तक यात्रा को जारी रखा जाएगा। इस तरह पांडुकेश्वर, ऊखीमठ, खरसाली और मुखबा सर्दियों के चार धाम तीर्थ होंगे।
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चार धाम यात्रा पूरी तरह से धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और चारों धामों के कपाट खुलने से लेकर बंद होने तक का समय नियत है। ऐसे में कपाट खुलने के बाद प्रदेश में चार धाम यात्रा केवल छह माह तक सीमित रह जाती है।

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तीर्थ-पुरोहित, मंदिर समिति ने दी सहमति

char dham yatra in winter.

कपाट बंद होने के बाद बदरीनाथ की डोली पांडुकेश्वर, केदार की डोली ऊखीमठ, यमुनौत्री की डोली खरसाली और गंगोत्री की डोली मुखबा पहुंच जाती है। इन स्थानों पर बाकायदा पूजा अर्चना जारी रहती है।

अब इन्ही स्थानों को शीतकालीन यात्रा का धार्मिक केंद्र बनाए जाने की योजना है। मंगलवार को तीर्थ-पुरोहित, मंदिर समिति और अन्य संबंधित पक्षों ने सरकार की इस योजना पर सहमति दे दी।

इन लोगों का कहना था कि इससे किसी धार्मिक मान्यता का अतिक्रमण नहीं हो रहा है। इसके उलट ये केंद्र लोगों की आजीविका का साधन बन पाएंगे। शुरू की छह माह की यात्रा पहले की तरह ही जारी रहेगी।

पहले भी होती रही है कोशिश
चार धाम यात्रा को शीतकाल में जारी रखने की पहले भी कोशिश होती रही है। एनडी तिवारी के कार्यकाल में बाकायदा चारो धामों के कपाट साल भर खुले रखने की योजना बनी थी।

फैलेगा सुरक्षित उत्तराखंड का संदेश

char dham yatra in winter.

उस समय बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष रहे विनोद नौटियाल ने बाकायदा इस पर इस्तीफा तक दे दिया था। मंदिर समिति के रुख के बाद यह योजना डंप कर दी गई।

अब विनोद नौटियाल का कहना है कि शीतकालीन केंद्रों पर यात्रा जारी रखना बेहतर कदम है। कपाट खुले रखने पर धार्मिक मान्यताओं का अतिक्रमण होता। पर इस योजना से क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी।

चारधाम यात्रा की व्यवस्था पर बड़ा निवेश होता है। कपाट बंद होने के बाद इसका उपयोग नहीं होता है। शीतकालीन प्रवास केन्द्रों पर यात्रा शुरू करने से इसका उपयोग संभव होगा। शीतकाल में आपदा कम आती है तथा पहाड़ों में मैदानों की अपेक्षा अच्छी धूप रहती है। पर्यटन विभाग को प्रचार अभियान की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दे दिए गये हैं। इससे सुरक्षित उत्तराखंड का संदेश भी जाएगा।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री

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