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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Char dham yatra 2021: Now people of Panchgai will lift Kedarnath doli After 57 years

57 वर्ष बाद: अब पंचगाईं के लोग उठाएंगे बाबा केदार की डोली, अभी तक रांसी गांव के लोग निभा रहे थे जिम्मेदारी

Sun, 07 Nov 2021 01:02 PM IST
अलका त्यागी विनोद नौटियाल, अमर उजाला, ऊखीमठ
विनोद नौटियाल, अमर उजाला, ऊखीमठ Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 07 Nov 2021 01:02 PM IST
सार

बाबा केदार के धाम के कपाट बंद होने के बाद दस्तूरदारों ने विधि-विधान से डोली को अपने कांधों पर विराजमान किया। डोली पहले पड़ाव रामपुर में पहुंच चुकी है।

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Char dham yatra 2021: Now people of Panchgai will lift Kedarnath doli After 57 years
बाबा केदार की डोली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

57 वर्षों के बाद भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल उत्सव विग्रह डोली पंचगाईं के हक-हकूकधारियों के कंधों पर पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी। पंचगाईं से चयनित दस्तूरदार अब नियमित रूप से आगामी वर्षों में भी बाबा की सेवा करते रहेंगे। बीते वर्ष तक बाबा केदार की चल उत्सव विग्रह डोली को धाम पहुंचाने व शीतकालीन गद्दीस्थल तक वापस लाने जिम्मेदारी रांसी के ग्रामीण निभा रहे थे। 

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पंचगाईं डंगवाड़ी, भटवाड़ी, चुन्नी-मंगोली, पठाली-डुंगर-सेमला और किमाणा-पेंज के हक-हकूकधारी बाबा केदार की चल उत्सव विग्रह डोली को केदारनाथ से शीतकालीन गद्दीस्थल ला रहे हैं। बीते शुक्रवार को ही पंचगाईं से चयनित 12 सदस्यीय दस्तूरदार केदारनाथ पहुंच गए थे।
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शनिवार को बाबा केदार के धाम के कपाट बंद होने के बाद दस्तूरदारों ने विधि-विधान से डोली को अपने कांधों पर विराजमान किया। डोली पहले पड़ाव रामपुर में पहुंच चुकी है। सोमवार को डोली शीतकालीन गद्दीस्थल में विराजमान होगी। पंचगाईं हक-हकूकधारी संघर्ष समिति के अध्यक्ष रघुवीर सिंह पुष्पवाण व पूर्व ब्लॉक प्रमुख व दस्तूरदार लक्ष्मी प्रसाद भट्ट ने बताया कि वर्ष 1964 से पहले पंचगाईं के हक-हकूकधारी ही बाबा केदार की डोली को शीतकालीन गद्दीस्थल से केदारनाथ पहुंचाते थे व वापस लाते थे।

बीते दशकों में हक-हकूकधारियों ने इस कार्य को लेकर असमर्थता जताई थी। इस पर तत्कालीन श्रीबदरी-केदार मंदिर समिति ने नई व्यवस्था के तहत कुणजेठी व रांसी गांव के हक-हकूकधारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी थी। अब पंचगाईं के लोगों ने इस जिम्मेदारी को उठाने के लिए देवस्थानम बोर्ड को पत्र सौंपा था। उधर, रांसी के हक-हकूकधारियों ने देवस्थानम बोर्ड पर बिना सूचना व विश्वास में लिए बगैर हक छीनने का आरोप लगाया है।

पहले कंडी पर जाता था बाबा केदार का प्रतीक

वर्ष 1963 तक पंचगाईं के समाल्या और भंडारी बाबा केदार के प्रतीक चिन्ह को कंडी में विराजमान कर कपाट खुलने पर केदारनाथ पहुंचाते थे। साथ ही कपाट बंद होने पर शीतकालीन गद्दीस्थल लाते थे। वर्ष 1964 में बिड़ला ग्रुप ने मंदिर समिति को भगवान केदारनाथ के प्रतीक के लिए डोली भेंट की थी।

लेकिन इसी वर्ष पंचगाईं के हक-हकूकधारियों ने डोली को धाम ले जाने में असमर्थता जता दी थी। इसके बाद वर्ष 1964 से 1978 तक कालीमठ घाटी के कुणजेठी के ग्रामीणों ने डोली को धाम तक पहुंचाने व वापस लाने की जिम्मेदारी निभाई। वहीं, वर्ष 1979 से 2020 तक इस परंपरा का निर्वहन रांसी गांव के हक-हकूकधारियों ने किया।

पंचगाईं के लोगों के द्वारा बाबा केदार की डोली को धाम पहुंचाने व वापस लाने से संबंधित अपने हक-हकूकों को लेकर एक पत्र दिया गया था। इसका संज्ञान लेकर उन्हें यह अनुमति दी गई है।
- बीडी सिंह, अपर कार्यधिकारी देवस्थानम बोर्ड।

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