कपाट खुलने के बाद भी केदारनाथ धाम में सन्नाटा, लेकिन आकार लेने लगा है पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट
- आदिगुरुशंकराचार्य की समाधि का निर्माण फिर हुआ शुरू
- साढ़े चार माह पहले बर्फबारी की वजह से हुआ था बंद
- राफ्ट के ऊपर बनाया जा रहा है सरिये का जाल
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भगवान केदारनाथ के कपाटोद्घाटन को 15 दिन हो चुके हैं। लेकिन लॉकडाउन की वजह से धाम में एक भी आम श्रद्धालु नहीं पहुंचने से यहां सन्नाटा पसरा हुआ है। लेकिन इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट आकार लेने लगा है। मंदिर के पीछे आदिगुरु शंकराचार्य के समाधि स्थल का निर्माण कार्य साढ़े चार माह बाद फिर शुरू कर दिया गया है। गरुड़चट्टी को मंदिर से जोडऩे के लिए मंदाकिनी नदी पर पुल निर्माण समेत बाकी कार्य भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
कार्यदायी संस्था वुड स्टोन आदिगुरु शंकराचार्य के समाधि स्थल के राफ्ट पर थ्री राउंड आरसीसी दीवार के लिए सरिये का जाल खड़ा कर रही है। इसके अलावा तीर्थ पुरोहितों के आवासीय भवनों के निर्माण के साथ ही सरस्वती नदी पर घाट का कार्य पूरा किया जा रहा है। केदारनाथ मंदिर के पीछे बाई तरफ दिव्य शिला के निकट आदिगुरु शंकराचार्य के समाधि स्थल का पुनर्निर्माण अक्तूबर, 2018 में शुरू किया गया था। छह मीटर गहराई और 36 मीटर गोलाकार खुदाई कर लगभग एक साल में समाधि की बुनियाद (राफ्ट) का कार्य पूरा किया गया।
लेकिन बीते साल 12-13 दिसंबर को धाम में भारी बर्फबारी के बाद पुनर्निर्माण कार्य ठप हो गए थे। करीब तीन साल पहले 20 अक्तूबर, 2017 को प्रधानमंत्री मोदी ने धाम में 700 करोड़ की पांच योजनाओं के पुनर्निर्माण का शिलान्यास किया था। इन्हीं में शंकराचार्य समाधि स्थल भी शामिल है। उन्होंने इसे दिव्य और भव्य बनाने की बात कही थी। 7 नवंबर, 2018 को पुन: केदारनाथ पहुंचे प्रधानमंत्री ने पुनर्निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया था।
केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्यों के लिए सभी कार्यदायी संस्थाओं को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। जो कार्य इस साल कपाटोद्घाटन तक पूरे होने थे, उन्हें अब जल्द पूरा करने को कहा गया है।
-मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग
आदिगुरु शंकराचार्य के समाधि स्थल का पुनर्निर्माण फिर से शुरू किया गया है। इन कार्यों में सौ मजदूर लगे हैं।
-देवेंद्र सिंह बिष्ट, टीम प्रभारी वुड स्टोन कंस्ट्रक्शन कंपनी, केदारनाथ
बीते वर्ष पहले पखवाड़े में धाम पहुंचे थे सवा लाख श्रद्घालु
बीते वर्ष यात्रा के इतने दिनों में एक लाख 20 हजार श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके थे। कोरोना से बचाव के लिए जारी लॉकडाउन के कारण यात्रा का संचालन ठप होने से केदारनाथ में सन्नाटा पसरा हुआ है।
कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए देश में बीते 25 मार्च से लॉकडाउन चल रहा है, जिस कारण इस वर्ष चारधाम यात्रा व्यापक रूप से प्रभावित हुई है। गंगोत्री, यमुनोत्री व केदारनाथ धाम में कपाट खुलने बाद से सिर्फ धार्मिक परंपराओं का निर्वहन हो रहा है। यहां, पुजारी व मंदिर से जुड़े सीमित कर्मचारियों के अलावा कोई नहीं है। धामों में आम श्रद्धालुओं के आवागमन पर रोक लगी है, जिस कारण, यहां सन्नाटा पसरा हुआ है।
अब, बाबा के भक्तों को 18 मई से शुरू हो रहे लॉकडाउन-4 को लेकर उम्मीद हैं कि शायद प्रदेश सरकार स्थानीय स्तर पर धाम की यात्रा की अनुमति मिल जाए। केदारनाथ के कपाट 29 अप्रैल को खोले गए थे। लेकिन अभी तक यहां एक भी दर्शनार्थी नहीं पहुंचा है।
कपाटोद्घाटन के बाद से मंदिर में सिर्फ मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग, दो वेदपाठी, सेवाकार व सभालिया ही प्रवेश कर रहे हैं। मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग ने बताया कि सुबह पांच बजे बाबा केदार को बाल भोग लगाया जा रहा है। दोपहर 12 बजे भोग, सांय 6 बजे पूजा-अर्चना और 7 बजे सांयकालीन आरती हो रही है। धाम में सभी धार्मिक परंरपराओं का निर्वहन हो रहा है। सिर्फ भक्तों का इंतजार है।