{"_id":"694156bbfe1c8405fa04b14c","slug":"changing-the-name-of-mnrega-will-not-end-poverty-arya-dehradun-news-c-5-drn1043-857578-2025-12-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनरेगा का नाम बदलने से खत्म नहीं होगी गरीबी : आर्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनरेगा का नाम बदलने से खत्म नहीं होगी गरीबी : आर्य
विज्ञापन
- बोले, गरीबों व कामगारों का हक छीनने नहीं देगी कांग्रेस
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) का नाम बदलने से गांवों में गरीबी व बेरोजगारी खत्म नहीं होगी। केंद्र सरकार ने योजना का नाम बदलने के साथ कई परिवर्तन किए हैं, जो चिंताजनक हैं।
आर्य ने कहा, मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी जी राम जी किया गया। मनरेगा से सिर्फ महात्मा गांधी का नाम हटाने के साथ ही कई परिवर्तन किए गए। पहले इस योजना में केंद्र सरकार का अंशदान 90 प्रतिशत और 10 प्रतिशत अंशदान राज्य सरकार का था। लेकिन अब सिर्फ 60 प्रतिशत अंशदान केंद्र का होगा और 40 प्रतिशत अंशदान राज्य सरकार का होगा।
आर्य ने कहा, मनरेगा में मांग पर आधारित पर श्रमिकों को काम मिलता था। नई योजना में श्रमिकों को मांग के आधार पर काम नहीं मिलेगा। मनरेगा में काम ग्राम सभाओं और पंचायतों के जरिये होता था, जो स्थानीय जरूरतों के आधार पर काम की योजना बनाती थीं। इससे लोकतंत्र की पहली कड़ी पंचायतों को और भी मजबूती मिलती थी। नई स्कीम में जीआईएस उपकरण, पीएम गति शक्ति और केंद्र के डिजिटल नेटवर्क अनिवार्य हैं। स्थानीय प्राथमिकताएं अब विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक से फिल्टर होंगी। इसमें बायोमेट्रिक्स, जियो-टैगिंग, डैशबोर्ड और ऑडिट जरूरी है। उन्होंने कहा, विकसित भारत का सपना दिखाकर देश व प्रदेश की जनता को मूर्ख बनाया जा रहा है। कांग्रेस मनरेगा का नाम बदलने का कड़ा विरोध कर गरीबों, मजदूरों का हक छीनने नहीं देगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) का नाम बदलने से गांवों में गरीबी व बेरोजगारी खत्म नहीं होगी। केंद्र सरकार ने योजना का नाम बदलने के साथ कई परिवर्तन किए हैं, जो चिंताजनक हैं।
आर्य ने कहा, मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी जी राम जी किया गया। मनरेगा से सिर्फ महात्मा गांधी का नाम हटाने के साथ ही कई परिवर्तन किए गए। पहले इस योजना में केंद्र सरकार का अंशदान 90 प्रतिशत और 10 प्रतिशत अंशदान राज्य सरकार का था। लेकिन अब सिर्फ 60 प्रतिशत अंशदान केंद्र का होगा और 40 प्रतिशत अंशदान राज्य सरकार का होगा।
विज्ञापन
आर्य ने कहा, मनरेगा में मांग पर आधारित पर श्रमिकों को काम मिलता था। नई योजना में श्रमिकों को मांग के आधार पर काम नहीं मिलेगा। मनरेगा में काम ग्राम सभाओं और पंचायतों के जरिये होता था, जो स्थानीय जरूरतों के आधार पर काम की योजना बनाती थीं। इससे लोकतंत्र की पहली कड़ी पंचायतों को और भी मजबूती मिलती थी। नई स्कीम में जीआईएस उपकरण, पीएम गति शक्ति और केंद्र के डिजिटल नेटवर्क अनिवार्य हैं। स्थानीय प्राथमिकताएं अब विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक से फिल्टर होंगी। इसमें बायोमेट्रिक्स, जियो-टैगिंग, डैशबोर्ड और ऑडिट जरूरी है। उन्होंने कहा, विकसित भारत का सपना दिखाकर देश व प्रदेश की जनता को मूर्ख बनाया जा रहा है। कांग्रेस मनरेगा का नाम बदलने का कड़ा विरोध कर गरीबों, मजदूरों का हक छीनने नहीं देगी।
विज्ञापन