उत्तराखंड कैबिनेट में फेरबदल की तैयारी, हाईकमान में मिलेंगे CM
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उत्तराखंड में हरीश रावत मंत्रिमंडल में फेरबदल के साथ दो खाली स्थान भरने की तैयारी हो रही है। मंत्रिमंडल में होने वाले बदलाव को लेकर हरीश रावत मंगलवार को दिल्ली में शीर्ष नेताओं से चर्चा करेंगे। उनकी मुलाकात कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी से होनी है। 2017 के चुनावी समीकरण के साथ पार्टी में वरिष्ठ विधायकों की लंबी फौज दो खाली जगहों को भरने में रावत के लिए बड़ी चुनौती है।
हरीश रावत लंबे समय से दबाव के बावजूद कैबिनेट में विस्तार और विभागों में फेरबदल को टालते आ रहे हैं। अब एक बार फिर से वरिष्ठ विधायकों का दबाव मंत्रिमंडल में शामिल करने को लेकर है। इसी सिलसिले में सीएम कांग्रेस नेतृत्व से मिलकर इसका समाधान निकाल लेना चाहते हैं। मंत्रिमंडल के अलावा प्रदेश में मुख्य सूचना आयुक्त और दो सूचना आयुक्तों के रिक्त पदों को भरने पर भी चर्चा संभव है। लोकायुक्त को लेकर भी फैसला होना है लेकिन अभी तक फाइल राजभवन में है।
दरअसल सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद करीब दो साल से एक मंत्री पद खाली है। जबकि दूसरा पद इस साल मार्च से हरक सिंह रावत के पार्टी छोड़ने के बाद से खाली है। पहले भी रावत को एक पद भरने में दिक्कतें थीं अब दो खाली पद भरना भी मुश्किल का काम है।
मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने का भी दबाव
सुरेंद्र राकेश हरिद्वार जिले से मंत्री थे। राज्य में हरिद्वार जिले में सर्वाधिक 11 विधानसभाएं हैं। सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद से ही हरिद्वार से मंत्री बनाने की मांग उठती रही है। मंत्रिमंडल में किसी मुस्लिम नेता के न होने से एक खेमा मुस्लिम मंत्री की मांग कर रहा है। कांग्रेस के पास एक मात्र मुस्लिम विधायक के तौर पर फुरकान अहमद हैं। पार्टी का एक खेमा मानता है कि इसका लाभ राज्य की 17 मुस्लिम मतदाताओं से जुड़ी विधानसभाओं पर मिलेगा।
मंत्रिमंडल में दोनों खाली हुई सीटें गढ़वाल से हैं लिहाजा उसे वहीं से भरे जाने का दबाव है। जबकि कभी सीएम के खास रहे कुमाऊं के मयूख महर लंबे समय से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। नाराज मयूख ने योजना आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने के बावजूद पदभार ग्रहण नहीं किया। वहीं सतपाल महाराज के करीबी रहे अनुसुइया प्रसाद मैखुरी, जीतराम, राजेंद्र भंडारी और गणेश गोदियाल पार्टी के प्रति वफादारी का इनाम चाहते हैं।