यहां चुनौतियों के चक्र में फंसी है कांग्रेस और BJP
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वैसे तो हर चुनाव का मकसद और मुद्दा भिन्न होता हैं लेकिन फिर भी भविष्य के चुनाव परिणाम को पुराने चुनाव के प्रदर्शन की कसौटी पर परखा जाता है।
पढ़ें, यह किला सुनाता है अंग्रेजों के जुल्म की दास्तां
उत्तराखंड में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। लोकसभा चुनाव 2009 में कांग्रेस को भाजपा दस प्रतिशत वोट ज्यादा मिले।
लेकिन विधानसभा चुनाव में परिस्थितियां बदली और एक विधायक से सरकार बनाने वाली कांग्रेस को मिले वोट भाजपा से एक प्रतिशत भी ज्यादा नहीं थे।
पढ़ें, यहां 50 प्रतिशत मतदाता भी नहीं करते मतदान
इसलिए यह चुनाव भाजपा के सीटिंग विधायकों का रिपोर्ट कार्ड भी होगा। हरिद्वार संसदीय सीट पर हरीश का लोकसभा चुनाव 2009 का जादू विधानसभा चुनाव 2012 में नहीं चल सका।
हरिद्वार में भाजपा ने जीती थीं सर्वाधिक सीटें
हरिद्वार संसदीय क्षेत्र में हरिद्वार शहर, लक्सर, हरिद्वार ग्रामीण, ज्वालापुर, रानीपुर, ऋषिकेश, डोईवाला समेत भाजपा ने सर्वाधिक 07 सीटें जीती। और कांग्रेस 04 व बसपा तीन पर सिमट गई।
पढ़ें, सीएम के इलाके में चेलों के लिए गुरु नहीं
अब चूंकि यह सीट मुख्यमंत्री से सीधे तौर पर जुड़ी है और भाजपा के विधायकों पर दबाव रहेगी कि वह विधानसभा वाले प्रदर्शन को लोकसभा में भी जारी रखे।
नैनीताल संसदीय सीट भी भाजपा विधायकों का इम्तिहान लेगी। क्योंकि इस लोकसभा सीट 14 विधानसभा सीटों में से 09 पर भाजपा जीती थी।
पढ़ें, ‘फरार’ शिक्षामंत्री के पास बचे सिर्फ दो दिन
इसलिए यहां भी यदि भाजपा पिछड़ी तो पार्टी विधायकों के कद में भी छंटनी होगी। ऐसे में इस सीट से भाजपा को अपने पूर्व मुख्यमंत्री व भारी भरकम नेता भगत सिंह कोश्यारी को उताना और भी दिलचस्प है।
यदि फिर भी भाजपा पिछड़ी तो फिर विधायकों का कामकाज का आकलन होना भी लाजिमी है। पौड़ी संसदीय सीट पर भाजपा को जबरदस्त फील्डवर्क करने की जरूरत है।
यहां रहा कांग्रेस का दबदबा
यहां पर कुल 14 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस का दस सीटों पर कब्जा है। और, भाजपा के पास केवल तीन सीटें लैंसडोन, चौबट्टाखाल व यमकेश्वर ही है।
पढ़ें, मंत्रियों संग धर्मगुरु दलाईलामा भी हैं इनके बकाएदार
एक सीट लालकुआं निर्दलीय के पास है। इस सीट पर भी भाजपा ने बीसी खंडूड़ी जैसे हैवीवेट नेता को उतारा है लेकिन नए परिसीमन केबाद खंडूड़ी इस सीट से पहली बार मैदान में है।
यह वह पुरानी पौड़ी सीट नहीं है जहां से खंडूड़ी कई बार जीते। इसमें अब नैनीताल जिले की रामनगर सीट शामिल है जहां पर चालीस हजार से ज्यादा मुसलिम मतदाता है।
मामूली अंतर से हारे थे पिछला चुनाव
अल्मोड़ा संसदीय सीट भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां से पार्टी प्रत्याशी अजय टम्टा पिछला चुनाव मामूली अंतर से हारे थे। विधानसभा सीटों के गणित के लिहाज से अभी आठ सीट कांग्रेस व छह भाजपा के पास हैं।
इस सीट पर हरीश रावत भी पूरी ताकत झोकेंगे। क्योंकि यह उनकी पुश्तैनी सीट है। उधर, भाजपा केबची सिंह रावत, बिशन सिंह चुफाल, प्रकाश पंत जैसे दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है।
पढ़ें, यह किला सुनाता है अंग्रेजों के जुल्म की दास्तां
टिहरी संसदीय सीट पर संसदीय सीट 2013 केउप-चुनाव के बाद भाजपा के कब्जे में आ गई थी। वैसे भी इस संसदीय सीट पर भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती सीटिंग एमपी की सीट बचाना ही है।
इस संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस व भाजपा के कब्जे में छह छह विधानसभा सीटें हैं। एक यूकेडी और एक निर्दलीय है।
पढ़ें, यहां 50 प्रतिशत मतदाता भी नहीं करते मतदान
मगर जिस तरह से कांग्रेस पिछले उप-चुनाव में पहाड़ से जीत का सफर तय करते हुए देहरादून महानगर में परास्त हो गई थी उस स्थिति को बरकरार रखना भी भाजपा के लिए चुनौती होगा।
यूएसनगर की सितारगंज सीट से भाजपा विधायक किरण मंडल के इस्तीफा देने केबाद तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा उप-चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
विधानसभा चुनाव 2012 में लोकसभावार प्रदर्शन
सीट - कांग्रेस - भाजपा - बसपा - यूकेडी - निर्दलीय
हरिद्वार - 04 - 07 - 03 - 00 - 00
टिहरी - 06 - 06 - 00 - 01 - 01
पौड़ी - 10 - 03 - 00 - 00 - 01
अल्मोड़ा - 08 - 06 - 00 - 00 - 00
नैनीताल - 04 - 09 - 00 - 00 - 01