उत्तराखंडः भाजपा राज में करोड़ों का घोटाला, CBI जांच पर केंद्र की ना!
भाजपा की सरकार में हुआ था घपला, केंद्र ने नहीं दी सीबीआई जांच की अनुमति
वर्ष 2008-09 में भाजपा शासनकाल में 11.5 करोड़ की हुई थी दवा खरीद
सूचना आयोग की सिफारिश पर सीबीआई जांच की जारी हुई अधिसूचना
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राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत वर्ष 2008-09 में दवाओं की खरीद मामले के दोषियों के खिलाफ सीबीआई मुकदमा दर्ज नहीं कर पा रही है। सीबीआई के पास तमाम दस्तावेज के साथ संबंधित विभाग की शिकायत है, लेकिन मुकदमा दर्ज करने की अनुमति केंद्र से नहीं मिल रही।
यह घोटाला भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुआ था और इस समय केंद्र में भी भाजपा सरकार है। जब तक केंद्र नोटिफिकेशन जारी नहीं करेगा तब तक सीबीआई आरोपियों तक नहीं पहुंच सकती। गौरतलब है कि राज्य सूचना आयुक्त अनिल शर्मा की सिफारिश पर राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति की थी।
रिप्रोडेक्टिव चाइल्ड केयर (आरसीएच) के तहत वर्ष 2008-09 में 14.7 करोड़ रुपये का बजट मिशन के तहत स्वीकृत हुआ था। इसमें लगभग साढ़े ग्यारह करोड़ रुपये की दवा खरीद हुई थी। खरीदी गई दवाएं सभी जनपदों में बांटी जानी थी, लेकिन रुड़की ड्रग वेयर हाउस में 22 लाख रुपये की एक्सपायर्ड दवाओं की खेप मिली थी।
शासन व विभाग स्तर पर कई बार हो चुकी जांच
इस मामले में अब तक शासन व विभाग स्तर पर कई बार जांच हो चुकी है। एक्सपायर दवा खरीद पर सूचना के अधिकार में जानकारी नहीं मिलने पर वर्ष 2012 में एक अपील सूचना आयोग में हुई। आयुक्त अनिल शर्मा ने दिसंबर 2013 को विभाग के जबाव से असंतुष्ट होकर मुख्य सचिव को सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी।
सिफारिश के बाद जमकर हंगामा भी हुआ। अप्रैल 2014 में प्रदेश सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। सीबीआई की जो टीम उत्तर प्रदेश एनआरएचएम की जांच कर कई अधिकारियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है उसी के अधीन यह जांच होनी है।
प्रकरण में अब तक हुई कार्रवाई
मामले में शासन स्तर से अपर सचिव वित्त एलएम पंत की जांच में लाखों की दवाएं एक्सपायर होने के लिए सिर्फ प्रक्रियात्मक खामियों की रिपोर्ट दी गई। इसके बाद अप्रैल 2013 में तत्कालीन एनआरएचएम निदेशक स्वास्थ्य पीयूष सिंह ने जांच में तत्कालीन संयुक्त निदेशक (आरसीएच) सहित पांच सीएमओ सहित दर्जन भर अन्य कर्मचारियों के खिलाफ 1.21 करोड़ की अनियमितता का दोषी पाया।