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आग बुझाने के लिए केंद्र ने नहीं दिए पांच करोड़
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 14 May 2016 05:09 AM IST
सार
- अभी जंगल आग से पूरी तरह सुरक्षित नहीं
- लैंसडाउन और कोटद्वार में अभी है आग
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उत्तराखंड में जंगल की आग ने भयावह रूप धर लिया था।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
जंगलों की आग बुझाने के लिए केंद्र सरकार ने पांच करोड़ रुपये देने का वादा किया था, लेकिन पैसा अभी तक नहीं मिला। राष्ट्रपति शासन लगने के बाद अधिकारिक तौर पर पहली बार विभागीय अफसरों के साथ बैठक कर वन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने यह बात बताई। उन्होंने बताया कि जंगल की आग अभी पूरी तरह बुझी नहीं है। कोटद्वार और लैंसडाउन क्षेत्र में बारिश न होने से आग की घटनाएं हो रही हैं।
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वन मंत्री अग्रवाल ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा कि पूरे देश ने प्रदेश में जंगलों की आग पर चिंता जताई, लेकिन केंद्र ने ग्रीन बोनस के लिए कुछ नहीं किया। पत्रकारों से कहा कि मार्च-अप्रैल में सरकार न होने से जंगल की आग रोकने के लिए पैसा रिलीज नहीं हो पाया। इस वजह से और दिक्कत बढ़ गई। सिर्फ कैंप और कंटीजेंसी मद से ही पैसा दिया गया। आग को रोकने के लिए विस्तृत योजना बनाए जाने की जरूरत है। उन्होंने किसी व्यक्ति के जंगल में आग लगाने वाली बात से इनकार किया।
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योजनाओं के संबंध में ली जानकारी
बैठक के दौरान अफसरों ने लोगों के आग लगाने की बात कही थी, जिसकी जांच भी की जा रही है, लेकिन वन मंत्री ने अनसुनी कर दी। वन मंत्री ने फ्लैगशिप योजनाओं के संबंध में जानकारी ली। चौड़ी पत्ती वाले पेड़ों का पौधारोपण, चारागाह विकास और जल संवर्धन योजना पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि चीड़ के जंगलों में फायर लाइन काटने, नई फायर लाइन बनाने के लिए बजट की जरूरत है। वन पंचायतों के माध्यम से आग को रोकने के लिए कार्य किया जाएगा। यह आकलन किया जा रहा है कि आग से वनस्पतियों, जड़ी-बूटियों और वन्य जीवों को कितना नुकसान हुआ है।
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लीसा बिकेगा ऑन लाइन
वन मंत्री ने बताया कि विभाग के पास सौ करोड़ का लीसा पड़ा हुआ है। डिपो में बिक्री के साथ अब इसे ऑनलाइन भी बेचा जाएगा। लीसा को ऑनलाइन बेचने की प्रक्रि या शुरू हो गई है। लीसा चीड़ के दरख्तों से निकलता है।
पोर्टल लांच किया
वन मंत्री ने शुक्रवार को वन विभाग के राजकीय कर्मचारियों के सेवा अभिलेख व प्रशासनिक प्रबंधन के लिए ई-एचआरएमएस पोर्टल जारी किया। इस तरह पेड़ काटने की ऑनलाइन अनुमति लेने की भी व्यवस्था कर दी गई है। फाइलों पर तेजी से काम हो, इसके लिए ई-डिस्पैच की व्यवस्था कर दी गई है। उत्तराखंड भुवन पोर्टल के माध्यम से जंगल की आग, भूस्खलन आदि की मॉनीटरिंग की जा रही है।