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उत्तराखंड के राज्यपाल पर केंद्र का बड़ा आरोप

Wed, 15 Oct 2014 05:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली, देहरादून Updated Wed, 15 Oct 2014 05:53 PM IST
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center blame governor kureshi in supreme court.

केंद्र की मोदी सरकार ने उत्तराखंड के राज्यपाल अजीज कुरैशी पर पद की गरिमा से खिलवाड़ करने और संवैधानिक पद की कद्र नहीं करने का आरोप लगाया है। केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी ने संवैधानिक पद की मर्यादा के अनुरूप व्यवहार न करने पर कुरैशी को त्यागपत्र देने का सुझाव दिया था। केंद्र सरकार ने अपने अधिकारों के तहत ऐसा किया और इसका उचित कारण भी था।

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की थी इस्तीफे की पेशकश
सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में केंद्रीय गृह सचिव ने कहा है कि कुरैशी को इस साल पांच अगस्त को इस्तीफा देने का सुझाव दिया गया था। इसके बाद कुरैशी ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखा।
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इस पत्र में उन्होंने कहा कि वह कुछ परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। सितंबर के अंत तक इन पर काम खत्म हो जाएगा। उसके बाद वह इस्तीफा दे देंगे लेकिन इसके उलट उन्होंने 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी।
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गृह सचिव ने हलफनामे में राज्यपाल की ओर से याचिका में लगाए गए सभी आरोपों को नकार दिया है। हलफनामे के मुताबिक गृह सचिव की ओर से फोन पर राज्यपाल को हटाने या इस्तीफा देने की धमकी देने का आरोप गलत है।

गोस्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कुरैशी के पत्र का 24 अगस्त को जवाब दिया था। जब सुप्रीम कोर्ट की ओर से कुरैशी की याचिका पर विचार करने की सहमति जताए हुए तीन दिन बीत चुके थे।

कहा, की थी न‌‌िचले दर्जे की ‌ट‌िप्पणी

center blame governor kureshi in supreme court.

हलफनामे में कहा गया कि गोस्वामी ने कुरैशी को बहुत ही संवेदनशील बयान के मसले पर फोन किया था, जिस पर बहुत हंगामा हुआ था।

इससे राज्यपाल कार्यालय बेवजह के विवादों के घेरे में आ गया था। गोस्वामी ने कुरैशी की ओर से बलात्कार के मामले पर दिए गए उस बयान को इंगित किया है, जिसमें कहा गया था कि बलात्कार को रोका नहीं जा सकता। भले ही पूरी पुलिस फोर्स या सेना को लगा दिया जाए। कोई दैवीय शक्ति ही इसे पूरी तरह से रोक सकती है।

सरकार ने कहा है कि राज्यपाल की ओर से इस तरह की टिप्पणी बहुत ही निचले दर्जे का प्रतीत होता है। यह बहुत ही असंवेदनशील है और स्वीकार करने योग्य नहीं है। लोगों को नेक सलाह देने की बजाय इस तरह का दुर्भाग्यपूर्ण बयान लोगों और समाज पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है। यह अपराधियों को उकसाने के लिए काफी है।

गोस्वामी ने कहा है कि इस तरह के बयान कुरैशी की ओर से दिए जाने के बाद उन्होंने केंद्र सरकार और राज्यपाल के बीच एक नोडल अधिकारी के तौर पर बातचीत की। उनसे 30 जुलाई को इस टिप्पणी के बारे में पूछा और स्पष्टीकरण मांगा।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का जिक्र हलफनामे में किया है, जो बीएल सिंघल मामले में निजाम बदलने पर राज्यपालों को हटाए जाने की कारगुजारियों के खिलाफ दिया गया था।

सरकार ने कहा है कि डॉ. कमला बेनीवाल को सिर्फ पद से हटाया गया, क्योंकि उनका आचरण पद की गरिमा के अनुकूल नहीं था। जबकि अन्य मामलों में राज्यपालों ने अपनी मर्जी से त्यागपत्र दिया।

कुरैशी ने लगाया था धमकी का आरोप

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सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में डॉ. कुरैशी ने कहा है कि केंद्रीय गृहसचिव गोस्वामी ने उन्हें 30 जुलाई को फोन करके कहा था कि वह इस्तीफा दे दें। अगर वह इस्तीफा नहीं देते तो उन्हें राज्यपाल के पद से हटा दिया जाएगा।

गृह सचिव ने यह भी कहा कि बलात्कार पर उनके बयान के संदर्भ में भी वह यह फोन कर रह हैं। डॉ. कुरैशी का कहना है कि बलात्कार की वारदात पर दिए बयान को लेकर उन्होंने दो अगस्त को अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए गृह मंत्रालय को पत्र लिखा था। इसके बाद पांच अगस्त को गृह सचिव ने एक बार फिर फोन किया और इस्तीफे की बात दोहराई।

यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान नियुक्त राज्यपालों को हटाने की मोदी सरकार की मुहिम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले डॉ. कुरैशी पहले राज्यपाल हैं।

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