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रोजगार मिलेगा तो सेहत भी बिगाड़ेगा सीमेंट प्लांट
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 13 Dec 2013 08:19 PM IST
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उत्तराखंड के त्यूनी और सोमेश्वर में सीमेंट फैक्ट्री लगाने की स्थिति में पर्यावरण की क्षति तय है। इससे पहाड़ की पीड़ा बढ़ेगी। स्थानीय जनता का स्वास्थ्य खराब होगा।
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पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करने वाले लोगों का मानना है कि फैक्ट्री लगने से जितने लोगों को रोजगार नहीं मिलेगा। उससे कई गुना अधिक जनता को नुकसान उठाने के लिए तैयार रहना होगा। उनका कहना है कि सरकार को हिमाचल प्रदेश से सीख लेकर अपने कदम वापस लेने चाहिए।
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पर्यावरण क्षति का आंकलन नहीं
गढ़वाल के त्यूनी और कुमाऊं के सोमेश्वर में सीमेंट फैक्ट्री लगाने से पहले पर्यावरण क्षति का आंकलन कराना आवश्यक होगा।
अभी तक अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री की ओर से किसी भी प्रकार का पर्यावरण क्षति का आंकलन नहीं कराया गया है। इसके लिए राज्य पर्यावरण समिति के पास आवेदन भी नहीं किया गया है। ऐसे में सवाल यह है कि बिना पर्यावरण क्षति का आंकलन कराए बिना ही कंपनी लगाने की तैयारी कैसे शुरू कर दी गई।
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सीमेंट फैक्ट्री से फेफडे़ खराब
हिमाचल प्रदेश के दरलाघाट और बरमाना में सीमेंट फैक्ट्री चल रही है। इन दोनों ही फैक्ट्रियों के आसपास के लगभग 50 गांवों के लोगों का स्वास्थ्य खराब हो गया है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक उनियाल डा. वीपी उनियाल ने बताया कि सरकार हर काम के लिए हिमाचल को अपना माडल मानती है।
ऐसे में सीमेंट फैक्ट्री लगाने से पहले हिमाचल प्रदेश के उक्त दोनों ही स्थानों का अध्ययन करा ले। अगर अध्ययन सकारात्मक आता है तो निश्चित तौर पर फैक्ट्री लगाया जाए। नकारात्मक रिपोर्ट आने पर प्रोजेक्ट बंद करना चाहिए। डा.उनियाल के अनुसार हिमाचल के ग्रामीणों का फेफड़ा खराब हो गया है।