फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   CEC saw the reality of the Laldhang-Chilarakal road

सीईसी ने लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग की देखी हकीकत, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी निर्माण पर रोक

Tue, 23 Jul 2019 08:12 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 23 Jul 2019 08:12 PM IST
विज्ञापन
CEC saw the reality of the Laldhang-Chilarakal road
निरीक्षण करती टीम - फोटो : अमर उजाला

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर मंगलवार को पर्यावरण और वनों पर बनी केंद्रीय समिति (सीईसी) ने जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क और राजाजी टाइगर रिजर्व में निर्माणाधीन लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग की हकीकत देखी। इसके साथ ही विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्माण के संदर्भ में जानकारी हासिल की। समिति को अपनी रिपोर्ट 29 जुलाई से पहले सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करनी है। 29 जुलाई को ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।

विज्ञापन


लैंसडौन वन प्रभाग के मध्य स्थित लालढांग-चिल्लखाल मार्ग को कंडी रोड के रूप में भी जाना जाता है। मार्ग का निर्माण प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। सरकार ने 11 किमी लंबे इस मार्ग के निर्माण के लिए लोक निमार्ण विभाग को धनराशि जारी की थी। इस योजना के तहत मार्ग के लिए वन भूमि हस्तांतरण के साथ उसके डामरीकरण और तीन पुलों का निर्माण होना है। मार्ग के कुछ हिस्सों में डामरीकरण  और एक पुल का निर्माण हो चुका है। लेकिन इससे पहले की निर्माण कार्य तेजी पकड़ता, इस बात को लेकर विवाद खड़ा हो गया कि मार्ग बाघ संरक्षित क्षेत्र के बफर जोन में हैं और इसके लिए सरकार ने राष्ट्रीय बाघ सुरक्षा प्राधिकरण (एनटीसीए) से एनओसी नहीं ली है।
विज्ञापन


वन विभाग का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामला जाने के बाद से ही मार्ग का निर्माण का कार्य बंद है। 19 जुलाई को प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखा था। जिस पर न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीईसी को मौके पर जाकर स्थिति की जांच कर रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले दाखिल करने का निर्देश दिया था। इस क्रम में मंगलवार को सीईसी के सदस्य सचिव अमरनाथ सेठी के साथ आए सदस्यों ने पहले निर्माणाधीन मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया। इसके बाद समिति ने अधिकारियों के साथ बैठक कर मार्ग निर्माण के विवाद से जुड़े सभी अभिलेख और मेजरमेंट बुक  की जांच की। वन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक समिति ने अपने रुख का कोई संकेत नहीं दिया। इस मामले में 22 जुलाई को वन मंत्री हरक सिंह ने दिल्ली में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावेड़कर से मुलाकात कर इस मुद्दे को उठाया था। केंद्रीय मंत्री ने राज्य की ओर से प्रभावी पैरवी करने का आश्वासन दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed