Bipin Rawat: सीडीएस बिपिन रावत ने सेवानिवृत्ति के बाद ऐसा करने का किया था वादा, जाे अब अधूरा रहा गया
उत्तरकाशी के थाती गांव में सीडीएस बिपिन रावत का ननिहाल है। जहां वह बचपन में अपनी मां के साथ आया करते थे। वर्ष 2004 में भी वह यहां आए थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बिपिन रावत ने सेवानिवृत्ति के बाद थाती गांव आने का वादा किया था। रावत 19 सितंबर 2019 में थाती गांव आए थे, जो उनका ननिहाल है। बिपिन रावत के निधन की खबर से क्षेत्र में शोक की लहर है।
उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर थाती गांव में सीडीएस बिपिन रावत का ननिहाल है। जहां वह बचपन में अपनी मां के साथ आया करते थे। वर्ष 2004 में भी वह यहां आए थे। इसके बाद 19 सितंबर 2019 को सीडीएस बिपिन रावत अपनी पत्नी मधुलिका रावत के साथ थाती गांव पहुंचे थे। उनके ममेरे भाई नरेंद्र परमार ने बताया कि उन्होंने कहा था कि सेवानिवृत्ति के बाद वह जरूर गांव आएंगे और गांव के लोगों के लिए काम करेंगे। नरेंद्र कहते हैं कि सीडीएस रावत हमारे ही नहीं, बल्कि पूरे देश का गौरव हैं।
सौम्य व सरल स्वभाव के थे सीडीएस रावत व उनकी पत्नी
ममेरे भाई नरेंद्र परमार ने बताया कि सीडीएस बिपिन रावत व उनकी पत्नी मधुलिका रावत सौम्य व सरल स्वभाव के थे। वह जब कभी गांव में आए, तो बड़ी आत्मीयता से सभी ग्रामीणों को मिले। खासकर उनकी पत्नी महिलाओं से गले मिली। नरेंद्र बताते हैं कि प्रोटोकाल के कारण सीडीएस रावत से तो बात नहीं हो पाती थी, लेकिन भाभीजी (मधुलिका रावत) से अक्सर फोन पर बात हो जाया करती थी। वे दोनों जब गांव आए थे तो उनके लिए उड़द दाल के पकौड़े व स्वाले (पूरी) बनाए गए थे। तब उन्होंने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा था कि वे ननिहाल में अक्सर स्वाले, पकोड़े खाया करते थे।
Bipin Rawat: उत्तराखंड के थे देश के पहले सीडीएस बिपिन रावत, मौत की खबर से राज्य में शोक की लहर
पहाड़ी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के थे पैरोकार
सीडीएस रावत पहाड़ी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की बेहतर सुविधाओं के पैरोकार थे। थाती गांव में उन्होंने कहा था कि उनकी जब भी मंत्रियों या मुख्यमंत्री से बात होती है, तो यही कहते हैं कि यहां उच्च शिक्षा की सहूलियत प्रदान करनी होगी। यहां पर अच्छे इंजीनियरिंग व मेडिकल कालेज खुलेंगे तो हमारे नौजवान यहां से पलायन नहीं करेंगे।
दो बार आए थे गंगोत्री
सीडीएस रावत दो बार गंगोत्री धाम भी आए थे। 6 नवंबर 2018 में वह गंगोत्री आए थे। इसके बाद 19 सितंबर 2019 में भी आए थे। इस दौरान उन्होंने अपनी पत्नी मधुलिका के साथ धाम में पूजा-अर्चना भी की थी।
हेलीकाप्टर हादसे में सीडीएस रावत व उनकी पत्नी मधुलिका सहित अन्य सैन्य अधिकारियों की आत्मा की शांति के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर में शोक संवेदना प्रकट की गई। महंत अजय पुरी ने कहा कि इस कठिन समय में परमात्मा मृत आत्माओं को शांति प्रदान करे व उनके शोकाकुल परिजनों को दुख सहने की शक्ति दे।