स्टिंग की सीबीआई जांच से आफत में कांग्रेस, नहीं मिल रही काट
- 15 दिनों में समीकरण बदले, अब जांच में शामिल होना सीएम की मजबूरी
- जांच में दूसरा स्टिंग प्रकरण भी हुआ शामिल तो कइयों से होगी पूछताछ
- कई कोशिशों के बावजूद कांग्रेस को नहीं मिली सीबीआई जांच की काट
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विधायकों की खरीद फरोख्त मामले में चल रही सीबीआई की जांच से आने वाले दिनों में सीएम हरीश रावत के साथ कांग्रेस की मुसीबतें बढ़ना तय है। सीबीआई ने एक बार फिर सीएम को पूछताछ के लिए तलब किया है। इस बार हालात 9 मई से अलग हैं, जब सीएम शपथ ग्रहण समारोह को कारण बता कर पूछताछ का हिस्सा नहीं बने थे।
अब 15 दिनों में स्थितियां बदल चुकी हैं। कांग्रेस लाख कोशिशों के बावजूद सीबीआई जांच की काट नहीं खोज पाई है। सीएम मंत्रिमंडल के जरिए और हाईकोर्ट में भी जांच खारिज करवाने की कोशिश कर चुके हैं। ऐसे में सीएम का जांच का हिस्सा बनना मजबूरी है। मामला सीएम से पूछताछ तक ही नहीं थमेगा, आने वाले दिनों में कुछ और विधायक भी पूछताछ के लिए दिल्ली तलब होंगे।
स्टिंग प्रकरण में सीबाआई जांच से पीछा छुड़ाने की तमाम कोशिशें करने के बाद कांग्रेस मामले को सियासी चोला पहनाने की कोशिश कर रही है। जांच से बचने की कोशिशें साफ कर रही हैं कि मामले में कांग्रेस की मुसीबत आने वाली दिनों में और बढ़ेगी।
जांच में सही पाई गई है सीडी
सीडी की जांच केंद्र पहले ही सीएफएसल लैब से करवा चुका है। हरीश रावत खुद इस बात को मान चुके हैं कि सीडी में वह मौजूद हैं। माना जा रहा है कि जांच एजेंसी 24 मई को सीएम से वीडियो में सुनाई दी गई बातचीत से संबंधित पूछताछ करेगी।
मामले में दर्ज पीई मुकदमे में तभी तब्दील होगी जब जांच एजेंसी को पर्याप्त सबूत मिलेंगे। ऐसे में सीएम के बयान बेहद अहम हैं। जांच सीएम से होने वाली पूछताछ पर आकर खत्म नहीं होगी। हार्स ट्रेडिंग प्रकरण को लेकर विधायक मदन बिष्ट का आया स्टिंग भी महत्वपूर्ण है। इसको लेकर सीबीआई के पास शिकायत आ चुकी है।
इस स्टिंग में दर्जन भर विधायकों के नाम बातचीत में सामने आए थे। इसके अलावा जिन कांग्रेसी विधायकों ने उन्हें मिले मोटे ऑफर की बात कही वह भी सीबीआई के रडार पर हैं। सरकार के लिए सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि जांच से बचने के लिए उसे कहीं से भी राहत मिलती नहीं दिख रही है।