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Dehradun News: चार माह के बच्चे का मोतियाबिंद का ऑपरेशन
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Iदून अस्पताल में पहली बार चार माह के बच्चे का मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन किया गया और लेंस का प्रत्यारोपण हुआ। बच्चे की दोनों आंखों में जन्म से ही सफेद मोतियाबिंद था।
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Iदून मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर सुशील ओझा ने बताया कि रुड़की का अब्दुल्ला चार महीने का है। परिजनों ने रुड़की में ही डॉक्टरों को दिखाया, तो जांच में पता चला कि अब्दुल्ला को सफेद मोतियाबिंद है। इसके बाद परिजन उसे लेकर एम्स ऋषिकेश पहुंचे, यहां भी सफेद मोतियाबिंद होने की बात कही गई। परिजन बच्चे को लेकर दून अस्पताल आए यहां बृहस्पतिवार को अब्दुल्ला की सर्जरी की गई। प्रोफेसर ने बताया कि सर्जरी के अगले दिन जब अब्दुल्ला की पट्टी खोलकर उसको टॉर्च की लाइट दिखाई गई तो उसे देखकर उसने प्रतिक्रिया दी। अभी बच्चे को निगरानी में रखा गया है। सर्जरी में प्रोफेसर डॉ. सुशील ओझा, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीरज सारस्वत, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दुष्यंत उपाध्याय, डॉ. अनंत रैना, डॉ. गौरव कुमार, डॉ. ईशान सिंह, डॉक्टर सुमन, विजयलक्ष्मी, शैलेश का योगदान रहा।I
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Iदून अस्पताल में पहली बार चार माह के बच्चे का मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन किया गया और लेंस का प्रत्यारोपण हुआ। बच्चे की दोनों आंखों में जन्म से ही सफेद मोतियाबिंद था।
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Iदून मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर सुशील ओझा ने बताया कि रुड़की का अब्दुल्ला चार महीने का है। परिजनों ने रुड़की में ही डॉक्टरों को दिखाया, तो जांच में पता चला कि अब्दुल्ला को सफेद मोतियाबिंद है। इसके बाद परिजन उसे लेकर एम्स ऋषिकेश पहुंचे, यहां भी सफेद मोतियाबिंद होने की बात कही गई। परिजन बच्चे को लेकर दून अस्पताल आए यहां बृहस्पतिवार को अब्दुल्ला की सर्जरी की गई। प्रोफेसर ने बताया कि सर्जरी के अगले दिन जब अब्दुल्ला की पट्टी खोलकर उसको टॉर्च की लाइट दिखाई गई तो उसे देखकर उसने प्रतिक्रिया दी। अभी बच्चे को निगरानी में रखा गया है। सर्जरी में प्रोफेसर डॉ. सुशील ओझा, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीरज सारस्वत, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दुष्यंत उपाध्याय, डॉ. अनंत रैना, डॉ. गौरव कुमार, डॉ. ईशान सिंह, डॉक्टर सुमन, विजयलक्ष्मी, शैलेश का योगदान रहा।I
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