पत्नी की चिंता में हेल्पलाइन पहुंचा 'बेचारा' पति
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डॉक्टरों के सफर से मना करने के बावजूद गर्भवती पत्नी ने बार-बार मायके जाना नहीं छोड़ा तो मजबूरन पति को महिला हेल्प लाइन में शिकायत देनी पड़ी।
पति को डर है कि देहरादून की ऊबड़-खाबड़ और गड्ढों भरी सड़क पर बस या विक्रम में सफर के दौरान बीवी के साथ हादसा न हो जाए। काउंसिलिंग हुई तो पति की चिंता को बखूबी समझते हुए बीवी ने मायके जाने की हठ छोड़ दी।
हर बार एक-दूसरे से लड़ने और आरोप-प्रत्यारोप वाले मामलों के बीच मंगलवार को पहली बार ऐसा केस हेल्प लाइन में आया, जब पति ने पत्नी से लड़ने-झगड़ने के बजाय उसकी चिंता में हेल्पलाइन से मदद मांगी।
पति का कहना था कि बीवी को सात माह का गर्भ है। डॉक्टर ने सफर करने से मना कर रखा है। मगर उसके ऑफिस जाने के बाद वह बार-बार मायके जाती है।
ऐसी स्थिति में नहीं करेगी बस का सफर
पति के मुताबिक दून की बदहाल सड़कों पर कब हादसा हो जाए, कोई नहीं जानता। ऐसे में बीवी-बच्चे को कुछ हो गया तो उसका क्या होगा? कहने के बावजूद बीवी बात नहीं मानती, मना करो तो उल्टे आरोप लगाती है।
काउंसिलिंग के दौरान परेशान पति बोलता रहा, लेकिन बीवी चुपचाप रही। प्रभारी दीपिका राणा ने समस्या पूछी तो उसने इनकार में सिर हिला दिया। साथ ही वादा किया कि अब वह ऐसी स्थिति में बस का सफर नहीं करेगी। काउंसिलिंग के बाद दोनों राजी खुशी घर लौट गए।
घरों में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े बढ़ रहे हैं। काउंसिलिंग के लिए लोग हेल्पलाइन पहुंचते हैं। कोई बाहरी व्यक्ति (हेल्प लाइन) निष्पक्षता दोनों की बात सुनता है तो दोनों पक्ष संतुष्ट हो जाते हैं। ऐसे मामलों में एक ही काउंसिलिंग से घर टूटने से बच जाते हैं।
- दीपिका राणा, प्रभारी महिला हेल्प लाइन