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बेटे ने देश के लिए दी जान, अब हो रहा अपमान

Sun, 26 Jul 2015 04:17 PM IST
रेनू सकलानी/ अमर उजाला, देहरादून
रेनू सकलानी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 26 Jul 2015 04:17 PM IST
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carelessness on kargil war Martyr in BRS gupta.

कारगिल युद्ध में शहीद हुए मेजर विवेक गुप्ता की याद में देहरादून में बनाए गए मेमोरियल की खराब हालत उनके पिता लेफ्टिनेंट कर्नल बीआरएस गुप्ता को पीड़ा पहुंचाती है।

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उन्हें आज तक इस बात का मलाल है कि जब मरणोपरांत बेटे को महावीर चक्र दिया गया, उस वक्त सरकार ने उन्हें सूचना देने तक की जहमत नहीं उठाई। उन्हें इस बात का अफसोस आज भी है कि सरकार की लापरवाही के चलते वे गौरवान्वित करने वाले उस पल का हिस्सा नहीं बन सके।
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वसंत विहार निवासी लेफ्टिनेंट बीआरएस गुप्ता ने शनिवार को ‘अमर उजाला’ से बातचीत में बताया कि उन्हें सबसे अधिक दुख इस बात का है कि बेटे के नाम पर प्रदेश सरकार के बनाए मेमोरियल बदहाल पड़े हैं। सरकार की ओर से वसंत विहार चौक का नाम मेजर विवेक गुप्ता मार्ग रखा गया था।
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चौक पर शहीद के नाम का बोर्ड भी लगाया गया था, लेकिन बोर्ड पर तरह-तरह के पोस्टर लगे रहते हैं। वहीं, मेजर विवेक गुप्ता के नाम से वसंत विहार में बनाए गए स्कूल का जीर्णोद्धार भी 16 वर्ष बाद भारत विकास परिषद की ओर से कराया गया। कहा कि मेरे बेटे ने इस देश के लिए अपनी जान कुर्बान की है, उसका इस तरह से अपमान न करें।

यह बताते हुए उनकी आंखें भर आईं। कहा कि आते-जाते जब भी बेटे के नाम पर बनाए मेमोरियल को बदहाल हालत में देखता हूं तो बहुत पीड़ा होती है। विवेक लेफ्टिनेंट बीआरएस गुप्ता का इकलौता बेटा था। उनकी दो बेटियाें में से एक भी चल बसी। परिवार के नाम पर अब उनके पास केवल उनकी इकलौती बेटी है।

सैनिक कल्याण विभाग ने एक ‘अधिकार’ से भी रखा है वंचित

carelessness on kargil war Martyr in BRS gupta.

सैनिक कल्याण विभाग की ओर से हर वर्ष समारोह का आयोजन किया जाता है, इसमें महावीर चक्र पाने वाले को एक एन्युटी (सम्मान के रूप में दी जाने वाली धनराशि, लगभग दो लाख रुपए) दी जाती है। विभाग ने मेजर के पिता को इस अधिकार से वंचित रखा हुआ है।

अब भी पत्नी को ही दिया जाता है सम्मान
विवेक के शहीद होने के बाद उनकी पत्नी ने दूसरी शादी कर ली। विवेक के परिवार से अब उनका कोई संबंध नहीं है। सरकार की ओर से किसी भी समारोह में जब विवेक को सम्मान दिया जाता है, तो उस सम्मान के लिए आज भी विवेक की पत्नी को ही बुलाया जाता है। लेफ्टिनेंट बीआरएस गुप्ता ने रूंधे गले कहा कि क्या एक पिता का अपने बेटे पर कोई अधिकार नहीं है।

शहीदों को मिलना चाहिए सम्मान
कारगिल युद्ध से सही सलामत लौटे और वीर चक्र से सम्मानित अनिल कुमार सिन्हा ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि शहीदों को जितना सम्मान मिलना चाहिए, उतना नहीं मिलता। वर्ष 2010 में एयरफोर्स से रिटायर्ड होने के बाद वीर चक्र से सम्मानित ग्रुप कैप्टन अनिल कुमार को दिल्ली में जेपी ग्रुप कंपनी में सीईओ का पद मिला।

बतौर ग्रुप कैप्टन अनिल कुमार कुछ शहीद ऐसे हैं जिनके मरने के उपरांत उनके परिवार की कोई पूछ नहीं हुई। कहा कि सरकार कैसे भूल सकती है कि युद्ध में शहीद होने वाला सिपाही अपनी जान पर खेलकर देश की रक्षा करता है। उन्होंने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कारगिल के उस युद्ध में किसी ने अपना भाई खोया, किसी पति तो किसी ने बेटा। कहा कि उन शहीदों का सम्मान करें।

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