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उत्तराखंड: निगम घाटे में, निजाम ‘लापरवाह’

Thu, 18 Feb 2016 03:34 PM IST
आशीष डोभाल/ अमर उजाला, देहरादून
आशीष डोभाल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 18 Feb 2016 03:34 PM IST
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careless officer.

उत्तराखंड के सरकारी सिस्टम में हद दर्जे की लापरवाही है। प्रदेश में 11 निगमों के 40 हजार से भी ज्यादा कार्मिकों को वित्त विभाग की सहमति के बगैर एसीपी की मद में करोड़ों रुपये की धनराशि बांट दी।

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जुलाई 2013 में शासनादेश जारी किया गया कि यदि कोई निगम अपने कर्मियों को एसीपी का लाभ देता है तो मूल प्रशासनिक विभाग से अनुमति लेनी होगी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और करोड़ों रुपये बगैर अनुमति के दे दिए गए।
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जुलाई 2013 को तत्कालीन प्रमुख सचिव राकेश शर्मा ने एस्योर्ड प्रोग्रेसिव स्कीम (एसीपी) के संबंध में शासनादेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि निगम अधिकारियों व कर्मचारियों को एसीपी लेने से पहले अपने मूल प्रशासनिक विभाग से मंजूरी लेनी होगी।
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इसके बाद वित्त विभाग ताजा आदेश जारी करेगा। लेकिन वन निगम, पेयजल निगम, जीएमवीएन, केएमवीन, हिल्ट्रोन, तराई बीज विकास निगम, बहुउद्देश्यीय वित्त विकास निगम, अल्पसंख्यक कल्याण निगम, अवस्थापना विकास निगम, ऊर्जा निगम, जल विद्युत निगम, पावर ट्रांशमिशन निगम आदि निगमों ने बगैर शासन की अनुमति के अपने कर्मियों को एसीपी बांट दिया। इससे निगमों पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भार पड़ गया।

जबकि इसके लिए जिम्मेदार अफसर कह रहे हैं कि ऐसा होना गलत नहीं है। एसीपी अब भी दिया जा रहा है।

कहां कितना एसीपी का भुगतान पेंडिंग
वन निगम- करीब 14 करोड़ रुपये
परिवहन निगम- 14 करोड़ से अधिक
गढ़वाल मंडल विकास निगम- करीब 14 करोड़ रुपये
कुमाऊं मंडल विकास निगम- करीब 6 करोड़

मेरे कार्यकाल में पिछला भुगतान तो नहीं हुआ। मैं अवकाश पर हूं। अगर ऐसा है तो जांच की जाएगी।
- सी रविशंकर, एमडी, जीएमवीएन

पिछला एरियर करीब 15 करोड़ होना बाकी है। वर्ष 2013 में जारी राज्य कर्मचारियों के शासनादेश के आधार पर निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों को एसीपी का लाभ दिया जा रहा है। जब-जब जिस-जिस कर्मचारी के एसीपी के ऑर्डर हुए होंगे तब-तब से तनख्वाह अगले माह की बढ़ाकर दे दी गई है।
- जयपाल सिंह तोमर, जीएम फायनेंस, जीएमवीएन

केएमवीएन में भी करीब 6.50 करोड़ की एसीपी कर्मचारियों की पेंडिंग है। जिस कर्मचारी की एसीपी लागू होती है उसकी सैलरी के साथ आवेदन करने के बाद तनख्वाह बढ़ाकर जारी कर दी जाती है
- नरेंद्र सिंह, वित्त नियंत्रक, केएमवीएन

जुलाई 2013 को जारी वित्त विभाग के शासनादेश के आधार पर ही निगम कर्मचारियों को एसीपी जारी की गई है और हर माह यह जारी हो रही है। वेतन के साथ ही एरियर के भी कई करोड़ का भुगतान हुआ है।
- बृजेश कुमार संत, एमडी, उत्तराखंड परिवहन निगम

वित्त विभाग ने राज्य कर्मचारियों की एसीपी के लिए शासनादेश जारी किया था। निगम अपने आप में स्वायत बॉडी हैं। इस शासनादेश के आधार पर अगर निगम कर्मचारी फायदा ले रहे हैं तो वह गलत है। इस शासनादेश के बाद कोई दूसरा शासनादेश नहीं जारी हुआ है।

- डॉ. एससी जोशी, वित्त सचिव

हम औद्योगिक विकास अनुभाग से इस संबंध में शासनादेश जारी करवाने के लिए पहल कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही निगम कर्मचारियों के लिए नया शासनादेश जारी होगा, ताकि इन्हें भी राज्य कर्मचारियों की भांति एसीपी का लाभ मिल सके।
- रवि पचौरी, महामंत्री, राज्य कर्मचारी निगम, उत्तराखंड

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