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स्वास्थ्य विभाग हुआ 'बीमार'

Mon, 09 Sep 2013 09:39 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 09 Sep 2013 09:39 AM IST
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careless health department

पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर जाने के बाद देहरादून के रायपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत और खराब हो गई है।

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इस वक्त स्थिति यह है कि रोगियों को देने के लिए यहां एंटी बायटिक की टेबलेट तक नहीं है। एमओयू को लेकर पीएचसी चला रही राजभ्रा मेडिकेयर लिमिटेड और स्वास्थ्य विभाग में विवाद बना हुआ है।

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राजभ्रा मेडिकेयर लिमिटेड के साथ मसौदे में तय हुआ था कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। बीपीएल कार्ड धारक को मुफ्त सेवाएं तथा लोगों जो सेवाएं पहले दी जा रही थीं, वे जारी रहेंगी। केंद्र में स्टाफ राजभ्रा का रहेगा।
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ओपीडी का परचा पहले की तरह छह रुपए में ही मिलेगा। लेकिन दो महीने के अंदर सीएचसी की हालत खराब हो गई है। राजभ्रा के चिकित्सक डा. एमके जोशी का कहना है कि सीएचसी की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। लेकिन दवाएं नहीं हैं।

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एंटी बायटिक की एक दवा नहीं है। स्टोर में थोड़ी सी पैरासीटामॉल की टेबलेट रखी हुई हैं। ये दवाएं दो-चार दिन में खत्म हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि रोगियों के लिए ओपीडी और इमरजेंसी सेवा चालू है।

एमओयू में फंसा मामला

राजभ्रा और स्वास्थ्य विभाग में एमओयू को लेकर मामला फंस गया है। कंपनी ने एक जुलाई से सीएचसी को ले लिया था। उसके डॉक्टरों ने 15 जुलाई से काम शुरु कर दिया था। लेकिन एमओयू 14 अगस्त को साइन हुआ है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिस दिन से एमओयू साइन हुआ है। उसी दिन से सेवा शर्तें लागू होंगी। इस चक्कर में कंपनी के डॉक्टरों का एक महीने का वेतन फंस रहा है। कंपनी के डॉक्टरों का पैसा एनआरएचएम की योजना के तहत दिया जाना है।

एमओयू का मामला निदेशालय स्तर पर तय होना है। सीएचसी में काम कर रहे कंपनी के लोगों को यह बात समझा दी गई है। डॉक्टरों ने काम बंद नहीं किया। ओपीडी बंद करके दो घंटे मीटिंग की थी।
- डा. गुरपाल सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी

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