कैग ने खोली उत्तराखंड सरकार की पोल, बड़े घपले का इशारा
कैग ने फिर खोली सरकार के वित्तीय प्रबंधन की कलई।
सदन में रखी गई कैग की रिपोर्ट में गंभीर घपलों की ओर इशारा।
आपदा राहत के 497.73 करोड़ को दिखाया गया अन्य मद में।
केंद्रीय सड़क निधि के तहत राज्य को मिले थे 25 करोड़ रुपये।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पूर्व में आपदा प्रबंधन की परफार्मेंस रिपोर्ट में भी कैग सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठा चुका है। हद तो यह है कि प्रदेश सरकार ने 2014-15 में ही आपदा राहत के 497.73 करोड़ रुपये का खर्च अन्य व्यय की मद में दिखाया है। 2014-15 के वित्त लेखों पर कैग की यह रिपोर्ट बृहस्पतिवार को सदन के पटल पर रखी गई।
राज्य सरकार एक बार पहले भी आपदा राहत के 1509 करोड़ रु पये का हिसाब न मिलने को लेकर विवादों में आई थी। गैरसैंण सत्र में सदन के पटल पर रखी गई आपदा प्रबंधन की परफॉर्मेंस रिपोर्ट में भी कैग ने प्रदेश सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाया था।
अब 2014-15 के वित्त लेखों पर बृहस्पतिवार को सदन के पटल पर रखी गई कैग की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि केंद्रीय सड़क निधि के 25.51 करोड़ रुपये का तो पता ही नहीं है कि यह कहां खर्च हुए। केंद्र सरकार का साफ निर्देश था कि इस राशि को पहले प्रदेश सरकार लोक लेखा अकाउंट में लें। इसके बाद इसे राजस्व व्यय के खाते में दर्ज किया जाए। लेकिन, यह धनराशि लोक लेखा में ली ही नहीं गई। ऐसे में पता ही नहीं है कि यह पैसा खर्च कहां किया गया?
3600 करोड़ रुपये के उपयोग पर भी सवाल
ऐसा ही एक मामला विभागों के अन्य व्यय को लेकर है। वित्तीय लेखों में यह व्यवस्था होती है कि विभाग अगर किसी मद में स्पष्ट व्यवस्था न हो तो अन्य व्यय की मद में इस खर्च को दिखाया जा सकता है। वित्तीय प्रबंधन के लिहाज से इसका बहुत अधिक उपयोग सही नहीं माना जाता।
इसके बावजूद प्रदेश में करीब 3600 करोड़ रुपये का उपयोग अन्य व्यय/प्राप्तियों की मद में दिखाने पर कैग ने सवाल उठाया है। कैग का कहना है कि ऐसा करना खातों को अपारदर्शी बनाता है। हद तो यह है कि प्राकृतिक आपदा के बाद राहत कार्यों के तहत 2014-15 में कुल 709.85 करोड़ रुपये खर्च हुए और इसमें से 497.92 करोड़ रुपये अन्य व्यय की मद में दिखाए गए।
इसी तरह ग्रामीण विकास के विशेष कार्यक्रम के तहत कुल 426.73 करोड़ रुपये खर्च किये गए, जिसमें से 407.99 करोड़ रुपये अन्य व्यय की मद में डाले गए। सहकारिता में कुल 43.19 करोड़ रुपये खर्च हुए और इसमें से 25.43 करोड़ रुपये अन्य मद में दिखाए गए।
456 उपयोगिता प्रमाण पत्र पड़े हैं लंबित
रिपोर्ट के मुताबिक 456 कार्यों के उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित पड़े हैं। प्रदेश सरकार ने कैग को निवेश की कोई सूचना नहीं दी। हद यह रही कि विभागों के व्यक्तिगत जमा खाते (पीएलए) भी जमकर खोले जा रहे हैं।
31 मार्च, 2015 को प्रदेश में 24 ऐसे खातों में 265 करोड़ रुपये जमा थे। 31 मार्च, 2015 को एसडीआरएफ का 279 करोड़ रुपये शेष था। 2014-15 में सरकार राजकोषीय घाटे को तय सीमा के अंदर रखने में नाकाम रही। वित्तीय प्रबंधन के तहत प्रदेश सरकार को राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत तक सीमित करना होता है।
2014-15 में यह 4.20 प्रतिशत पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक विभागों का मार्च माह में खर्च करने पर अधिक जोर है। ऐसे कई विभाग हैं जो मार्च माह में अपने कुल बजट का 70 प्रतिशत तक खर्च कर रहे हैं। कैग का कहना है कि इस प्रवृत्ति से बचा जाना चाहिए।