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उत्तराखंड सरकार तक नहीं पहुंची रेडियो की आवाज
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 29 Mar 2015 01:50 PM IST
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कैबिनेट बैठक में आपदा प्रबंधन के लिहाज से रुद्रप्रयाग को मॉडल जिला बनाने का इरादा तो सरकार ने जाहिर कर दिया, लेकिन आपदा के वक्त बेहद उपयोगी साबित होने वाले कम्यूनिटी रेडियो की आवाज शायद सरकार के कानों तक नहीं पहुंच पाई।
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और पहुंचे भी तो कैसे... क्योंकि कम्यूनिटी रेडियो करीब 15 किलोमीटर के दायरे में ही संचार का काम कर सकते हैं। ये बात अलग है कि कम्यूनिटी रेडियो संचालक कई बार इसका दायरा बढ़ाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन यह अब तक पूरी नहीं हो सकी।
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उल्लेखनीय है कि प्रदेश में तीन कम्यूनिटी रेडियो हैं। इनमें से एक मंदाकिनी की आवाज, दूसरा कुमाऊं वाणी और तीसरा हिमाल है। आपदा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले कम्यूनिटी रेडियो के प्रति उदासीनता का आलम यह है कि प्रदेश से किए गए सात आवेदनों में मात्र तीन को ही अनुमति मिल पाई है।
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मंदाकिनी की आवाज को तो कम्यूनिटी रेडियो संचालन की अनुमति लेने में करीब चार साल लग गए। फिलहाल जो तीन कम्यूनिटी रेडियो चल रहे हैं उनकी स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। चुनौतियों के पहाड़ को देखते हुए कम्यूनिटी रेडियो संचालक भी स्वीकार करने लगे हैं कि उन्हें नेटवर्किंग और प्रशिक्षण की जरूरत है।
बीबीसी वर्ल्ड ट्रस्ट के हाल ही में देहरादून में हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश में कार्यरत कम्यूनिटी रेडियो के संचालकों ने भी माना था कि कम्यूनिटी रेडियो को भी नेटवर्क की जरूरत है। मतलब यह कि अलग-अलग कम्यूनिटी रेडियो भी अपनी समिति बनाए और कंटेंट को साझा करें।
वहीं, कम्यूनिटी रेडियो के प्रति सरकार का रुख इसी से साफ है कि हाल ही में आपदा प्रबंधन विभाग ने रुद्रप्रयाग की सोशल रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट में पूरे जिले का प्रोफाइल तैयार किया गया है। जिले के हर एनजीओ, सामाजिक संगठन, सरकारी संस्थाओं आदि का तो जिक्र इसमें है, लेकिन कम्यूनिटी रेडियो का नहीं।
करीब 200 गांवों तक है मंदाकिनी की आवाज की पहुंच
मंदाकिनी की आवाज कम्यूनिटी रेडियो ने सितंबर 2014 से काम करना शुरू किया था। रुद्रप्रयाग, चमोली में करीब 200 गांवों में मंदाकिनी की आवाज की पहुंच है। इसे स्थापित करने वाली बंगलूरू की संस्था पीपुल्स कलेक्टिव पावर के प्रबंधकों के मुताबिक आपदा के समय में संचार नेटवर्क को बनाए रखने के लिए ही कम्यूनिटी रेडियो स्थापित किया गया।
समस्याएं हों दूर तो मिलेगा फायदा भी भरपूर
मंदाकिनी की आवाज के मानवेंद्र नेगी के मुताबिक उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कम्यूनिटी रेडियो से स्थानीय युवा अधिक जुड़ता है। इसमें युवतियों की संख्या अधिक है। पर शादी और अन्य कारणों से अधिकतम तीन साल ही ये युवतियां काम कर पाती हैं।
दूसरी ओर नेटवर्क का दायरा भी कानूनी प्रावधानों की वजह से नहीं बढ़ाया जा सकता। कम्यूनिटी रेडियो करीब 15 किलोमीटर के दायरे में ही संचार का काम कर सकते हैं। अगर इसका दायरा बढ़ जाए तो इसका फायदा अधिक से अधिक लोगों को मिलेगा।
क्या है उपयोगिता
आपदा के समय संचार नेटवर्क पूरी तरह से ध्वस्त हो सकता है। जून 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान भी यह देखने को मिला। नेटवर्क टावर टूट जाने पर मोबाइल पर नेटवर्क नहीं आता।
सड़क टूटने और मौसम खराब होने पर सड़क और हवाई मार्ग से आपदा ग्रस्त इलाकों से संपर्क टूट सकता है। ऐसे में कम्यूनिटी रेडियो संचार का काम कर सकते हैं। रेडियो, मोबाइल हैंडसेट के जरिये जरूरी सूचनाओं को आपदा प्रभावित क्षेत्रों में प्रसारित किया जा सकता है।