फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   CAA in india bengali refugee happy, told how to reach India after saving his life

सीएए लागू होने से खुश बंगाली शरणार्थी, बयां किया अपना दर्द, बताया जान बचाकर कैसे पहुंचे भारत

Mon, 06 Jan 2020 02:09 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal रवींद्र सिंह धामी , अमर उजाला, खटीमा
रवींद्र सिंह धामी , अमर उजाला, खटीमा Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 06 Jan 2020 02:09 PM IST
सार

  • सीएए लागू होने पर पीड़ित बंगाली समुदाय के लोगों ने खुलकर बयां किया अपना दर्द 

विज्ञापन
CAA in india bengali refugee happy, told how to reach India after saving his life
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : TIME

विस्तार

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू होने से सीमांत क्षेत्र में नेपाल से सटा मेलाघाट का बगुलिया गांव हो या पीलीभीत रोड पर स्थित ग्राम बरी या अन्य अनेक गांवों में रह रहे पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से जान बचाकर आए पीड़ित बंगाली समुदाय, सभी के चेहरों पर खुशी की लहर है। उनका कहना है ‘अब हम भारतीय बन गए हैं... भारत माता की जय।’ 

विज्ञापन


इन लोगों ने बताया कि 12-12 दिन तक पैदल दो से ढाई हजार लोगों के काफिले में चलकर वह यहां पहुंचे। सफर के दौरान उन पर कई बार हमले हुए और सामान लूट लिया। हमलों में कई लोगों की जान भी चली गई। यह दर्द.. कैसे बयां करें.. हमारे लिए मोदी सरकार भगवान बनकर आई है। 
विज्ञापन

 

बांग्लादेश के मुसलमानों ने उनके घरों को आग लगा दी

ग्राम बगुलिया निवासी विधान विश्वास कहते हैं कि वह 12 वर्ष के थे, जब उन्हें पूर्वी पाकिस्तान से पलायन करना पड़ा। वर्ष 1971 से पहले पूर्वी पाकिस्तान के ग्राम कुला और जिला खुन्ना में उनके परिवार के पास काफी जमीन थी। विधान बताते हैं कि पिता उपेन, मां रेनूका और बहन सुभा के साथ सुबह आठ बजे करीब ढाई हजार के काफिले के साथ वह जान बचाकर भागे।

बांग्लादेश के मुसलमानों ने उनके घरों को आग लगा दी। 12 दिन तक पैदल चलकर भारतीय बॉर्डर पर पहुंचे। रास्ते में कई बार के हमलों में सारा सामान लूट लिया गया। कई बुजुर्ग रास्ते में मार दिए गए। उनके पास अभी तक नागरिकता नहीं है लेकिन अब सीएए उन्हें हक से जीने का अधिकार देगा। 

पूर्वी पाकिस्तान की उनकी जमीन और घर सब छीन लिए गए

इसी तरह बगुलिया निवासी विनोद हलदार बताते हैं कि वह बांग्लादेश के जिला फरीदपुर, ग्राम पोलसा से 27 की उम्र में पत्नी सरस्वती के साथ जान बचाकर आए थे। उनको अभी तक नागरिकता नहीं मिल पाई है। अजीत सरकार कहते हैं कि 21 वर्ष की उम्र में तब वह रातोंरात जान बचाकर भारत आए थे। पूर्वी पाकिस्तान में उनकी जमीन और घर सब छीन लिए गए।

बरी निवासी सपन विश्वास कहते हैं कि ढाका, जमौर जिले के ग्राम आमतला में अपना फार्म छोड़कर जान बचाकर आए। वहां से भागने के दौरान उनके अपने मारे गए। सीएए के लागू होने से अब उन्हें भारत की नागरिकता मिल जाएगी... भारत माता की जय। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed