दो सीटों पर मोदी लहर को टक्कर देंगे उत्तराखंड के CM
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एम्स में इलाज करा रहे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत धारचूला के साथ डोईवाला विधानसभा क्षेत्र से भी चुनाव मैदान में कूद सकते हैं।
प्रदेश विधानसभा की तीन सीटों पर आगामी 21 जुलाई को चुनाव है। तीनों सीटें जीतने पर कांग्रेस सरकार को बसपा और निर्दलीयों के समर्थन की बैसाखियों से मुक्ति मिल जाएगी।
इसलिए कांग्रेस हाईकमान ने इन उप चुनावों को लेकर रावत को पूरी छूट दे दी है। उत्तराखंड में भाजपा के दो विधायकों पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और अजय टमटा के सांसद चुने जाने के बाद डोईवाला और सोमेश्वर सीटें खाली हुई हैं।
जबकि कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को विधानसभा पहुंचाने के लिए हाल में धारचूला सीट खाली की है।
पूर्ण बहुमत के लिए मात्र तीन सीटों की दरकार
70 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के 32 विधायक हैं और एक मनोनीत विधायक भी कांग्रेस का है। उसे पूर्ण बहुमत के लिए मात्र तीन सीटों की दरकार है।
इसलिए हरीश रावत को डोईवाला से भी चुनाव लड़ाने की तैयारी है। पार्टी का मानना है कि मुख्यमंत्री के मैदान में होने पर डोईवाला सीट जीती जा सकती है।
योजना है कि दोनों सीटें जीतने पर रावत धारचूला सीट खाली कर देंगे। अल्मोड़ा जिले की सोमेश्वर की सुरक्षित सीट से भी कांग्रेस को सकारात्मक नतीजे की उम्मीद है, क्योंकि रावत मूलत: अल्मोड़ा के निवासी हैं।
विधानसभा चुनाव पर हावी नहीं होगी मोदी लहर
प्रदेश कांग्रेस का मानना है कि लोकसभा चुनाव में भले ही नरेंद्र मोदी की लहर रही हो, लेकिन अब विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे हावी रहेंगे।
उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की निगाहें टिकी हैं। माना जा रहा है कि मोदी सरकार बिहार, दिल्ली और झारखंड व उत्तराखंड में भाजपा का शासन चाहती है।
प्रदेश सरकार बसपा और निर्दलीयों के समर्थन से चल रही है। ऐसे में सरकार पर हर दम खतरा मंडराता रहता है। सरकार बचाए रखने के लिए मुख्यमंत्री को हाल में एक दर्जन लालबत्तियां बांटनी पड़ी।
ऐसे में इन उप चुनावों में कांग्रेस हर हालत में अपने दम पर बहुमत पा लेना चाहती है। ताकि बसपा व निर्दलीय विधायकों की ‘ब्लैकमेलिंग’ से मुक्ति मिल जाए।
कांग्रेस में तेज हुआ टिकट का गणित
टिकट को लेकर कांग्रेस में मारामारी शुरू हो गई है। एक ओर मुख्यमंत्री विरोधी खेमे को जैसे ही लगने लगा कि मुख्यमंत्री धारचूला और डोईवाला से एक साथ चुनाव लड़ सकते हैं तो दिल्ली में लॉबिंग शुरू हो गई है।
विरोधी गुट के कुछ नेता गुरुवार को दिल्ली में प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी से मिले और अपने-अपने तर्क रखे हैं।
विरोधियों का कहना है कि जब मुख्यमंत्री को डोईवाला से ही लड़ना था तो धारचूला क्यों खाली कराई। ऐसे में दोनों सीटें अगर मुख्यमंत्री जीत भी जाते हैं तो भी एक छोड़नी होगी।
मुख्यमंत्री की पहली पसंद प्रदीप टम्टा
फिर जो भी चुनाव लड़ेगा उसे लोग जिताएंगे कि नहीं यह तय नहीं है। हो सकता है लोग मुख्यमंत्री के एक सीट छोड़ने पर नाराज हो जाएं और अगले उम्मीदवार को हरा दें।
सोमेश्वर सुरक्षित सीट पर मुख्यमंत्री की पहली पसंद ससंदीय चुनाव हारे प्रदीप टम्टा हैं। टम्टा चुनाव न लड़ने की घोषणा कर रहे हैं।
ऐसे में अन्य उम्मीदवारों के सामने सवाल है कि कहीं अंतिम समय में प्रदीप टम्टा को मना लिया गया तो उनकी दावेदारी का क्या होगा।
वहीं दोनों सीटों से चुनाव लड़ने के पीछे मुख्यमंत्री समर्थकों का तर्क है कि इससे पूरे देश में मैसेज जाएगा कि कांग्रेस उत्तराखंड में मजबूत हुई है। बाद में एक सीट पर किसी को भी जिताया जा सकता है।