हादसे के खौफनाक मंजर की कहानी, चालक की जुबानी
- बस चालक दिनेश रावत ने सुनाई हादसे की कहानी
- पहाड़ी पर टकराने से पहले यात्रियों को किया सावधान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उस समय बस की स्पीड़ 40 और 50 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रही होगी। एक यात्री को उतारने के लिए बस को दूसरे गियर में डालकर ब्रेक लगाए तो ब्रेक का पैडल अंदर घुसता चला गया। इसके बाद दो तीन बार फिर ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन ढलान पर होने के कारण बस बेकाबू होती चली गई।
एक तरफ खाई थी और दूसरी तरफ चट्टान। यात्रियों को अलर्ट कर बस को चट्टान पर चढ़ाने में देर नहीं की। कुदरत का करम रहा, तमाम यात्रियों की जिंदगी बच गई।
नैनबाग के कांडी निवासी दिनेश रावत की आंखों में वो खौफनाक मंजर अब भी तैर रहा है। अमर उजाला से बातचीत में रावत ने पूरे घटनाक्रम का सिलेसिलेवार जिक्र किया। 16 साल से उत्तराखंड परिवहन निगम में संविदा बस चालक रावत कहते हैx उनके साथ पहली बार ऐसी अनहोनी हुई।
यात्रियों से कहा, 'छलांग मत लगाना सीट कसकर पकड़ लो'
शनिवार सुबह देहरादून से करीब 47 यात्रियों को लेकर हनोल के लिए रवाना हुए थे। सुबह 10:45 बजे का वक्त रहा होगा। संतला देवी मंदिर के पास डब्लू मेरिट होटल के पास एक यात्री ने उतरने का इशारा किया। बस को रोकने के लिए ब्रेक दबाए तो वो फेल थे।
एक बार तो समझ में ही नहीं आया कि क्या करूं? तब तक यात्रियों में अफरातफरी मच चुकी थी। ऐसे में खुद को संभालते हुए यात्रियों को छलांग नहीं लगाने की सलाह दी।
खाई से खुद और यात्रियों की जान बचाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता सुझाई दिया कि बस को चट्टान पर चढ़ाकर पलट दिया जाए। यात्रियों को फौरन सीट को कसकर पकड़ने की सलाह दी और वक्त ने साथ दिया और सब कुछ अच्छा होता चला गया।