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जहां ‘रनर’ रही वहां पहले नंबर-1 के लिए 'हाथी' ने लगाई ताकत

Mon, 06 Feb 2017 12:42 PM IST
कृष्णेंदु कुमार/ अमर उजाला, देहरादून
कृष्णेंदु कुमार/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 06 Feb 2017 12:42 PM IST
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bsp strategy in uttarakhand.
बसपा प्रतीक

बसपा अपनी सारी ताकत अब उन विधानसभा क्षेत्रों में लगा रही है जहां पिछले चुनाव में वह दूसरे स्थान पर रही है। बसपा ने पिछले चुनाव में मंगलौर, झबरेड़ा और भगवानपुर तीन मैदानी सीटों को जीता था और सात सीटों पर वह दूसरे स्थान पर रही थी। इस बार दूसरे नंबर वाले विधानसभा क्षेत्रों में पहले नंबर पर रहने के लिए बसपाइयों ने पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार की कार्ययोजना तैयार की है। अपने मुद्दे लेकर बसपाई हर घर का दरवाजा खटखटाएंगे।

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बसपा अध्यक्ष मायावती ने सितारगंज में अपनी पहली चुनावी सभा रविवार को संबोधित कर ली है। लक्सर में मायावती दूसरी जनसभा नौ फरवरी को संबोधित करेंगी। वोटरों को लुभाने के साथ ही वह पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुनाव जीतने की टिप्स देंगी। वैसे दूसरे नंबर वाले स्थानों पर बसपा एक महीने से कार्यक्रम कर रही है।
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कुमाऊं और गढ़वाल में हुए कार्यकर्ता सम्मेलनों में बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी चुनावी रणनीति नेताओं और कार्यकर्ताओं को पहले ही बता चुके हैं। फाइनल टच मायावती की जनसभाओं से दिया जा रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2002 में 10.93 प्रतिशत के साथ सात विधायक जीते, वर्ष 2007 में 11.76 प्रतिशत मत हासिल कर पार्टी ने आठ सीटों पर कब्जा किया। वर्ष 2012 में पार्टी का मतप्रतिशत बढ़कर 12.19 पहुंचा, लेकिन तीन सीटें ही जीत पाई।   

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ये रहे 2012 के आंकड़े

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मायावती - फोटो : SELF
2012 में ज्वालापुर, पिरान कलियर, खानपुर, चंपावत, भीमताल, जसपुर और सितारगंज विधानसभा में पार्टी दूसरे स्थान पर रही है।

धर्मपुर, रायपुर, हरिद्वार, रुड़की, हरिद्वार ग्रामीण, डीडीहाट, बागेश्वर, रानीखेत, काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, रुद्रपुर, किच्छा, रामनगर, नैनीताल, अल्मोड़ा और कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र में बसपा प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे।

जो लोग बसपा को कमजोर आंक रहे हैं उनको 11 मार्च को जवाब मिल जाएगा। इस बार हाथी न सिर्फ मैदानी इलाकों में दौड़ेगा बल्कि पहाड़ पर भी चढ़ेगा। अभी तक यह कहा जाता है कि बसपा मैदान की पार्टी है, बसपा इस बार इस मिथक को तोड़कर दिखाएगी। 
-भृगुराशन राव, प्रदेश अध्यक्ष, बसपा
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