बीआरओ के फैसले ने उड़ाई उत्तराखंड सरकार की नींद
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राज्य सरकार की लगातार कोशिशों और दबाव के बाद भी सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) चार धाम यात्रा और आपदा में उजड़ी सड़कों के निर्माण को तैयार नहीं है।
बीआरओ अब सिर्फ देश की सीमाओं से लगी सड़कों का ही निर्माण करेगा। ऐसे समय में जब चार धाम यात्रा शुरू होने में सिर्फ चालीस दिन शेष हैं, बीआरओ के हाथ खड़े कर देने से सरकार की नींद उड़ गई है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंगलवार को कैबिनेट की आपात बैठक बुलाकर यात्रा मार्ग और उससे जुड़ी योजनाओं की समीक्षा कर महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
अन्य एजेंसियां को सक्रिय होने के आदेश
कैबिनेट बैठक में तय हुआ कि बीआरओ के भरोसे न बैठकर अन्य एजेंसियों को सक्रिय कर हर हाल में तय समय में यात्रा शुरू की जाए। इसके लिए काम कर रहे मजदूरों, कर्मचारियों व अधिकारियों को अतिरिक्त भत्ता देने का भी फैसला हुआ है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर गौरीकुंड, भीमबली और नैनचुनी में तीन हेलीपैड बनेंगे।
कैबिनेट ने पीडब्ल्यूडी से तत्काल संबंधित कार्यों की स्वीकृतियों की मंजूरी को कहा है।
केदारनाथ मंदिर समिति को भी दो करोड़ रुपए की राशि स्वीकृति की गई ताकि फौरी तौर पर मंदिर के आसपास कुछ निर्माण या अन्य व्यवस्था पर खर्च किया जा सके। कुमाऊं की आपदाग्रस्त इलाकों की सड़कों के लिए 14 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृति की गई है।
कुमाऊं की सड़कों के लिए 14 करोड़ स्वीकृत
आपदा में बुरी तरह प्रभावित कोसी बैराज और आसपास के इलाके के विकास के लिए स्वीकृत धनराशि को तीन हिस्सों में बांटने का निर्णय भी कैबिनेट में लिया गया है।
दरअसल कोसी बैराज और आसपास के लिए करीब 12 करोड़ की योजना तैयार हुई है। जबकि केंद्र से मिले धन का खर्च एक योजना पर पांच करोड़ रुपए से अधिक खर्च करने के लिए अनुमति लेनी पड़ती। लिहाजा इसे तीन हिस्सों में किया गया है।
बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से जड़ी 40 सड़कों के लिए 14 करोड़ रुपए जारी हुए हैं। बैठक में मंत्रियों ने नारसन से हरिद्वार और बानियावाला की खस्ताहाल सड़कों और दिक्कतों का मामला भी उठाया। राज्य सरकार इनकी मरम्मत केलिए केंद्र सरकार ने अनुमति ले ली है और 2-3 दिन में टेंडर निकाले जाएंगे।
जारी काम करता रहेगा बीआरओ
बैठक में फैसला हुआ है कि फिलहाल बीआरओ जहां काम कर रहा है या कर सकता है वहां जारी रखे। सोनप्रयाग में एलाइनमेंट और पुल को लेकर आ रही तकनीकी दिक्कतें दूर करने के लिए बीआरओ को कहा गया है।
लामबगड़ और धरासू में बैंड उपचार आदि को लेकर भी निर्देश दिए गए। लामबगड़ के संवेदनशील जोन के लिए अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल करने की बात की गई है। मंदाकनी और सरस्वती के उद्गम स्थल पर भूस्खल प्रभावित इलाकों को लेकर विशेषज्ञों की राय को कहा गया है।
मयाली और गुप्तकाशी के चार किलोमीटर के पैदल वैकल्पिक मार्ग को भी दुरुस्त करने को कहा गया है। साथ ही भीमवली में एलाइनमेंट बदलने का भी फैसला लिया गया।
बीआरओ के खुद के काम लंबित
बैठक में इस बात की भी जानकारी दी गई कि बीआरओ सीमा से जुड़ी सड़कों को लेकर ही 2010 का टार्गेट पूरा नहीं कर सका है। सीमांत की जो सड़कें बीआरओ का बनानी थीं उसे ही 2015 तक पूरा कर सकेगा।
हाल ही दिल्ली में हुई बैठक में रक्षा सचिव ने राज्य सरकार को स्पष्ट कर दिया कि बीआरओ अब सिर्फ सीमा से सटे इलाकों की ही सड़कें बनाएगा।
बीआरओ जुलाई तक राज्य सरकार की सभी सड़कें हैंडओवर कर देगा। बीआरओ ने सड़क बनाने में तकनीकी और लेबर को लेकर आ रही दिक्कत का भी हवाला दिया है।
केदारनाथ में हो रहा बर्फ पिघलने का इंतजार
यात्रियों की सुविधा के लिए 64 हटमेंट भी तैयार किए जाएंगे। गुप्तकाशी, तिलवाड़ा, सिल्ली, विजय नगर, रुद्रप्रयाग में काम में तेजी लाने को कहा गया है। केदारनाथ और आसपास के इलाके में कामकाज शुरू करने के लिए बर्फ पिघलने का इंतजार किया जा रहा है।
निरीक्षण की अनुमति लेंगे
कैबिनेट में इस बार पर भी सहमति बनी है कि आपदा से जुड़े कार्यों की निगरानी प्रभारी मंत्री करें। इसके लिए बैठक में फैसला लिया गया कि जरूरत पड़ने पर निर्वाचन आयोग से अनुमति ली जाए।
यात्री पंजीकरण के लिए कम्पनी का चयन
पहली बार यात्रा के लिए शुरू किए पंजीकरण के लिए एक कम्पनी का चयन कर लिया गया है। बैठक में मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग को पंजीकरण शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने बताया कि एक-दो दिन में काम शुरू हो जाएगा।
इसी प्रकार कंट्रोल रूम व सब कंट्रोल रूम के साथ ही सुगम यात्रा के प्रचार-प्रसार पर जोर देने को कहा गया है। खाद्य विभाग को यात्रा मार्ग पर कैरोसिन, गैस और अन्य खाद्य सामग्री की उपलब्धता के निर्देश दिए गए हैं।
एमजीएसवाई सड़कों को मंजूरी
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (एमजीएसवाई) के तहत बनने वाली सड़कों की जानकारी भी कैबिनेट की बैठक में दी गई। इस योजना के तहत 130 सड़कों का टेंडर हो चुका है। जिसमें 45 में सिंगल टेंडर पड़े हैं। 38 सड़कों के लिए रि-टेंडरिंग होगी। इस योजना के तहत 350 सड़कों का सुधारीकरण होना है।